उज्जैन का नाम लेते ही श्रद्धा से मन भर जाता है और ध्यान सीधा महाकालेश्वर मंदिर की ओर चला जाता है। बाबा महाकाल को इस नगरी का राजा माना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उज्जैन की महारानी कौन हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नगरकोट माता मंदिर में विराजमान मां नगरकोट को इस पवित्र नगरी की रानी और रक्षक माना जाता है।
बाबा महाकाल से पहले से मौजूद हैं मां नगरकोट
उज्जैन शहर के उत्तर-पूर्व दिशा में गोवर्धन सागर के पास स्थित नगरकोट माता मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि जब उज्जैन में बाबा महाकाल की स्थापना भी नहीं हुई थी, तब से मां नगरकोट इस नगरी की सीमा पर तैनात होकर इसकी रक्षा कर रही हैं। ‘नगर’ का अर्थ शहर और ‘कोट’ का अर्थ सीमा होता है, यानी मां नगरकोट उज्जैन की सुरक्षा का प्रतीक हैं।
स्कंद पुराण में मिलता है उल्लेख
स्कंद पुराण में भी मां नगरकोट के इस स्वरूप का वर्णन मिलता है, जिसे मां दुर्गा का शक्तिशाली रूप माना गया है। मां अपने हाथों में अस्त्र-शस्त्र धारण किए हर संकट को दूर करने के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। यही कारण है कि इस मंदिर की ख्याति पूरे देश में फैली हुई है और नवरात्रि के समय यहां विशेष महत्व होता है।
मंदिर का चमत्कारी कुंड और नवरात्रि का महत्व
मंदिर परिसर में स्थित पवित्र कुंड को अत्यंत चमत्कारी माना जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और भक्त इस कुंड के जल से मां का अभिषेक करते हैं। मान्यता है कि इस जल से मां की पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं।
सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ा इतिहास
इस मंदिर का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा है और इसका संबंध महान सम्राट विक्रमादित्य से भी माना जाता है। कहा जाता है कि मां नगरकोट उनकी कुलदेवी थीं और वे हर युद्ध से पहले मां का आशीर्वाद लेने यहां आते थे। उनके समय में मंदिर का विस्तार हुआ, जिससे इसकी महिमा और अधिक बढ़ गई।
आज भी निभाई जाती है यह परंपरा
आज भी उज्जैन में जब किसी नए अधिकारी की नियुक्ति होती है, तो वह कार्यभार संभालने से पहले मां नगरकोट का आशीर्वाद लेना शुभ मानता है। यह परंपरा दर्शाती है कि मां नगरकोट केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि उज्जैन की सच्ची संरक्षिका और महारानी हैं।
इस प्रकार, जहां बाबा महाकाल उज्जैन के राजा हैं, वहीं मां नगरकोट इस पवित्र नगरी की महारानी के रूप में विराजमान हैं। सदियों से वे उज्जैन की रक्षा करते हुए अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान कर रही हैं।