Tuesday, 30 Jun 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > स्नान पूर्णिमा 2026: भगवान जगन्नाथ स्नान के बाद 15 दिन बीमार क्यों पड़ते हैं? जानिए रहस्य
अन्य

स्नान पूर्णिमा 2026: भगवान जगन्नाथ स्नान के बाद 15 दिन बीमार क्यों पड़ते हैं? जानिए रहस्य

दिव्यसुधा
Last updated: June 29, 2026 11:29 am
दिव्यसुधा
Share
स्नान पूर्णिमा 2026 पर 108 पवित्र कलशों से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का महास्नान करते सेवायत
स्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों से महास्नान, जिसके बाद शुरू होता है अनासार काल।
SHARE

पुरी धाम की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा से पहले एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र अनुष्ठान संपन्न होता है, जिसे स्नान यात्रा या देव स्नान पूर्णिमा कहा जाता है। यह पर्व ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का भव्य महास्नान कराया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 29 जून, सोमवार को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इसी महास्नान के साथ भगवान की वार्षिक रथ यात्रा की तैयारियां औपचारिक रूप से प्रारंभ हो जाती हैं। स्नान यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान और भक्तों के बीच प्रेम, श्रद्धा और मानवीय भावनाओं का अद्भुत प्रतीक भी है।

108 पवित्र कलशों से होता है भगवान का महास्नान
स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को मंदिर के स्नान मंडप पर विराजमान किया जाता है। इसके बाद 108 स्वर्ण कलशों में भरे पवित्र जल से उनका अभिषेक किया जाता है। यह जल मंदिर परिसर के एक विशेष और पवित्र कुएं से लाया जाता है, जिसे पूरे वर्ष में केवल इसी अवसर पर खोला जाता है। जल में सुगंधित द्रव्य, औषधीय जड़ी-बूटियां और पवित्र तत्व मिलाकर भगवान का दिव्य स्नान कराया जाता है। इस अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण और भक्ति संगीत वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।

स्नान के बाद भगवान धारण करते हैं गजवेश
महास्नान के उपरांत भगवान जगन्नाथ का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस दिन वे गजवेश (हाथी स्वरूप) धारण करते हैं, जो इस उत्सव की सबसे अनूठी परंपराओं में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान गणेश के एक भक्त ने जगन्नाथ जी के दर्शन की इच्छा व्यक्त की थी। भक्त की श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें गजानन स्वरूप में दर्शन दिए। तभी से स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ को गजवेश में सजाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।

स्नान के बाद क्यों बीमार पड़ जाते हैं भगवान?
स्नान यात्रा की सबसे अनोखी और भावपूर्ण परंपरा यह है कि महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा प्रतीकात्मक रूप से अस्वस्थ हो जाते हैं। मान्यता है कि 108 कलशों के शीतल जल से स्नान करने के कारण उन्हें ज्वर हो जाता है। इसके बाद वे लगभग 15 दिनों तक एकांतवास (अनासार काल) में रहते हैं। इस अवधि में मंदिर के मुख्य दर्शन बंद रहते हैं और श्रद्धालु भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर पाते। इस दौरान पुजारी भगवान की विशेष सेवा करते हैं तथा उन्हें औषधीय काढ़े और हल्के भोग अर्पित किए जाते हैं। यह परंपरा भगवान के भक्तवत्सल और मानवीय स्वरूप का अद्भुत संदेश देती है।

नवयौवन दर्शन और रथ यात्रा का शुभारंभ
लगभग पंद्रह दिनों के विश्राम और उपचार के बाद भगवान पूर्णतः स्वस्थ होकर नवयौवन दर्शन देते हैं। इस अवसर पर उनका नया और अत्यंत आकर्षक श्रृंगार किया जाता है, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने भव्य रथों पर विराजमान होकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। वर्ष 2026 में भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा 16 जुलाई को निकाली जाएगी। ऐसी मान्यता है कि रथ की रस्सी खींचने या उसके दर्शन मात्र से भक्तों को विशेष पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख, शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।

स्नान पूर्णिमा का आध्यात्मिक संदेश
स्नान पूर्णिमा हमें यह सिखाती है कि भगवान अपने भक्तों के अत्यंत निकट हैं और वे भी मानव भावनाओं से जुड़े प्रतीकात्मक रूप धारण करते हैं। उनका बीमार होना, उपचार करवाना और फिर नवयौवन स्वरूप में भक्तों के बीच लौटना जीवन में धैर्य, विश्वास, सेवा और पुनर्जागरण का संदेश देता है। यही कारण है कि स्नान यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर मानी जाती है। करोड़ों भक्त इस दिन भगवान जगन्नाथ के चरणों में प्रणाम कर सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और मोक्ष की कामना करते हैं।

TAGGED:Jagannath TempleOdisha FestivalRath Yatra 2026अनासार कालगजवेशजगन्नाथ रथ यात्राजगन्नाथ स्नान यात्रादेव स्नान पूर्णिमाधार्मिक समाचारनवयौवन दर्शनपुरी जगन्नाथ मंदिरभगवान जगन्नाथसनातन धर्मस्नान पूर्णिमास्नान पूर्णिमा 2026हिंदू पर्व
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article वट पूर्णिमा 2026: व्रत का महत्व, पूजा विधि, सावित्री-सत्यवान कथा और अखंड सौभाग्य का रहस्य
Next Article सीढ़ियों के नीचे रखे इनवर्टर और वास्तु शास्त्र में बताए गए ऊर्जा असंतुलन का प्रतीकात्मक चित्र सीढ़ियों के नीचे इनवर्टर रखना शुभ है या अशुभ? जानिए वास्तु शास्त्र क्या कहता है
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

शनिदेव की आरती और मंत्र का पाठ करते हुए भक्त
आरती/मंत्र

शनिदेव की आरती और मंत्र

By दिव्यसुधा
बुधवार को भूलकर भी न करें ये काम वरना भुगतना होगा अंजाम
अन्य

बुधवार को भूलकर भी न करें ये काम वरना भुगतना होगा अंजाम

By दिव्यसुधा
तरकुलहा देवी मंदिर का मुख्य पवित्र स्थल, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
मंदिर

गोरखपुर में स्थित एक ऐसा देवी मंदिर जहां अंग्रजों का सिर काटकर देवी को चढ़ाते थे शहीद बाबू बंधू सिंह, अब बकरे की बलि देने की परंपरा

By दिव्यसुधा
भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति के समक्ष मंत्र जप करते भक्त का शांत आध्यात्मिक दृश्य
आरती/मंत्र

“ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने”: जीवन के हर कष्ट का दिव्य सहारा

By Ekta Mishra
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?