लखनऊ। गायत्री मंदिर में विश्वमांगल्य सभा के तत्वावधान में “सदाचार सभा” एवं पर्यावरण जनजागरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समाज में नैतिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। आयोजन का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसे स्वर साम्राज्ञी मंजूलता श्रीवास्तव तथा 51 शक्तिपीठ की अध्यक्ष तृप्ति तिवारी की माता ने संपन्न किया।
विशेष अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आरएसएस के मंगल मान हनुमंत भाई साहब उपस्थित रहे, वहीं कार्यक्रम में आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण शिक्षिका दिव्यंका सिंह की विशेष उपस्थिति ने वातावरण को और भी प्रेरणादायी बना दिया। उनके विचारों ने समाज को नैतिकता और पर्यावरण के महत्व की गहरी अनुभूति कराई।
ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा पर विशेष उपक्रम
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा” विषय पर आयोजित विशेष सत्र रहा। इस सत्र का संचालन मोनिका शाह ने किया, जिन्होंने सरल शब्दों में यह समझाया कि कैसे गणेश महोत्सव के दौरान मिट्टी, गोबर या आटे से बनी प्रतिमाओं का उपयोग हमें पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में आगे बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि प्लास्टर ऑफ पेरिस और सिंथेटिक रंगों से बनी मूर्तियां जल और वायु को प्रदूषित करती हैं, इसलिए हमें प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने चाहिए। इस संदेश को साकार करते हुए, महिलाओं ने आटे को सरसों के तेल और हल्दी से रंगकर सुंदर गणेश प्रतिमाएं बनाने की गतिविधि में उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह कार्यशाला स्मिता सिंह, अल्पना शुक्ला, अनु कपिल और विमला त्रिवेदी के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई।
मातृशक्ति का पर्यावरण संदेश
सभा में मातृशक्ति ने समाज को प्रेरित करते हुए कहा कि गणेशोत्सव जैसे पावन पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के संतुलन का अवसर भी हैं। हमें दिखावे और कृत्रिम साधनों से बचते हुए मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित मूर्तियों को अपनाना चाहिए। इसी उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन किया गया, जहाँ महिलाओं ने अपने हाथों से ईको-फ्रेंडली मूर्तियाँ बनाना सीखा। यह अनुभव न केवल धार्मिक दृष्टि से पवित्र था बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक व्यावहारिक पहल भी साबित हुआ।
जागरूकता रैली और संदेश
कार्यक्रम का विस्तार केवल मंदिर प्रांगण तक ही सीमित नहीं रहा। गायत्री मंदिर परिसर से एक जागरूकता रैली भी निकाली गई, जिसमें लगभग 33 महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। रैली में नुक्कड़ नाटक, नारों और स्लोगन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि – “प्रकृति की रक्षा ही हमारी संस्कृति की रक्षा है।”
“ईको-फ्रेंडली गणपति, स्वच्छ पर्यावरण की गारंटी।” रैली के माध्यम से उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ धार्मिक आयोजनों में नैतिकता और सदाचार को अपनाने की प्रेरणा दी गई।
आयोजन की सफलता और नेतृत्व
इस आयोजन की सफलता का श्रेय सदाचार संयोजिका प्रतिभा बालियान को जाता है, जिनके संरक्षण और मार्गदर्शन ने पूरे कार्यक्रम को दिशा दी। आयोजन की मुख्य जिम्मेदारी सुरभि श्रीवास्तव (सदाचार सभा संयोजिका एवं अखिल भारतीय धर्म-संस्कृति विभाग की सह-संयोजिका) ने निभाई। उनके अथक प्रयासों और नेतृत्व ने कार्यक्रम को एक नई ऊँचाई प्रदान की।
महिला सशक्तिकरण की पहल
कार्यक्रम में केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण पर भी विशेष बल दिया गया। सहकार भारती द्वारा चलाए जा रहे महिला सशक्तिकरण अभियान के तहत महिलाओं को यह बताया गया कि ईको-फ्रेंडली प्रतिमाएँ कैसे घर पर बनाई जा सकती हैं और स्थानीय स्तर पर इनका विक्रय करके महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। इस जानकारी ने महिलाओं में आत्मविश्वास जगाया और उन्हें अपने कौशल को समाज और परिवार की उन्नति में लगाने की प्रेरणा दी।
समाज के लिए गहरा संदेश
विश्वमांगल्य सभा ने इस अवसर पर स्पष्ट संदेश दिया कि – “सच्चा धर्म वही है जो प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करे।” धार्मिक अनुष्ठानों में दिखावे और कृत्रिम साधनों के प्रयोग से बचते हुए, हमें ऐसे विकल्प अपनाने चाहिए जो पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त रखें और समाज में सदाचार और आध्यात्मिकता की भावना को प्रबल करें।
आध्यात्मिकता और पर्यावरण का संतुलन
यह आयोजन धार्मिक के साथ सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का संगम भी सिद्ध हुआ। गायत्री मंदिर में आयोजित सदाचार सभा ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब धर्म और पर्यावरण साथ चलते हैं, तो समाज न केवल आध्यात्मिक रूप से उन्नत होता है, बल्कि प्रकृति के प्रति कर्तव्यनिष्ठ भी बनता है।