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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > वसंत पंचमी: पीला वस्त्र क्यों पहना जाता है?
व्रत और त्योहार

वसंत पंचमी: पीला वस्त्र क्यों पहना जाता है?

दिव्यसुधा
Last updated: January 22, 2026 11:46 am
दिव्यसुधा
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वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा करते श्रद्धालु, पीले वस्त्र और पीले फूलों से सजी पूजा
वसंत पंचमी पर पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और बसंत ऋतु के स्वागत का प्रतीक है
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वसंत पंचमी हिंदू संस्कृति का एक महत्वपूर्ण और शुभ पर्व है, जो शीत ऋतु के अंत और बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। इसे श्री पंचमी और ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा की जाती है, जिन्हें ज्ञान, बुद्धि, कला, संगीत और विद्या की देवी माना जाता है। यह पर्व विद्यार्थियों, कलाकारों और विद्वानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भक्त मां सरस्वती से ज्ञान, बुद्धि और सफलता की कामना करते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार चाहते हैं।

पीला रंग: बसंत पंचमी की पहचान
वसंत पंचमी पर पीला वस्त्र पहनने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह केवल फैशन या मौसम के कारण नहीं, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। पीला रंग ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है, साथ ही यह ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का संकेत भी देता है। बसंत ऋतु में प्रकृति पीले सरसों के फूलों से सजती है, इसलिए पीला रंग बसंत के आगमन और नई शुरुआत का प्रतीक भी बनता है। इसी कारण इस दिन पीला रंग पहनना एक शुभ और पवित्र परंपरा बन गई है।

मां सरस्वती को प्रिय रंग: पीला और सफेद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सरस्वती को सफेद और पीला रंग अत्यंत प्रिय हैं। उन्हें अक्सर पीले या हल्के रंग के वस्त्रों में दर्शाया जाता है, क्योंकि ये रंग सादगी, शांति और ज्ञान का प्रतीक हैं। इसलिए भक्त इस दिन पीला वस्त्र पहनकर मां सरस्वती को श्रद्धा, समर्पण और एकाग्रता से नमन करते हैं। यह रंग उनके प्रति भक्ति का प्रतीक है और साधकों के मन में विद्या की ओर झुकाव उत्पन्न करता है।

पीला रंग: आध्यात्मिक और मानसिक लाभ
रंगों का हमारे मन और शरीर पर गहरा प्रभाव होता है और पीला रंग विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक माना जाता है। पीला रंग मन को प्रसन्न और शांत बनाता है, जिससे व्यक्ति में एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। पढ़ाई, संगीत और कला के क्षेत्र में यह रंग प्रेरणा और ऊर्जा का संचार करता है। इसी कारण स्कूलों, संस्थानों और घरों में बच्चे व शिक्षक वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनते हैं, ताकि वे अपने अध्ययन और कला में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें।

आयुर्वेदिक दृष्टि
आयुर्वेद के अनुसार पीला रंग पित्त दोष को संतुलित करने में मदद करता है और शरीर में गर्मी और ऊर्जा का संचार करता है। सर्दियों के बाद जब मौसम हल्का गर्म होने लगता है, पीला रंग शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। यह रंग ऊर्जा बढ़ाकर शरीर को सुदृढ़ बनाता है और मानसिक थकान को दूर करता है। इसलिए वसंत पंचमी पर पीला रंग पहनना न केवल आध्यात्मिक रूप से, बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी लाभकारी माना जाता है।

पीला भोजन का महत्व
बसंत पंचमी पर केवल पीले कपड़े ही नहीं, बल्कि पीला भोजन भी विशेष रूप से तैयार किया जाता है। जैसे केसरिया हलवा, मीठा चावल, खिचड़ी और सरसों का साग आदि। पीले भोजन में ऊर्जा और गर्माहट देने वाली सामग्री होती है, जो मौसम के अनुसार शरीर को मजबूत बनाती है। यह भोजन समृद्धि और शुभता का संदेश देता है और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना को दर्शाता है। साथ ही यह परंपरा वसंत के स्वागत और नई शुरुआत की भावना को भी उजागर करती है।

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