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2026 चंद्र ग्रहण: फाल्गुन पूर्णिमा पर खग्रास ग्रहण, सूतक काल और धार्मिक महत्व

Ekta Mishra
Last updated: January 27, 2026 1:41 pm
Ekta Mishra
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2026 फाल्गुन पूर्णिमा चंद्र ग्रहण समय सूतक काल और धार्मिक महत्व
3 मार्च 2026 फाल्गुन पूर्णिमा का खग्रास चंद्र ग्रहण – जानिए सूतक काल, समय और आध्यात्मिक महत्व
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साल 2026 में धार्मिक और ज्योतिष दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाओं में पहला प्रमुख चंद्र ग्रहण फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है। यह ग्रहण न केवल धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अत्यंत शुभ-अशुभ प्रभाव रखता है, बल्कि इसे ध्यान में रखते हुए सूतक काल का पालन करना भी आवश्यक माना जाता है। भारत में कुल चार ग्रहण होने की संभावना है, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। इनमें से पहला चंद्र ग्रहण मार्च के महीने में फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है। इस दिन धार्मिक दृष्टि से छोटी होली या होलिका दहन भी मनाया जाता है। अतः यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

चंद्र ग्रहण का समय – 3 मार्च 2026

पंचांग के अनुसार, 3 मार्च 2026, मंगलवार को फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण लगेगा। भारतीय समय अनुसार इस ग्रहण की अवधि निम्नानुसार है:

चंद्र ग्रहण प्रारंभ: 03:20 PM
खग्रास प्रारंभ: 04:34 PM
ग्रहण मध्य: 05:04 PM
खग्रास समाप्त: 05:33 PM
चंद्र ग्रहण समाप्त: 06:47 PM
खग्रास काल: 59 मिनट
कुल अवधि: 3 घंटे 27 मिनट

यह ग्रहण खग्रास चंद्र ग्रहण के रूप में दिखाई देगा और भारत के कुछ हिस्सों में विशेष रूप से देखा जा सकेगा।

चंद्र ग्रहण का सूतक काल
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण के दौरान सूतक काल का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। सूतक काल में शुभ कार्यों से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय ग्रहण का प्रभाव अधिक माना जाता है। साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य रहेगा। चंद्र ग्रहण के प्रारंभ से लगभग 9 घंटे पहले सूतक लग जाएगा। इस वर्ष सूतक काल की अवधि इस प्रकार है:

सूतक प्रारंभ: 03 मार्च 2026, सुबह 6:20 AM
सूतक समाप्त: 03 मार्च 2026, शाम 6:46 PM

इस दौरान भोजन, पूजा-पाठ, यात्रा और अन्य शुभ कार्यों में सावधानी बरतना आवश्यक माना जाता है।

चंद्र ग्रहण कहाँ दिखाई देगा?
03 मार्च को लगने वाला यह खग्रास चंद्र ग्रहण भारत के कुछ विशेष क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। इनमें शामिल हैं: पश्चिम बंगाल का उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए ग्रहण का दर्शन सीधे दिखाई देगा। अन्य क्षेत्रों में यह ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
चंद्र ग्रहण को वैदिक ज्योतिष में अशुभ माना जाता है। इसे पाप ग्रहण के समय समझा जाता है और इस दिन विशेष उपाय करने की सलाह दी जाती है। चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ धार्मिक मान्यताएँ हैं:

सावधानी: ग्रहण काल में भोजन, नहाना, यात्रा और अन्य शुभ कार्यों से बचना चाहिए।
पुण्य कर्म: इस समय दान-पुण्य, मंत्र जाप, ध्यान और साधना अत्यधिक फलदायी मानी जाती है।
मंत्र जाप: ‘ॐ सूर्याय नमः’ या ‘ॐ चंद्राय नमः’ जैसे मंत्रों का जाप करने से ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचा जा सकता है।
होम और यज्ञ: ग्रहण के दौरान सूर्य या चंद्र के लिए होम करने से परिवार और स्वास्थ्य पर शुभ प्रभाव पड़ता है।

विशेष सलाह
ग्रहण के समय किसी भी तरह का नकारात्मक कार्य करने से बचें।
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों के लिए ग्रहण काल में विशेष सावधानी रखी जाती है।
चंद्र ग्रहण का प्रभाव 12 घंटे पहले और बाद तक महसूस किया जा सकता है।

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर पड़ रहा है। यह खग्रास चंद्र ग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देगा और धार्मिक दृष्टि से सूतक काल का पालन अत्यंत आवश्यक है। इस दिन पूजा, दान, मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ फलदायी होगा। छोटे-बड़े सभी शुभ कार्यों के लिए ग्रहण के समय सावधानी बरतना चाहिए।

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