सनातन परंपरा में समय को स्वयं भगवान का स्वरूप माना गया है। जिस प्रकार सूर्य अपनी गति से सृष्टि को संचालित करते हैं, उसी प्रकार हमारे घर की दीवार पर लगी घड़ी हमारे जीवन की गति, प्रगति और भाग्य को नियंत्रित करती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार दीवार घड़ी केवल समय बताने वाला यंत्र नहीं, बल्कि यह घर की ऊर्जा का संतुलन तय करने वाला शक्तिशाली माध्यम है। सही दिशा में लगी घड़ी जीवन में उन्नति, धन, सुख और शांति लाती है, जबकि गलत स्थान पर लगी घड़ी मां लक्ष्मी को भी घर से दूर कर सकती है।
इन स्थानों पर घड़ी लगाना दुर्भाग्य को आमंत्रण
दक्षिण दिशा
दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों की दिशा कहा गया है। यह स्थिरता और रुकावट की दिशा होती है। यदि इस दिशा की दीवार पर घड़ी लगी हो तो घर के मुखिया की प्रगति रुक जाती है, स्वास्थ्य बिगड़ता है और धन की हानि होने लगती है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और मां लक्ष्मी का वास बाधित होता है।
मुख्य द्वार के ऊपर
मुख्य दरवाजे के ऊपर घड़ी लगाना अत्यंत अशुभ माना गया है। यह आने-जाने वाली ऊर्जा के प्रवाह को रोकता है, जिससे घर में तनाव, अशांति और परिश्रम के बावजूद असफलता बनी रहती है।
इन दिशाओं में लगी घड़ी बदल देती है भाग्य
उत्तर दिशा
यह कुबेर और लक्ष्मी की दिशा है।यहां लगी घड़ी धन, व्यापार, करियर और स्थायी समृद्धि का द्वार खोलती है।
पूर्व दिशा
यह सूर्य देव की दिशा है। यहां घड़ी लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, मान-सम्मान, नई शुरुआत और सफलता आती है।
पश्चिम दिशा
यदि उत्तर या पूर्व में जगह न हो तो पश्चिम दिशा भी स्वीकार्य है। यह लाभ और उन्नति की दिशा मानी जाती है।
घड़ी से जुड़े दिव्य वास्तु नियम
बंद घड़ी दुर्भाग्य का संकेत है रुकी हुई घड़ी जीवन में ठहराव, कर्ज और बाधाओं को जन्म देती है। ऐसी घड़ी को तुरंत ठीक कराएं या हटा दें।
समय हमेशा आगे होना चाहिए
घड़ी 2–3 मिनट आगे हो तो सौभाग्य बढ़ता है। पीछे चलती घड़ी व्यक्ति को जीवन में पीछे कर देती है।
घड़ी का आकार
गोल और चौकोर घड़ियां सबसे शुभ होती हैं। नुकीली या अजीब आकृति वाली घड़ियां तनाव बढ़ाती हैं।
रंग का महत्व
हल्के रंगों की घड़ी घर में शांति और सौम्यता लाती है। काली या गहरे लाल रंग की घड़ी से बचना चाहिए।
पेंडुलम घड़ी
डोलती हुई पेंडुलम घड़ी घर की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है। इसे ड्राइंग रूम में लगाने से समृद्धि और शांति बढ़ती है।