वृंदावन के विश्वविख्यात ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में भक्ति, सेवा और व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय लिया गया है। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति की बैठक में मंदिर के कोष, भक्त-सेवा और परिसर प्रबंधन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। यह निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था और भगवान की सेवा को और भव्य बनाने वाला कदम माना जा रहा है।
चार करोड़ से ठाकुरजी के लिए सोने-चांदी के आभूषण
मंदिर कोष पर बैंकों से मिलने वाले ब्याज की राशि से लगभग चार करोड़ रुपये का उपयोग ठाकुर बांकेबिहारी जी के लिए सोने-चांदी के भव्य आभूषण खरीदने में किया जाएगा। यह निर्णय शास्त्रानुसार और भक्त-भाव से प्रेरित है, क्योंकि मंदिर कोष में जमा धन का उपयोग भगवान की सेवा में होना चाहिए। सेवा समिति के अनुसार बैंक में जमा राशि का एक निश्चित हिस्सा खर्च करना अनिवार्य है, अन्यथा आयकर का दायित्व बनता है। ऐसे में ठाकुरजी के श्रृंगार में यह खर्च सर्वोत्तम माना गया।
इसके अलावा, मंदिर के रखरखाव और व्यवस्थाओं के सुधार हेतु एक करोड़ रुपये खर्च करने का भी निर्णय लिया गया। यह कदम भक्तों के लिए और अधिक सुगम, स्वच्छ और व्यवस्थित दर्शन सुनिश्चित करेगा।
बसंत पंचमी पर 10 किलो चांदी की देहरी अर्पित
बैठक में यह भी बताया गया कि एक श्रद्धालु ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर 10 किलो वजन की चांदी की देहरी अर्पित की है। यह देहरी ठाकुरजी के गर्भगृह पर स्थापित की जाएगी, जिसका वर्तमान मूल्य लगभग 30 लाख रुपये आंका गया है। यह अर्पण श्रद्धालु की गहरी भक्ति का प्रतीक है और भगवान के प्रति समर्पण की मिसाल बनकर उभरता है।
कोटा में मिली 15 हेक्टेयर भूमि, कब्जे की प्रक्रिया होगी शुरू
मंदिर की संपत्ति संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि राजस्थान के कोटा में 15 हेक्टेयर भूमि मंदिर के नाम पर मिली है। समिति ने इस भूमि पर वैधानिक कब्जा सुनिश्चित करने के लिए आगे की कार्रवाई करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही देश के अन्य प्रांतों में ठाकुर बांकेबिहारी जी के नाम पर दर्ज भूमि, भवन या संपत्तियों की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया जाएगा, ताकि मंदिर की संपत्तियों का संरक्षण और प्रबंधन मजबूत हो।
इसके अलावा गर्भगृह की दीवारों पर चांदी की सफाई का कार्य सर्दी के बाद शुरू किया जाएगा। मंदिर परिसर में रेलिंग निर्माण का कार्य भी 30 जनवरी तक पूरा किया जाएगा, जिससे दर्शन व्यवस्था और अधिक सुव्यवस्थित होगी।
यजमानों की संख्या में बदलाव, दर्शन व्यवस्था होगी सुगम
भीड़ और दर्शन व्यवस्था को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सेवायतों के साथ जाने वाले यजमानों की संख्या 20 से घटाकर 5 कर दी गई है। इससे दर्शन का क्रम बेहतर होगा और सामान्य श्रद्धालुओं को भी सुविधाजनक दर्शन मिल सकेगा।
नए गेट से वीआईपी दर्शन में पारदर्शिता
वीआईपी दर्शन में अव्यवस्था और अनुचित प्रवेश को रोकने हेतु द्वार संख्या 5 पर नया गेट लगाया गया है। इस गेट से केवल पूर्व-निर्धारित संख्या में यजमान प्रवेश कर सकेंगे और वीआईपी श्रद्धालुओं को भी सत्यापन के बाद ही प्रवेश मिलेगा।
भक्ति, सेवा और व्यवस्था का संतुलित मार्ग
इन निर्णयों से यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन बांकेबिहारी मंदिर प्रशासन भक्त-आस्था, सेवा और पारदर्शिता को एक साथ आगे बढ़ा रहा है। ठाकुरजी की सेवा में बढ़ते कदम, मंदिर की व्यवस्था में सुधार और श्रद्धालुओं की सुविधा के प्रति यह प्रतिबद्धता मंदिर की पवित्रता और आस्था को आने वाले समय में और मजबूत बनाएगी।