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दिव्य सुधा > अन्य > 108 साल की धनी बाई ने कांवड़ लेकर किया महाकाल का जलाभिषेक
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108 साल की धनी बाई ने कांवड़ लेकर किया महाकाल का जलाभिषेक

दिव्यसुधा
Last updated: August 25, 2026 1:11 pm
दिव्यसुधा
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108 वर्षीय धनी बाई ने कांवड़ यात्रा पूरी कर बाबा महाकाल का किया जलाभिषेक।
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सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति और आस्था के लिए विशेष माना जाता है। इसी पावन अवसर पर उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में भक्ति का एक ऐसा अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

Contents
बेटों के साथ पूरी की कांवड़ यात्रामहाकाल मंदिर में विशेष दर्शन की व्यवस्थापुजारियों ने किया सम्मानित

108 साल की धनी बाई ने उम्र और शारीरिक कमजोरी को पीछे छोड़ते हुए कांवड़ यात्रा पूरी की और बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचकर जलाभिषेक किया। इस दौरान उनके एक हाथ में कांवड़ और दूसरे हाथ में डमरू था। उनकी अटूट श्रद्धा और उत्साह देखकर मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भी भावुक हो उठे।

बेटों के साथ पूरी की कांवड़ यात्रा

धनी बाई की यह यात्रा इसलिए भी खास रही क्योंकि इस धार्मिक सफर में उनके दोनों बेटे भी उनके साथ मौजूद थे। उनके बड़े बेटे की उम्र करीब 80 वर्ष, जबकि छोटे बेटे की उम्र लगभग 60 वर्ष बताई गई है। मां की भक्ति में दोनों बेटे पूरे रास्ते उनके साथ रहे और हर कदम पर उनका सहयोग किया। मां और दोनों बुजुर्ग बेटों की यह आस्था देखकर मंदिर में मौजूद लोगों ने इसे बेहद भावुक और प्रेरणादायक क्षण बताया।

महाकाल मंदिर में विशेष दर्शन की व्यवस्था

108 वर्षीय धनी बाई के कांवड़ लेकर महाकाल मंदिर पहुंचने की जानकारी जैसे ही मंदिर प्रशासन को मिली, उनके लिए विशेष व्यवस्था की गई। भीड़ को देखते हुए उन्हें सामान्य कतार में खड़े होने से बचाया गया। मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल उन्हें नंदी हॉल तक लेकर गए, जहां से उन्होंने सुगमता से बाबा महाकाल के दर्शन किए। दर्शन के बाद धनी बाई ने डमरू बजाया और अपने साथ लाए पवित्र जल से बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया। यह दृश्य वहां मौजूद श्रद्धालुओं के लिए बेहद भावुक और यादगार बन गया।

पुजारियों ने किया सम्मानित

जलाभिषेक और दर्शन के बाद मंदिर के पुजारियों ने धनी बाई को माला पहनाकर उनका सम्मान किया और प्रसाद भेंट किया। उनकी इस भक्ति ने मंदिर परिसर में मौजूद लोगों का मन जीत लिया। 108 वर्ष की उम्र में कांवड़ लेकर महाकाल के दरबार तक पहुंचना धनी बाई की आस्था, संकल्प और भगवान शिव के प्रति गहरे विश्वास को दर्शाता है। उनकी यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि जब मन में सच्ची श्रद्धा हो, तो उम्र और परिस्थितियां भी भक्ति के रास्ते में बाधा नहीं बनतीं। बाबा महाकाल के प्रति धनी बाई की यह आस्था सावन के पावन महीने में भक्ति और विश्वास की एक ऐसी तस्वीर बन गई, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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