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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > देवघर का वैद्यनाथ धाम: जहां रावण की आस्था ने जन्म दिया ‘कामना लिंग’ को
मंदिर

देवघर का वैद्यनाथ धाम: जहां रावण की आस्था ने जन्म दिया ‘कामना लिंग’ को

"जहां रावण की भक्ति और शिव की करुणा ने रचा आस्था का अद्वितीय इतिहास – देवघर का वैद्यनाथ धाम"

दिव्यसुधा
Last updated: July 24, 2025 3:37 pm
दिव्यसुधा
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12 ज्योतिर्लिंगों में एक – वैद्यनाथ धाम
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Highlights
  • कामना लिंग: मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला शिवलिंग
  • श्रावण मेला: लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर करते हैं जलाभिषेक
  • आध्यात्मिक महत्व: शिव का वैद्य रूप – रोगों और दोषों से मुक्ति दिलाने वाला स्थान

देवघर (झारखंड)। सावन का महीना शुरू होते ही पूरे देश में शिव भक्ति का माहौल बन जाता है, लेकिन झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की बात ही कुछ अलग है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, पौराणिकता और अध्यात्म का जीवंत संगम है।

हर साल सावन में यहां श्रावण मेला लगता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। कांवड़िए सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर 100 किलोमीटर पैदल यात्रा करते हैं और बाबा को जल अर्पित करते हैं। यह नजारा न केवल भक्ति का, बल्कि एक गहरी आत्मिक ऊर्जा का प्रतीक बन जाता है।

रावण और बैद्यनाथ धाम: जब लंका ले जाया जा रहा था शिवलिंग
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना में लंका नरेश रावण की प्रमुख भूमिका रही है। कहते हैं कि रावण ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर कठोर तप किया और एक-एक करके अपने नौ सिर काटकर शिवलिंग पर अर्पित कर दिए। जैसे ही वह दसवां सिर काटने वाला था, शिवजी प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा।

रावण ने शिवलिंग को लंका में स्थापित करने की अनुमति मांगी। शिवजी ने यह शर्त रखी कि रास्ते में वह इसे जहां भी रखेगा, यह वहीं स्थापित हो जाएगा। देवता इस स्थिति से चिंतित हो उठे, क्योंकि रावण पहले से ही अजेय था। अगर शिवलिंग लंका पहुंचता, तो वह और शक्तिशाली हो जाता।

विष्णु की लीला और देवताओं की रणनीति
भगवान विष्णु ने रावण की योजना विफल करने के लिए लीला रची। रास्ते में रावण को लघुशंका लगी, तब उसने एक ग्वाले को शिवलिंग थमाकर चला गया। लेकिन ग्वाले ने शिवलिंग ज़मीन पर रख दिया और चला गया। जब रावण लौटा, तो लाख कोशिशों के बावजूद वह शिवलिंग को हिला नहीं पाया।

बाद में ब्रह्मा, विष्णु सहित अन्य देवताओं ने उसी स्थान पर शिवलिंग की पूजा-अर्चना करके उसे ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित कर दिया।

क्यों कहा जाता है इसे ‘कामना लिंग’?
मान्यता है कि यह वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मनोवांछित फल देने वाला है, इसलिए इसे ‘कामना लिंग’ भी कहा जाता है। जो भी भक्त सच्चे मन से यहां प्रार्थना करता है, उसकी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

वैद्यनाथ नाम के पीछे की कथा
कहते हैं कि शिवजी ने रावण के कटे हुए सिरों को फिर से जोड़ दिया और उसे सभी पीड़ाओं से मुक्ति दी। इस रूप में भगवान शिव ‘वैद्य’ यानी चिकित्सक के रूप में प्रकट हुए। तभी से यह शिवलिंग ‘बैद्यनाथ’ कहलाया।

श्रद्धा का प्रतीक, रोगों से मुक्ति का स्थान
आज भी भक्त मानते हैं कि बैद्यनाथ धाम में शिव अभिषेक करने से सभी रोग और दोष दूर हो जाते हैं। यही कारण है कि यह धाम भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है।

सावन का महीना अब शुरू हो गया है और एक बार फिर देवघर की गलियां ‘बोल बम’ के जयकारों से गूंजने को तैयार हैं। श्रद्धालुओं का सैलाब एक बार फिर उस स्थान की ओर बढ़ रहा है, जहां शिव और रावण की कहानी एक साथ जीवंत होती है।

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