भगवान मुरुगन को समर्पित पवित्र दिन थाईपुसम इस साल 1 फरवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा। थाईपुसम, जिसे थाई पूसम या थाईप्पूयम भी कहा जाता है, तमिल समुदाय के लिए अत्यंत आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह पर्व विशेष रूप से भारत, मलेशिया, सिंगापुर और अन्य देशों में रहने वाले तमिलों द्वारा भक्ति और अनुशासन के साथ मनाया जाता है।
थाईपुसम का आध्यात्मिक महत्व
थाईपुसम भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र भगवान मुरुगन को समर्पित है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय और जीवन से अज्ञान, अहंकार और नकारात्मक शक्तियों के अंत का प्रतीक है। देवी पार्वती ने भगवान मुरुगन को दिव्य वेल (भाला) प्रदान किया था, जिससे उन्होंने राक्षस सोरापदम का संहार कर ब्रह्मांड में संतुलन स्थापित किया। हिंदू वैदिक परंपराओं में वेल आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है, जो अंधकार और भ्रम को भेदने का काम करता है।
पर्व तिथि और समय (2026)
थाईपुसम: रविवार, 1 फरवरी 2026
पूसम नक्षत्र प्रारंभ: सुबह 01:34
पूसम नक्षत्र समाप्त: रात 11:58
पूसम नक्षत्र पूरे दिन रहने के कारण इस दिन पूजा, व्रत और अनुष्ठान करने के लिए अत्यंत शुभ है।
थाईपुसम 2026 व्रत और रीति-रिवाज
थाईपुसम के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करते हैं और भगवान मुरुगन की पूजा करते हैं। दूध, शहद, चंदन और पवित्र जल से अभिषेक किया जाता है। कई भक्त व्रत रखते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं, जिसमें केवल शाकाहारी भोजन या फल ग्रहण किया जाता है।
इस अवसर पर भक्त मुरुगन मंत्रों का जाप करते हैं और मंदिरों में शोभायात्राओं में शामिल होते हैं। तमिलनाडु, मलेशिया और सिंगापुर में भक्त कावड़ी लेकर चलते हैं, जो विनम्रता और भक्ति का प्रतीक है।
थाईपुसम का उत्सव
तमिलनाडु में थाईपुसम भव्य रूप से मनाया जाता है। 2026 में यह पर्व रविवार को पड़ रहा है और पूसम नक्षत्र पूरे दिन बना रहेगा। इस दिन भक्त बिना किसी बाधा के पूजा, व्रत और मंदिर दर्शन कर सकते हैं। यह पर्व श्रद्धा, अनुशासन और आस्था का प्रतीक होने के साथ जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति लाता है।