सनातन धर्म में भगवान शिव को करुणा, तप और सहजता के देवता के रूप में पूजा जाता है। उन्हें भोलेनाथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह सच्चे मन से की गई पूजा से बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। खासकर श्रावण मास को भगवान शिव की भक्ति के लिए सर्वोत्तम महीना माना जाता है। यह महीना भक्तों के लिए ईश्वर को प्रसन्न करने और उनसे कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर होता है।
श्रावण में कब करें शिव पूजा?
वैसे तो शिव की आराधना किसी भी दिन, किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन श्रावण माह के सोमवार, प्रदोष तिथि और मासिक शिवरात्रि को विशेष रूप से शुभ माना गया है।- सोमवार को शिव का प्रिय दिन माना गया है, इस दिन व्रत व पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के पूर्व का समय शिव पूजा के लिए अत्यंत पुण्यदायक माना गया है।
- शिवरात्रि पर विशेष रूप से रुद्राभिषेक और शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए।
शिव पूजा की सबसे सरल विधि
श्रावण मास में शिव पूजन बहुत सरल है। इसके लिए किसी विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, केवल सच्चे मन और भक्ति भाव की जरूरत होती है।
- सबसे पहले प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें ।
- पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
- भगवान शिव को पहले गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं।
- फिर दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, भस्म, चंदन, शमीपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित करें।
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करते हुए भगवान शिव का ध्यान करें।
- अंत में आरती करें, प्रसाद अर्पित करें और उसे सभी के साथ बांटें।
- यदि सुविधा हो तो शिवलिंग पर रुद्राभिषेक भी कर सकते हैं, लेकिन मन में श्रद्धा हो तो केवल जल अर्पण से भी शिव प्रसन्न हो जाते हैं।
शिव पूजा से जुड़ी 7 जरूरी बातें
- तन-मन से पवित्रता रखें और क्रोध न करें
शिव पूजा के दौरान मानसिक और शारीरिक शुद्धता अत्यंत आवश्यक है। पूजा शांत मन से करें, किसी से विवाद न करें। - पूजा के लिए सही स्थान का चुनाव करें
श्रावण मास में यदि घर में पूजा कर रहे हैं तो घर का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व), पूर्व या उत्तर दिशा का चयन करें। पूजा स्थल को प्रतिदिन साफ रखें और वहां पवित्रता बनाए रखें। - शिव परिवार की पूजा करें
गृहस्थ लोगों के लिए भगवान शिव के साथ मां पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी की भी पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है। यह संपूर्ण परिवार सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करता है। - शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व
यदि आप मूर्ति की जगह शिवलिंग की पूजा करते हैं, तो नर्मदेश्वर या पारद शिवलिंग की पूजा करें। ध्यान रखें कि शिव के साथ नंदी की पूजा अनिवार्य है, क्योंकि वह शिव के वाहन और परम भक्त हैं।
- मंत्र जाप के नियम
- शिव मंत्रों का जप हमेशा रुद्राक्ष माला से करें।
- जप करते समय माला को गले में धारण न करें, केवल हाथ में लें।
- जाप एक निश्चित स्थान और समय पर करें।
- आसन पर बैठकर मंत्र जप करें इससे ऊर्जा स्थिर रहती है।
- बेलपत्र और शमीपत्र अर्पण में सावधानी
- शिव को कटे-फटे, सूखे या कीड़े लगे बेलपत्र नहीं चढ़ाने चाहिए।
- बेलपत्र को पीछे की ओर से निकालकर ही अर्पित करें।
- शमीपत्र भी उलटा चढ़ाएं और स्वच्छ अवस्था में अर्पण करें।
- इन चीजों का शिव पूजा में न करें प्रयोग
- तुलसी के पत्ते, हल्दी, शंख जल, केतकी और चंपा के फूल शिव को नहीं चढ़ाए जाते।
- इन चीजों को भगवान शिव अप्रसन्न होते हैं, इसलिए इनसे परहेज करें।