वास्तुशास्त्र में पंचतत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश को जीवन की आधारशिला माना गया है। इनमें जल तत्व का विशेष स्थान है, क्योंकि यह केवल शारीरिक पोषण ही नहीं करता, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन भी प्रदान करता है। घर में जल की सही व्यवस्था होने पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है, वहीं गलत दिशा या स्थान पर जल रखने से आर्थिक संकट, स्वास्थ्य समस्याएं और पारिवारिक अशांति उत्पन्न हो सकती है।
शास्त्रों के अनुसार यदि घर में पानी की टंकी, रसोई या बाथरूम की व्यवस्था वास्तु के विरुद्ध हो जाए, तो व्यक्ति को बार-बार बीमार पड़ने, धन की कमी और आपसी मतभेद जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए घर बनवाते समय या नवीनीकरण के दौरान जल से जुड़े वास्तु नियमों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
दिशाओं का महत्व और जल तत्व
वास्तु में हर दिशा का अपना अलग प्रभाव होता है। अग्नि तत्व के लिए आग्नेय कोण, वायु के लिए वायव्य और जल तत्व के लिए ईशान कोण को सर्वोत्तम माना गया है। ईशान यानी उत्तर-पूर्व दिशा को देवताओं की दिशा कहा जाता है और यही कारण है कि जल से संबंधित अधिकांश व्यवस्थाएं इसी दिशा में शुभ मानी जाती हैं। सही दिशा में जल होने से घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है।
भूमिगत पानी की टंकी के वास्तु नियम
भूमिगत जल टंकी के लिए ईशान कोण सबसे उत्तम स्थान माना गया है। यदि यह संभव न हो, तो पूर्व-ईशान या उत्तर-ईशान दिशा भी स्वीकार्य होती है। इसके विपरीत, घर के मध्य भाग, नैऋत्य, दक्षिण या पश्चिम दिशा में भूमिगत टंकी बनवाना वास्तु दोष उत्पन्न कर सकता है। ऐसी स्थिति में आर्थिक नुकसान, कर्ज और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। पानी खींचने वाली मोटर को पूर्व, पूर्व-आग्नेय या आग्नेय दिशा में लगाना शुभ होता है। इससे जल का प्रवाह सकारात्मक ऊर्जा के साथ बना रहता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
ट्यूबवेल, बोरिंग और कुएं की सही दिशा
ट्यूबवेल, बोरिंग या कुआं भी ईशान कोण में बनवाना श्रेष्ठ माना गया है। इसके अलावा पूर्व या उत्तर दिशा में भी इनकी व्यवस्था की जा सकती है। लेकिन इन्हें कभी भी नैऋत्य, दक्षिण, पश्चिम या घर के मध्य भाग में नहीं बनवाना चाहिए। बोरिंग या कुएं की मोटर के लिए पूर्व-आग्नेय या आग्नेय कोण उपयुक्त माना गया है। मोटर को सीधे बोरिंग के ऊपर, ईशान या पूर्व दिशा में रखना अशुभ होता है और इससे जल तत्व असंतुलित हो सकता है।
छत पर पानी की टंकी लगाने के नियम
छत पर पानी की टंकी लगाते समय भी वास्तु नियमों का पालन जरूरी है। नैऋत्य से वायव्य की ओर टंकी रखना शुभ माना गया है। इसके अलावा दक्षिण मध्य, पश्चिम-नैऋत्य, पश्चिम मध्य या पश्चिम-वायव्य दिशा में भी टंकी रखी जा सकती है। इन स्थानों पर मजबूत दीवारें बनवाना लाभकारी होता है।
छत के ईशान, उत्तर या पूर्व भाग में पानी की टंकी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इससे मानसिक तनाव और आर्थिक रुकावटें आ सकती हैं। यदि टंकी को ढकने के लिए दीवार बनानी हो, तो पश्चिम दिशा में टंकी रखकर चारों ओर दीवार बनवाना उचित रहता है। इससे गर्मियों में पानी अत्यधिक गर्म भी नहीं होता।
रसोई, बाथरूम और टॉयलेट की जल व्यवस्था
रसोई घर में पीने के पानी और जूठे बर्तनों के सिंक को पास-पास नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। बाथरूम और टॉयलेट की टंकी के लिए पश्चिम मध्य या पश्चिम-नैऋत्य दिशा उपयुक्त मानी जाती है। इन स्थानों पर बड़ी टंकियों का प्रयोग किया जा सकता है। रसोई और बाथरूम के लिए सहायक जल टंकी दक्षिण मध्य में रखी जा सकती है, लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रखें कि घर के मंदिर के ऊपर कभी भी पानी की टंकी या पाइप लाइन न गुजरने दें।
कुल मिलाकर, जल तत्व का संतुलन घर की खुशहाली के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि पानी की टंकी, बोरिंग, रसोई और बाथरूम की व्यवस्था वास्तु नियमों के अनुसार की जाए, तो इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। छोटे-छोटे वास्तु उपाय अपनाकर आप अपने घर को सुख, शांति और समृद्धि का केंद्र बना सकते हैं।