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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > गुप्त नवरात्रि अष्टमी: मां बगलामुखी पूजा विधि और महत्व
व्रत और त्योहार

गुप्त नवरात्रि अष्टमी: मां बगलामुखी पूजा विधि और महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: July 22, 2026 12:55 pm
दिव्यसुधा
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मां बगलामुखी की पूजा करते श्रद्धालु और गुप्त नवरात्रि अष्टमी का धार्मिक दृश्य
गुप्त नवरात्रि अष्टमी पर मां बगलामुखी की आराधना को विशेष फलदायी माना जाता है।
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सनातन धर्म में गुप्त नवरात्रि को साधना, तंत्र-मंत्र और दस महाविद्याओं की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र समय माना जाता है। गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि विशेष रूप से मां बगलामुखी की उपासना के लिए समर्पित होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से मां बगलामुखी की पूजा, मंत्र जाप और हवन करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, न्यायालय संबंधी मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बढ़ती है और जीवन में आने वाली बाधाओं से रक्षा होती है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई साधना से साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कौन हैं मां बगलामुखी?
मां बगलामुखी को देवी दुर्गा की दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माना जाता है। उन्हें पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां बगलामुखी अपने भक्तों को शत्रुओं के भय से मुक्त करती हैं और अन्याय के विरुद्ध विजय का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। उनकी कृपा से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है और साधक के भीतर आत्मबल का विकास होता है।

गुप्त नवरात्रि अष्टमी पर पूजा का महत्व
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि की अष्टमी पर मां बगलामुखी की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। जिन लोगों के जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हों, विरोधियों से परेशानी हो या न्यायालय में कोई मामला लंबित हो, उनके लिए इस दिन की पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है। कहा जाता है कि सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई साधना से मां अपने भक्तों को मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और सफलता का आशीर्वाद देती हैं।

मां बगलामुखी की पूजा विधि
गुप्त नवरात्रि की अष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ एवं पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को शुद्ध कर मां बगलामुखी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद मां को पीले पुष्प, हल्दी, चने की दाल, बेसन के लड्डू और पीले वस्त्र अर्पित करें। श्रद्धापूर्वक मां बगलामुखी के मंत्र, स्तोत्र या कवच का जाप करें। पूजा के अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि, शत्रुबाधा से रक्षा और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करें।

पीले रंग का विशेष महत्व
मां बगलामुखी को पीतांबरा देवी कहा जाता है, इसलिए उनकी पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। पीले वस्त्र, पीले फूल, हल्दी और पीले रंग के प्रसाद का उपयोग शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं और साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।

दतिया का प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर
मध्य प्रदेश के दतिया स्थित मां बगलामुखी मंदिर को देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान यहां देशभर से हजारों श्रद्धालु और साधक दर्शन एवं विशेष पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान मंदिर में विशेष अनुष्ठान, हवन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भक्त भाग लेते हैं।

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