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दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार का महत्व और शुभ उपाय
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार का महत्व और शुभ उपाय

Ekta Mishra
Last updated: March 8, 2026 11:46 am
Ekta Mishra
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वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, वंदनवार और कलश
वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, वंदनवार और कलश रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार केवल आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यह सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली का प्रवेश द्वार माना जाता है। माना जाता है कि जिस घर का मुख्य द्वार साफ, सुंदर और वास्तु के अनुसार होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। वहीं यदि मुख्य द्वार की दिशा, सजावट या स्थिति सही न हो तो घर में तनाव, आर्थिक परेशानियां और मानसिक अशांति बढ़ सकती है।

वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार मुख्य द्वार के आसपास कुछ शुभ वस्तुएं रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। आइए जानते हैं ऐसी कुछ चीजों के बारे में जिन्हें मुख्य द्वार के पास रखना बेहद शुभ माना जाता है।

कलश
सनातन परंपरा में कलश को बहुत ही पवित्र और मंगलकारी प्रतीक माना गया है। यह समृद्धि, शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। ज्योतिष के अनुसार कलश का संबंध शुक्र और चंद्र ग्रह से भी माना जाता है, जो सुख, शांति और समृद्धि के कारक ग्रह हैं। मुख्य द्वार के पास दाईं ओर एक स्वच्छ कलश रखा जा सकता है। ध्यान रखें कि कलश का मुंह चौड़ा और खुला हो। इसमें साफ जल भरें और उसमें कुछ फूलों की पंखुड़ियां डाल दें। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।

वंदनवार
घर के मुख्य द्वार पर वंदनवार लगाना भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा है। किसी भी शुभ कार्य या त्योहार से पहले दरवाजे पर वंदनवार लगाने से घर में मंगलमय वातावरण बनता है। बाजार में कई प्रकार के वंदनवार मिलते हैं, लेकिन आम के पत्तों से बना वंदनवार सबसे अधिक शुभ माना जाता है। मान्यता है कि आम के पत्तों से बना वंदनवार घर में सुख-शांति बनाए रखता है और दरिद्रता को घर में प्रवेश नहीं करने देता। विशेष रूप से मंगलवार के दिन इसे लगाना शुभ माना जाता है।

स्वस्तिक चिन्ह
स्वस्तिक एक अत्यंत पवित्र और शुभ चिन्ह है, जिसे सनातन धर्म में ऊर्जा संतुलन और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। चार भुजाओं वाला यह चिन्ह चारों दिशाओं में सकारात्मक ऊर्जा का संकेत देता है। मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाने या लगाने से घर में शुभता और समृद्धि आती है। वास्तु के अनुसार लाल या नीले रंग का स्वस्तिक अधिक प्रभावशाली माना जाता है। हालांकि इसे सही दिशा और विधि से ही लगाना चाहिए।

भगवान गणेश की प्रतिमा
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभता के देवता कहा जाता है। इसलिए कई लोग मुख्य द्वार पर गणेश जी की तस्वीर या मूर्ति लगाते हैं। लेकिन इसे लगाने के कुछ नियम होते हैं। गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर को इस प्रकार लगाना चाहिए कि उनका मुख घर के अंदर की ओर हो। माना जाता है कि गणेश जी का पेट समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है, जबकि पीठ की दिशा दरिद्रता का संकेत देती है। इसलिए मुख्य द्वार के बाहर उनकी पीठ की ओर तस्वीर नहीं लगानी चाहिए। इस प्रकार यदि घर के मुख्य द्वार को साफ-सुथरा रखते हुए इन शुभ वस्तुओं को सही तरीके से रखा जाए तो घर में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहता है।

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