Wednesday, 6 May 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > सनातन धर्म > भगवान > न्याय के देवता शनि देव
भगवान

न्याय के देवता शनि देव

दिव्यसुधा
Last updated: April 1, 2025 11:23 am
दिव्यसुधा
Share
Shanidev
SHARE

हिंदू धर्म में शनि देव का स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण है। इन्हें साक्षात रूद्र कहा जाता हैं और शनि देव न्याय के देवता हैं सभी देवताओं में शनिदेव ही एक ऐसे देवता है, जिनकी पूजा प्रेम के कारण नहीं बल्कि डर के कारण की जाती है। इसका एक कारण यह भी है क्योंकि शनिदेव को न्यायाधीश की उपाधि प्राप्त है। मान्यता है कि शनिदेव कर्मों के आधार पर मनुष्यों को फल प्रदान करते हैं। जिस जातक के अच्छे कर्म होते हैं, उन पर शनिदेव की कृपा बनी रहती है और और जो व्यक्ति बुरे कर्मों में लिप्त रहता है। उन पर शनिदेव का प्रकोप बरसता है।

शास्त्रों के अनुसार, शनि देव भगवान सूर्य तथा माता छाया के पुत्र हैं। इन्हें क्रूर ग्रह माना जाता है इनकी दृष्टि में क्रूरता का मुख्य कारण उनकी पत्नी का श्राप है। शनि देव की पत्नी का नाम चित्ररथ था. चित्ररथ एक सरल, सहज, ज्ञानी, प्रतिभाशाली और पतिव्रता महिला थीं. एक बार जब उनकी पत्नी पुत्र प्राप्ति की इच्छा लिए शनिदेव के पास पहुंची, तब न्याय देवता श्री कृष्ण की भक्ति में लीन थे। वह बाहरी संसार से पूर्ण रूप से कट चुके थे। प्रतीक्षा करके जब उनकी पत्नी थक गई, तब उन्होंने क्रोध में आकर शनि देव को श्राप दे दिया और कहा कि वह जिसे भी देखेंगे वह नष्ट हो जाएगा। तभी से ये अपना सिर नीचा करके रहने लगे क्यों कि वे नहीं चाहते थे किसी का अनिष्ट है इनका वर्ण कृष्ण है और यह कौए की सवारी करते हैं। हाथो में धनुष, बाण, त्रिशूल और वरमुद्रा धारण करते है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव श्री कृष्ण के अनन्य भक्त थे और बाल्यावस्था में ही भगवान श्री कृष्ण की आराधना में लीन रहते थे। शनि के भाई-बहन यमराज, यमुना और भद्रा हैं। शनि के छोटे भाई यमराज मृत्यु के देवता हैं, यमुना नदी को पवित्र और पापनाशिनी माना गया है। शनिदेव के अन्य नाम कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद और पिप्पलाद हैं। शनि देव के दो बच्चे थे – कुबेर और तपस्विनी. कुबेर धनपति के रूप में जाने जाते हैं और तपस्विनी देवी, श्रेष्ठ तपस्विनी मानी जाती हैं।

कुछ लोगों का मानना है कि शनिदेव की चाल धीमी है क्योंकि वे लंगड़े हैं. शनिदेव को कर्मफल दाता यानी न्याय के देवता के रूप में भी जाना जाता है. शनि के मित्र ग्रहों में बुध और शुक्र आते हैं, जबकि सूर्य, चंद्रमा और मंगल इसके शत्रुओं की श्रेणी में आते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की महादशा 19 साल तक चलती है. शनिदेव को ग्रहों में सबसे अधिक शक्तिशाली माना जाता है. शनिदेव की मृत्यु के बारे में कोई निश्चित पौराणिक कथा नहीं है, लेकिन कुछ मान्यताओं के अनुसार, वे अपने पिता सूर्यदेव से अलग होकर जल समाधि लेने के लिए चले गए थे, लेकिन माता छाया ने उन्हें मनाकर वापस ले आयी थी .

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article मां चंद्रघंटा नवरात्रि विशेष…नवरात्रि के तीसरे दिन पढ़ें, मां चंद्रघंटा व्रत कथा, प्राप्त होगा का माँ आशीर्वाद
Next Article mata simsa mandir एक ऐसा मंदिर जहां के फर्श पर सोने से माता देती है संतान प्राप्ति का वरदान
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

भगवान नरसिंह खंभे से प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध करते हुए
भगवान

जानें आखिर भगवान विष्णु ने क्यों लिया नरसिंह का अवतार

By दिव्यसुधा
shree ram
भगवान

भगवान श्री राम  

By दिव्यसुधा
देवी वेदवती का तप और माता सीता के रूप में पुनर्जन्म की पौराणिक कथा
भगवान

प्रतिशोध और पुनर्जन्म: देवी वेदवती से माता सीता बनने की दिव्य गाथा

By Ekta Mishra
दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्रतिमा, जिनकी पूजा करने की कथा रावण से जुड़ी मानी जाती है
भगवान

युद्ध से पहले किस भगवान की अराधना करता था रावण? जानिए चौंकाने वाले रहस्य!

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?