लखनऊ। धर्म और संस्कृति से समाज को जोड़ने के उद्देश्य से विश्वमांगल्य सभा के धर्म संस्कृति शिक्षा विभाग ने आज 10 सितंबर 2025 को फैजुल्लागंज में राम रक्षा स्तोत्र का तृतीय प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया। इस कार्यक्रम में फैजुल्लागंज क्षेत्र की 50 महिलाओं ने भाग लेकर राम रक्षा स्तोत्र के संस्कृत श्लोक, मंत्र व स्तोत्र पाठ का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
संस्कृत के श्लोकों के प्रति जागरूकता
विश्वमांगल्य सभा का मुख्य उद्देश्य है कि महिलाएं अपने धर्मग्रंथों के श्लोकों व मंत्रों को पढ़ें, समझें और उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करें। सभा की मान्यता है कि संस्कृत भाषा और शास्त्रीय ग्रंथों का अध्ययन न केवल आध्यात्मिकता को बढ़ाता है, बल्कि समाज में नैतिकता और अनुशासन को भी सुदृढ़ करता है।
धर्म संस्कृति शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि संस्कृत का ज्ञान न होने के कारण अधिकांश महिलाएं स्तोत्र पाठ नहीं कर पातीं। इसी कमी को दूर करने के लिए समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाते हैं।
अवध प्रांत में राम रक्षा का तृतीय प्रशिक्षण
अवध प्रांत में यह राम रक्षा स्तोत्र का तीसरा प्रशिक्षण वर्ग था। इससे पहले भवानी अष्टकम, शिव राष्ट्र अर्चनम और महिषासुर मर्दिनी जैसे कई स्तोत्रों पर भी ऐसे प्रशिक्षण वर्ग आयोजित हो चुके हैं। यह निरंतर प्रयास महिलाओं को अपने धर्मग्रंथों और परंपराओं से जोड़ने के लिए किया जा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन
आज का प्रशिक्षण वर्ग धर्म संस्कृति शिक्षा विभाग की अखिल भारतीय सहसंयोजिका सुरभि श्रीवास्तव के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
इसमें लखनऊ महानगर अध्यक्ष नमिता शुक्ला, जानकीपुरम सदाचार सभा संयोजिका श्वेता कार्तिक और अवध प्रांत सदाचार सभा संयोजिका प्रतिभा बालियान का विशेष योगदान रहा। प्रतिभा बालियान के दिशा-निर्देशन में संपूर्ण कार्य प्रतिपादित किया गया।
महिलाओं की भागीदारी
फैजुल्लागंज क्षेत्र की 50 महिलाओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस प्रशिक्षण वर्ग में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को संस्कृत के श्लोकों के उच्चारण, अर्थ और सही भाव से पाठ करने के तरीके सिखाए गए। धर्म संस्कृति शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि इस तरह के प्रशिक्षण वर्ग से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने घर-परिवार और समाज को भी संस्कृत श्लोकों के प्रति प्रेरित कर सकती हैं।
समाज पर प्रभाव
विश्वमांगल्य सभा का यह प्रयास केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य है कि महिलाएं संस्कृत और धर्मग्रंथों के प्रति गहरी रुचि विकसित करें और समाज में संस्कृति और परंपराओं की ज्योति को प्रज्वलित रखें। सुरभि श्रीवास्तव ने कहा, “हम चाहते हैं कि हर महिला अपनी परंपराओं और ग्रंथों को समझे, उनका सही पाठ करे और आने वाली पीढ़ियों को भी यह विरासत सौंपे।”
भविष्य की योजनाएं
धर्म संस्कृति शिक्षा विभाग की योजना है कि ऐसे प्रशिक्षण वर्गों का दायरा और बढ़ाया जाए। आने वाले महीनों में रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता, दुर्गा सप्तशती आदि पर भी प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करने की तैयारी चल रही है।
मुख्य संदेश
विश्वमांगल्य सभा की यह पहल साबित करती है कि संस्कृति और धर्म की शिक्षा से समाज को नई दिशा दी जा सकती है। महिलाओं को संस्कृत श्लोकों का प्रशिक्षण देना न केवल व्यक्तिगत स्तर पर लाभकारी है, बल्कि पूरे समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम है।