Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > 19 वर्षीय देवव्रत महेश रेखे की अद्भुत साधना – दण्डक्रम पारायणम् में ऐतिहासिक सफलता
अन्य

19 वर्षीय देवव्रत महेश रेखे की अद्भुत साधना – दण्डक्रम पारायणम् में ऐतिहासिक सफलता

दिव्यसुधा
Last updated: December 5, 2025 1:38 pm
दिव्यसुधा
Share
19 वर्षीय देवव्रत महेश रेखे दण्डक्रम पारायणम् पूरा करते हुए – वैदिक साधना की ऐतिहासिक उपलब्धि
19 वर्षीय वैदिक साधक देवव्रत महेश रेखे, जिन्होंने 50 दिनों की अनवरत साधना से दण्डक्रम पारायणम् पूरा कर 200 वर्षों बाद नई मिसाल कायम की।
SHARE

महाराष्ट्र के 19 वर्षीय देवव्रत महेश रेखे ने वह कर दिखाया है, जिसे पिछले 200 वर्षों में कोई पूरा नहीं कर पाया था। मात्र 19 वर्ष की आयु में देवव्रत ने अत्यंत कठिन शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के 2000 मंत्रों वाले ‘दण्डक्रम पारायणम्’ को 50 दिनों तक अनवरत साधना द्वारा पूर्ण किया है। यह उपलब्धि सिर्फ एक विधि का पाठ नहीं, बल्कि मन, वाणी और आत्मा की शुद्धता का ऐसा संगम है जो दुर्लभ ही देखने को मिलता है। उनकी तपस्या ने वैदिक परंपरा को फिर से जीवंत कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना: परंपरा को मिला राष्ट्रीय सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विशेष पोस्ट में देवव्रत की इस असाधारण उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने लिखा कि 19 वर्ष की आयु में इतनी कठिन साधना को पूर्ण करना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दण्डक्रम पारायणम् में उपस्थित वैदिक ऋचाएं और पवित्र शब्द अत्यंत शुद्धता के साथ उच्चारित करने पर ही पूर्णता प्राप्त होती है। काशी के सांसद के रूप में उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि यह तपस्या काशी की पवित्र भूमि पर पूरी हुई। पीएम की यह प्रशंसा केवल देवव्रत के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण वैदिक परंपरा के सम्मान का प्रतीक है।

दण्डक्रम पारायणम् क्या है?
दण्डक्रम पारायणम् वेदों के पाठ की सबसे कठिन विधियों में से एक मानी जाती है। इसमें लगभग 2000 मंत्रों का ऐसा क्रमबद्ध पाठ होता है, जिसमें प्रत्येक स्वर, मात्रा और उच्चारण अत्यंत सूक्ष्म और शुद्ध होना आवश्यक है। इस विधि में मंत्रों का एक विशेष क्रम निर्धारित होता है, जिसे धैर्य, ध्यान और वाणी की साधना से ही पूरा किया जा सकता है। कहा जाता है कि इस पाठ को बिना ग्रंथ देखे, पूर्ण शुद्धता के साथ लगातार 50 दिनों तक करना अत्यंत दुर्लभ है। इसी कठिनाई के कारण लगभग 200 वर्षों से कोई भी इस पाठ को पूरी तरह संपन्न नहीं कर पाया था। देवव्रत ने इसे पूरा कर वैदिक परंपरा को नई ऊंचाई प्रदान की है।

देवव्रत महेश रेखे : परिवार, संस्कार और साधना का संगम
देवव्रत महेश रेखे महाराष्ट्र के अहिल्यानगर के एक वैदिक परिवार से आते हैं। उनके पिता वेदब्रह्मश्री महेश चंद्रकांत रेखे स्वयं एक प्रतिष्ठित वैदिक विद्वान हैं और उन्होंने ही अपने पुत्र को इस मार्ग पर प्रेरित किया। देवव्रत वर्तमान में वाराणसी के रामघाट स्थित वल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय के छात्र हैं, जहाँ वे वैदिक अध्ययन और अनुशासन का कठोर पालन करते हैं। इतने कम उम्र में इतनी बड़ी साधना का पूर्ण होना दर्शाता है कि उनके अंदर वैदिक संस्कार, गुरु-भक्ति और दैवीय अनुशासन का अद्भुत समन्वय है।

यह उपलब्धि क्यों है आध्यात्मिक भारत का गर्व?
आधुनिक समय में जहाँ लोग ध्यान की स्थिरता या मन की एकाग्रता को चुनौती मानते हैं, वहीं देवव्रत ने 50 दिनों तक निरंतर वैदिक मंत्रोच्चारण कर यह सिद्ध किया कि भारतीय आध्यात्मिक शक्ति आज भी उतनी ही जीवंत है जितनी हजारों वर्ष पूर्व थी। उनका कार्य सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि हमारी गुरु-शिष्य परंपरा, वेदों की शुद्धता और भारत की आध्यात्मिक धरोहर का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह घटना बताती है कि युवा पीढ़ी में आज भी वेद, तपस्या और संस्कृति के प्रति गहरा प्रेम और सम्मान मौजूद है।

TAGGED:दण्डक्रम पारायणम्देवव्रत महेश
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article शनि देव की महादशा के प्रभाव और उपाय – आध्यात्मिक ज्योतिष जानकारी शनि की महादशा क्या है? प्रभाव, समस्याएं और शक्तिशाली उपाय
Next Article सामुद्रिक शास्त्र में बोलने के तरीके से व्यक्तित्व पहचान सामुद्रिक शास्त्र: बोलने का तरीका कैसे बताता है व्यक्तित्व का राज?
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

shree krishn
अन्य

क्यों लिया जाता है राधा का नाम श्री कृष्ण के पहले

By दिव्यसुधा
अन्य

Sustainable Tourism Triumphs in the Green Revolution

By दिव्यसुधा
राम कृष्ण परमहंस
अन्य

आध्यात्मिक गुरु स्वामी राम कृष्ण परमहंस जयंती

By दिव्यसुधा
देव दीपावली 2025 पर गंगा घाटों पर दीपदान, भगवान शिव की आराधना और भक्तों की पूजा
अन्य

देव दीपावली 2025: इस विधि से करें महादेव की पूजा, दूर होंगे जीवन के सभी दुख

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?