Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > भगवान राम के नाम के साथ ‘चंद्र’ क्यों जुड़ता है? जानिए दिव्य रहस्य
अन्य

भगवान राम के नाम के साथ ‘चंद्र’ क्यों जुड़ता है? जानिए दिव्य रहस्य

दिव्यसुधा
Last updated: December 1, 2025 5:12 pm
दिव्यसुधा
Share
भगवान रामचंद्र और चंद्रदेव की भक्ति कथा
भगवान रामचंद्र ने चंद्रदेव की भक्ति देखकर अपना नाम चंद्र के साथ जोड़ा।
SHARE

लंका विजय के बाद जब भगवान श्री राम अयोध्या लौटे, तो पूरे नगर में उत्सव का ऐसा दृश्य था जिसे देवताओं तक ने अद्भुत बताया। अयोध्यावासियों के हर्षोल्लास, दीपों की ज्योति और जय-घोषों से पूरा वातावरण दिव्य हो उठा। इस अनूठे स्वागत को देखने के लिए सूर्यदेव स्वयं अपने रथ को रोककर स्थिर हो गए। सूर्य के न रुकने से रात होने का क्रम ही टूट गया और एक दिन पूरे महीने तक चलता रहा। यह घटना ब्रह्मांड के नियमों से परे, प्रभु की महिमा का एक चमत्कारिक रूप थी।

चंद्रदेव का व्याकुल इंतजार
सूर्यदेव के स्थिर हो जाने से रात का अस्तित्व ही नहीं रह गया। चंद्रदेव, जो प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए उत्सुक थे, अत्यंत चिंतित हो उठे। वे बार-बार सोचते कि जब तक रात्रि ही नहीं आएगी, तब तक वे कैसे उदय होंगे और राम के दर्शन कैसे प्राप्त करेंगे। उनकी व्याकुलता भक्त के हृदय की उस पवित्र स्थिति को दर्शाती है जहां प्रभु-दर्शन ही जीवन का आधार बन जाता है।

चंद्रदेव का निवेदन और राम का करुणा-स्वरूप
चंद्रदेव के दुख और भक्ति को देख भगवान श्रीराम स्वयं उनके सम्मुख प्रकट हुए। उन्होंने चंद्रदेव को धैर्य देते हुए कहा कि इस जन्म में उन्होंने सूर्यवंश में अवतार लिया है इसलिए सूर्य का स्थान और कर्तव्य महत्वपूर्ण है। प्रभु ने वचन दिया कि अगले जन्म में वे चंद्रवंश में अवतार लेंगे और तब चंद्रदेव को उनके समीप रहने का अवसर सहज उपलब्ध होगा। यह आश्वासन प्रभु की भक्तवत्सलता का दिव्य उदाहरण था।

चंद्रदेव का भावपूर्ण उत्तर
चंद्रदेव भावुक होकर बोले कि प्रभु के अगले अवतार तक वे प्रतीक्षा नहीं कर पाएंगे। इतनी लंबी प्रतीक्षा उनके लिए असहनीय थी क्योंकि उनकी एकमात्र इच्छा प्रभु राम के दर्शन और उनके समीप रहने की थी। उनका यह उत्तर उस भक्त-भाव को दर्शाता है जहाँ समय भी छोटा और असह्य प्रतीत होता है यदि प्रभु का दर्शन न मिले।

प्रभु राम द्वारा “चंद्र” को अपने नाम से जोड़ने का वरदान
चंद्रदेव की भक्ति, विनम्रता और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम मुस्कुराए और बोले कि प्रतीक्षा की आवश्यकता नहीं। आज से चंद्रदेव का नाम उनके नाम के साथ सदा जुड़ा रहेगा। उसी क्षण से “राम” के साथ “चंद्र” जुड़ गया और वे संसार में “रामचंद्र” नाम से विख्यात हुए। सूर्यवंशी होते हुए भी उनके नाम में चंद्र का जुड़ना उनका दयालु, संतुलित और करुणामय स्वरूप दर्शाता है।

सूर्यवंश में जन्म, फिर भी नाम में चंद्र सनातन की अनोखी गहराई
भगवान राम का सूर्यवंश से संबंध उनके तेज, धर्म और आदर्श को दर्शाता है जबकि नाम में ‘चंद्र’ का जुड़ना शीतलता, प्रेम और विनम्रता का प्रतीक है। यही संतुलन सनातन धर्म की वह विशेषता है जो देवताओं और प्रकृति के बीच अद्भुत सामंजस्य स्थापित करती है। यह कथा दर्शाती है कि सनातन संस्कृति में प्रत्येक नाम, प्रत्येक प्रतीक और प्रत्येक कथा के भीतर गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा होता है।

सनातन धर्म की अजर-अमर परंपरा क्यों आज भी जीवित है
विश्व इतिहास में अनेक सभ्यताएं लुप्त हो गईं इजिप्त के देवता केवल म्यूज़ियमों में बचे हैं, यूनान के देवता कविताओं तक सीमित हो गए हैं, रोम की देव-संस्कृति कैलेंडरों में सिमटकर रह गई है। मगर सनातन संस्कृति आज भी धरोहर बनकर जीवित है क्योंकि इसकी नींव प्रेम, आदर्श, त्याग और आध्यात्मिकता पर टिकी है। भगवान राम और चंद्रदेव की यह कथा हमें याद दिलाती है कि हमारा धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि संबंध, भावना और करुणा का जीवंत स्वरूप है।

रामचंद्र नाम भक्ति और दिव्यता का प्रतीक
“रामचंद्र” नाम केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि वह सेतु है जो सूर्य के तेज और चंद्र की शीतलता को जोड़ता है। यह नाम हमें सिखाता है कि शक्ति के साथ सौम्यता, धर्म के साथ करुणा और तेज के साथ प्रेम भी आवश्यक है। यही संतुलन भगवान श्री राम को “मर्यादा पुरुषोत्तम” बनाता है।

TAGGED:Ramachandra storyआध्यात्मिक कथाचंद्र देवभगवान रामरामचंद्रसनातन धर्मसूर्यवंशीहिन्दू कथाएँ
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article सोमवार का राशिफल वृषभ, सिंह, कन्या, तुला और मकर राशि 1 दिसंबर राशिफल: वृषभ, सिंह, कन्या, तुला और मकर राशि के लिए शुभ दिन
Next Article तमिलनाडु का करुम्बेश्वर शिव मंदिर – डायबिटीज के रोगियों के लिए आस्था का केंद्र
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

व्रत और त्योहार

अनंत चतुर्दशी 2025: गणपति विसर्जन के साथ क्यों खास है विष्णु की उपासना, जानिए अनंत सूत्र बांधने का महत्व

By दिव्यसुधा
राम कृष्ण परमहंस
अन्य

आध्यात्मिक गुरु स्वामी राम कृष्ण परमहंस जयंती

By दिव्यसुधा
अन्य

गुरुवार के दिन पूजा में करें ये आसान उपाय, तिजोरी होगी धन से भरपूर

By दिव्यसुधा
मंदिरसनातन धर्म

संगम किनारे क्यों मिलती है लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा? जानिए पौराणिक कथा का रहस्य

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?