विकट संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 5 अप्रैल 2026 को यह पवित्र व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन केवल पूजा का ही नहीं, बल्कि अपने मन, विचार और आचरण को शुद्ध करने का अवसर भी है। अगर इस दिन सही नियमों और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की जाए, तो बप्पा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पूजन और तिलक के समय रखें विशेष ध्यान
- गणेश जी की पूजा में शुद्धता और मर्यादा का विशेष महत्व होता है। पूजा करते समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
- अभिषेक करते समय भगवान को सीधे जल नहीं चढ़ाना चाहिए, बल्कि आचमनी या फूल की सहायता से ही स्नान कराना उचित माना जाता है। तिलक के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अक्षत (चावल) टूटे हुए नहीं होने चाहिए, क्योंकि खंडित सामग्री पूजा में अशुभ मानी जाती है।
- इसके अलावा गणेश जी की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग वर्जित है, इसलिए भूलकर भी तुलसी अर्पित न करें। पूजा में इस्तेमाल होने वाले फूल हमेशा ताजे होने चाहिए और उन्हें जमीन पर रखने से बचना चाहिए। बासी या पुरानी सामग्री का उपयोग करने से पूजा का फल कम हो सकता है।
चंद्र दर्शन और अर्घ्य देते समय सावधानियां
- संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देना सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। लेकिन इस दौरान कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है।
- अर्घ्य देते समय इस बात का ध्यान रखें कि जल के छींटे आपके पैरों पर न गिरें। इसके लिए नीचे एक थाली या बड़ा पात्र रखना सबसे अच्छा उपाय होता है। अर्घ्य देते समय अपनी दृष्टि नीचे रखें और पूरे श्रद्धा भाव से चंद्रमा की प्रार्थना करें।
- अर्घ्य के लिए केवल सादा जल न लें, बल्कि उसमें थोड़ा कच्चा दूध और अक्षत मिलाकर अर्पित करें। इस समय मन को शांत रखें और किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारों से दूर रहें, क्योंकि अशांत मन से की गई पूजा का फल कम हो जाता है।
दूर्वा अर्पित करने का सही नियम
- भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए सबसे प्रिय वस्तु ‘दूर्वा’ मानी जाती है। विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन 21 दूर्वा की गांठें अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है।
- ध्यान रखें कि दूर्वा का केवल कोमल और ऊपरी भाग ही गणेश जी को अर्पित करें। दूर्वा चढ़ाते समय मन ही मन “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। यह सरल उपाय जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है।
भक्ति का महत्व और आंतरिक शुद्धता
- इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति है। महंगी सामग्री या बड़े आयोजन से ज्यादा जरूरी है कि मन शांत और भावनाएं पवित्र हों।
- पूजा के बाद माता-पिता, विशेष रूप से मां का आशीर्वाद लेना भी बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि भगवान गणेश के लिए उनकी माता का स्थान सर्वोपरि था।
विकट संकष्टी चतुर्थी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है। सही विधि, सावधानियों और सच्चे मन से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है। इस दिन की गई छोटी-छोटी सावधानियां ही पूजा को पूर्ण बनाती हैं और बप्पा की कृपा से जीवन के हर संकट को दूर करने की शक्ति देती हैं।