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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > भगवान > माता लक्ष्मी की उत्पत्ति
भगवान

माता लक्ष्मी की उत्पत्ति

दिव्यसुधा
Last updated: March 5, 2025 6:03 am
दिव्यसुधा
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पौराणिक कथाओं के मुताबिक, माता लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी. समुद्र मंथन से निकली लक्ष्मी को भगवान विष्णु ने अपनी अर्धांगिनी के रूप में धारण किया था. भगवान विष्णु ने देवताओं को समुद्र मंथन करने की सलाह दी थी. देवताओं ने दानवों के साथ मिलकर क्षीर सागर में समुद्र मंथन किया. इस मंथन से अमृत, विष, और 14 रत्न मिले. समुद्र मंथन के दौरान ही माता लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई. माता लक्ष्मी को कमला भी कहा जाता है. माता लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख, और समृद्धि की देवी माना जाता है. मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकली लक्ष्मी की उत्पत्ति कार्तिक महीने की अमावस्या को हुई थी. इसलिए, दिवाली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है.ऐसा माना जाता है कि जब भी भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया तभी उनके साथ उनकी पत्नी के रूप में माता लक्ष्मी विराजित हुईं। सत युग में भगवान विष्णु ने श्री राम का अवतार लिया तब उनकी पत्नी के रूप में माता लक्ष्मी का सीता का अवतार हुआ। उसी युग में परशुराम की पत्नी धरणी के रूप में भी माता लक्ष्मी ने जन्म लिया। द्वापर युग में माता लक्ष्मी जी ने पहले राधा और बाद में रुकमणी के रूप में धरती पर अवतार लिया था। माता लक्ष्मी क्षीर सागर में अपने पति श्री विष्णु के साथ रहती हैं और अपने अवतार स्वरूप में राधा के रूप में कृष्ण के साथ गोलोक में रहती हैं।

Contents
लक्ष्मी के 24 अवतार कौन से हैं –लक्ष्मी के 64 रूप क्या हैं –

लक्ष्मी के 24 अवतार कौन से हैं –

अष्टलक्ष्मी आदि लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, वीरा लक्ष्मी, विजया लक्ष्मी । विष्णु के अवतारों के साथ – सीता, राधा, अष्टसखी, गोपी, रुक्मिणी, अष्टभार्या, कृष्ण की कनिष्ठ पत्नियाँ, पद्मावती, लक्ष्मी नारायण, अंडाल, धारिणी।

लक्ष्मी के 64 रूप क्या हैं –

लक्ष्मी के कुछ स्वरूपों में शामिल हैं: धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, विजया लक्ष्मी, वीरा लक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संथाना लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, मंगला, साम्राज्य लक्ष्मी, मोक्ष लक्ष्मी, सौम्या लक्ष्मी, सिद्ध लक्ष्मी, श्री लक्ष्मी, सौभाग्य। लक्ष्मी. अष्टलक्ष्मी का अर्थ है, लक्ष्मी के आठ विशेष रूप। लक्ष्मी के आठ रूप ये हैं- आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, भाग्य लक्ष्मी , विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी मां लक्ष्मी के प्रिय अंक की बात करें तो, 6 अंक के साथ मां लक्ष्मी का खास संबंध होता है. जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने के 6, 15 या 24 तारीख को होता है, उनका मूलांक 6 होता है. ऐसे लोगों पर सदैव मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और इसलिए इनके जीवन में कभी भी पैसों का अभाव नहीं रहता है.

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