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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > मार्गशीर्ष मास की विनायक चतुर्थी: ज्ञान, सिद्धि और सौभाग्य देने वाली दिव्य तिथि
व्रत और त्योहार

मार्गशीर्ष मास की विनायक चतुर्थी: ज्ञान, सिद्धि और सौभाग्य देने वाली दिव्य तिथि

दिव्यसुधा
Last updated: November 23, 2025 2:32 pm
दिव्यसुधा
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विघ्नहर्ता गणेश की प्रतिमा पर चढ़ाया गया मोदक और पुष्प
मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी 2025 पर भगवान गणेश की विधिवत पूजा करते भक्त।
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हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि सदैव भगवान श्रीगणेश को समर्पित मानी जाती है, किंतु मार्गशीर्ष मास में आने वाली विनायक चतुर्थी का महत्व विशेष रूप से बढ़ जाता है। शास्त्रों में इस तिथि को सिद्धिप्रद, विघ्ननाशक और सौभाग्यवर्धक कहा गया है। देवताओं का प्रिय माना जाने वाला मार्गशीर्ष महीना स्वयं में ही अत्यंत शुभ है, ऐसे में इस मास की चतुर्थी का संयोग जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत प्रभाव लाता है। इस वर्ष विनायक चतुर्थी 24 नवंबर को मनाई जाएगी, और श्रद्धालु इस दिन विघ्नहर्ता गणेश के दर्शन व पूजन से अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करने की कामना करेंगे।

विनायक चतुर्थी का धार्मिक व पौराणिक महत्व
गणेश पुराण, स्कंद पुराण और पद्म पुराण में मार्गशीर्ष मास की विनायक चतुर्थी को अत्यंत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस तिथि पर की गई गणेश आराधना सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल देती है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और सिद्धिप्रदाता कहा गया है। यही कारण है कि इस दिन नए कार्यों की शुरुआत, अध्ययन, करियर, व्यवसाय और पारिवारिक जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए लोग विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। व्रत और पूजन से न केवल सांसारिक बाधाएँ दूर होती हैं, बल्कि मन में छिपी नकारात्मकता भी समाप्त होती है। इस तिथि को किए गए जप और ध्यान से व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा जागृत होती है।

विनायक चतुर्थी की विधि-विधान से पूजा
पूजन के लिए प्रातः स्नान कर घर के मंदिर अथवा किसी पवित्र स्थान पर लकड़ी के पाटे पर लाल या पीला स्वच्छ वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके व्रत-संकल्प लेना शुभ माना गया है। इसके बाद भगवान गणेश को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है और चंदन, अक्षत, रोली, दूर्वा, लाल पुष्प, धूप-दीप तथा नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। गणेश जी को दूर्वा व मोदक अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए इन्हें अवश्य चढ़ाया जाता है।

पूजा के दौरान ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जप करने से बुद्धि और एकाग्रता बढ़ती है तथा कार्य सिद्धि की शक्ति प्राप्त होती है। व्रतधारी को पूरे दिन सात्त्विक आचरण का पालन करना चाहिए। फलाहार या एक समय भोजन का नियम रखा जाता है। शाम को पुनः दीप प्रज्वलित कर भगवान गणेश की आरती की जाती है।

विनायक चतुर्थी व्रत के दिव्य फल

  1. सभी विघ्न-बाधाओं का नाश
    गणेश जी विघ्नहर्ता हैं। इस दिन पूजा करने से जीवन में आ रही रुकावटें समाप्त होती हैं और कार्य सफल होने लगते हैं।
  2. बुद्धि, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता में वृद्धि
    छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों और नौकरी पेशा लोगों के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी है।
  3. धन, समृद्धि और स्थिरता की प्राप्ति
    गणेश जी ऋद्धि–सिद्धि के स्वामी हैं। इस दिन की पूजा से आर्थिक उन्नति और लक्ष्मी का स्थायी वास मिलता है।
  4. पारिवारिक शांति और सौहार्द की प्राप्ति
    यह व्रत घर में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। दांपत्य तनाव भी कम होता है।
  5. नए शुभ कार्यों में सफलता
    व्यवसाय या करियर में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और सफलता तेजी से मिलती है।

मार्गशीर्ष की विनायक चतुर्थी हमें यह संदेश देती है कि जब मन शुद्ध हो, विचार सकारात्मक हों और श्रद्धा दृढ़ हो—तो भगवान गणेश स्वयं मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह तिथि ज्ञान, सौभाग्य और समृद्धि से पूर्ण जीवन का द्वार खोलने वाली मानी जाती है।
इस पावन अवसर पर श्रद्धापूर्वक की गई पूजा आपको निश्चय ही दिव्य आशीर्वाद प्रदान करेगी।

TAGGED:Spiritual Articles Hindiगणेश पूजा महत्वभगवान गणेश व्रतमार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी 2025विनायक चतुर्थी पूजा विधिहिंदू व्रत पर्व 2025
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