Saturday, 11 Jul 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > योगिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व जानें
व्रत और त्योहार

योगिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व जानें

दिव्यसुधा
Last updated: July 10, 2026 1:18 pm
दिव्यसुधा
Share
भगवान विष्णु की प्रतिमा, तुलसी दल, दीपक और पूजा सामग्री के साथ योगिनी एकादशी व्रत का धार्मिक दृश्य
योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, व्रत कथा और भक्ति से प्राप्त होती है आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा।
SHARE

सनातन धर्म में प्रत्येक एकादशी तिथि भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इनमें आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने और योगिनी एकादशी की कथा सुनने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है तथा सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत का पुण्य हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान फलदायी माना गया है।

योगिनी एकादशी का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार योगिनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। मान्यता है कि इस दिन उपवास, पूजा, भजन और दान-पुण्य करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। भगवान श्रीहरि की कृपा से रोग, दुःख और कष्ट दूर होते हैं तथा मन में शांति और संतोष का संचार होता है।

योगिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इस एकादशी का महत्व धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। प्राचीन समय में अलकापुरी नामक दिव्य नगरी में धन के देवता कुबेर का राज्य था। कुबेर भगवान शिव के परम भक्त थे और उनकी प्रतिदिन विशेष पूजा होती थी। उनके लिए हेम नाम का एक माली मानसरोवर से सुंदर पुष्प लाकर अर्पित करता था। हेम अपनी पत्नी विशालाक्षी से अत्यंत प्रेम करता था। एक दिन वह फूल तो ले आया, लेकिन पत्नी के प्रेम में इतना मग्न हो गया कि समय पर भगवान शिव की पूजा के लिए फूल नहीं पहुंचा सका। इससे क्रोधित होकर कुबेर ने उसे श्राप दिया कि वह अपनी पत्नी से वियोग का दुःख सहेगा और पृथ्वी पर कोढ़ी बनकर कष्टमय जीवन बिताएगा। श्राप के प्रभाव से हेम तुरंत पृथ्वी पर आ गिरा। उसका शरीर कोढ़ से ग्रस्त हो गया और पत्नी भी उससे बिछड़ गई। वर्षों तक कष्ट सहने के बाद एक दिन वह महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा। ऋषि ने उसकी पीड़ा का कारण पूछा तो हेम ने अपनी पूरी कथा सुनाई। महर्षि मार्कण्डेय ने उसे श्रद्धा और नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। हेम ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से उसका श्राप समाप्त हो गया, उसका शरीर पुनः स्वस्थ हो गया और वह अपनी पत्नी के साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करने लगा। इसी कारण योगिनी एकादशी को पापों से मुक्ति, रोगों के नाश और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है।

योगिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि
योगिनी एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को स्वच्छ करके कलश स्थापित करें तथा भगवान श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा या चित्र विराजमान करें। इसके बाद उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, फल, धूप और दीप अर्पित करें। पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भगवान को गुड़ और चने का भोग अर्पित करें तथा अंत में आरती कर योगिनी एकादशी की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। श्रद्धा और भक्ति से की गई यह पूजा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्रदान करने वाली मानी जाती है।

योगिनी एकादशी की कथा हमें यह शिक्षा देती है कि कर्तव्य के प्रति लापरवाही और अहंकार व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में डाल सकते हैं, लेकिन सच्चा पश्चाताप, भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण जीवन की दिशा बदल सकते हैं। यह व्रत केवल इच्छाओं की पूर्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन और भगवान श्रीहरि की शरण में जाने का पावन अवसर भी है।

TAGGED:आध्यात्मिक ज्ञानएकादशी व्रतधर्म और संस्कृतिधार्मिक कथाधार्मिक महत्वपूजा विधिभक्तिभगवान विष्णुयोगिनी एकादशीयोगिनी एकादशी 2026विष्णु पूजाव्रत कथासनातन धर्महिंदू त्योहारहिंदू धर्म
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article शनि देव की प्रतिमा के साथ ग्रह शनि का प्रतीकात्मक चित्र और 27 जुलाई 2026 से शनि वक्री होने का ज्योतिषीय संकेत शनि वक्री 2026: इन राशियों को मिलेगा करियर और धन लाभ
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

featuredसनातन धर्म

पितृ पक्ष में क्यों वर्जित है प्याज-लहसुन? जानें सात्त्विक भोजन और श्राद्ध की परंपरा

By दिव्यसुधा
अन्य

अवध प्रांत में राम रक्षा स्तोत्र प्रशिक्षण वर्ग का सफल आयोजन

By दिव्यसुधा
श्रीकृष्ण द्वारा कर्म और फल का रहस्य समझाते हुए अर्जुन का प्रसंग
अन्य

क्या भगवान अन्याय करते हैं? श्रीकृष्ण द्वारा बताए कर्म और फल का गहरा रहस्य

By दिव्यसुधा
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

बीमारियों से नहीं मिल रहा छुटकारा? कारण हो सकता है वास्तु दोष

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?