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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > भगवान > जानिए भगवान शंकर को क्यों लेना पड़ा था पशुपतिनाथ अवतार?
भगवान

जानिए भगवान शंकर को क्यों लेना पड़ा था पशुपतिनाथ अवतार?

दिव्यसुधा
Last updated: May 9, 2025 5:46 pm
दिव्यसुधा
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पशुपतिनाथ अवतार
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Pashupatinath : पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय पृथ्वी लोक पर नकारात्मकता और अन्याय बढ़ने लगा था। जीव-जंतु, मनुष्य और यहां तक कि देवता भी अपने कर्मों के बोझ से त्रस्त थे। स्वार्थ, लोभ और अहंकार ने सभी को अंधा कर दिया था, जिससे धर्म और न्याय का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया था। ऐसी परिस्थिति से पूरे संसार को बचाने के लिए भगवान शिव ने पशुपतिनाथ का अवतार लिया। पशु शब्द का मतलब जीव और ‘पति’ का मतलब स्वामी या रक्षक। भगवान शिव ने इस शांत और करुणामय रूप को धारण करके सभी जीवों को उनके कर्मों के अनुसार न्याय दिया। उनका यह अवतार सृष्टि में व्यवस्था और संतुलन स्थापित करने के लिए था।

पशुपतिनाथ अवतार की एक और वजह है कि यह जीवों को उनके कर्मों के लिए जागरूक करता है। भगवान शिव इस रूप में सभी प्राणियों के कर्मों को देखते हैं और उन्हें उनके कामों के अनुसार फल देते हैं। भगवान शिव का यह रूप हमें धैर्य और निष्ठा के साथ अपने कर्मों का सामना करने की शक्ति देता है, खासकर कठिन समय में। ऐसी मान्यता है कि जो लोग शिव जी के इस स्वरूप की पूजा करते हैं, उनके सभी कष्टों का अंत होता है। इसके साथ ही सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

पशुपतिनाथ की पूजा का महत्व
पशुपतिनाथ भगवान की पूजा मुख्य रूप से शांति, समृद्धि और सभी प्रकार के सांसारिक दुखों से मुक्ति पाने के लिए की जाती है। इस अवतार की पूजा का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह भक्तों को उनके कर्मों के प्रति जागरूक करती है। मान्यता है कि पशुपतिनाथ की पूजा से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही जीवन में संतुलन बना रहता है।

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