तेलंगाना के भुवनगिरी जिले में स्थित मानेपल्ली हिल्स पर बना स्वर्णगिरि वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, जिसे यदाद्री तिरुमला देवस्थानम भी कहा जाता है, दक्षिण भारत का एक प्रमुख आध्यात्मिक स्थल बन चुका है। यह मंदिर हैदराबाद से लगभग 47 किलोमीटर दूर स्थित है और 22 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। इसकी वास्तुकला प्राचीन पल्लव, चोल, विजयनगर और चालुक्य शैलियों का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है। गर्भगृह में स्थापित भगवान वेंकटेश्वर की 12 फुट ऊँची भव्य प्रतिमा यहां का मुख्य आकर्षण है। इसकी दिव्यता और शांत वातावरण हर भक्त के मन में अपूर्व आध्यात्मिक अनुभव भर देता है।
मंदिर निर्माण के पीछे की कहानी
स्वर्णगिरि मंदिर का निर्माण एक चमत्कारिक घटना से प्रेरित है। उद्योगपति श्रीमन मानेपल्ली रामाराव की पत्नी श्रीमती विजयलक्ष्मी एक गंभीर दुर्घटना के बाद कोमा में चली गई थीं। चिकित्सकों ने उनकी जान बचाने की उम्मीद छोड़ दी थी। इस कठिन समय में उन्होंने तिरुपति से लाया गया पवित्र जल पीया, जिससे उन्हें अद्भुत रूप से जीवनदान मिला। इस दिव्य कृपा के प्रति आभार व्यक्त करने हेतु परिवार ने अपनी भूमि पर भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित एक भव्य मंदिर बनाने का निश्चय किया। मंदिर का निर्माण लगभग सात वर्षों तक चला और इस दौरान उच्चतम वास्तुकला और स्थापत्य कला का प्रयोग किया गया।
वास्तुकला और दिव्यता
स्वर्णगिरि मंदिर की वास्तुकला अत्यंत भव्य और आकर्षक है। मंदिर के चारों ओर विशाल राजगोपुरम बनाए गए हैं, जो मंदिर में प्रवेश करते ही भक्तों का मन मोह लेते हैं। मंदिर के गर्भगृह के ऊपर पांच मंजिला विमान गोपुरम का निर्माण किया गया है, जो दूर से ही अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। मंदिर परिसर में 40 फुट ऊँची एकाश्म हनुमान प्रतिमा स्थित है, जो भक्तों के मन में शक्ति और भक्ति की अनुभूति उत्पन्न करती है। इसके अलावा, मंदिर में भारत की दूसरी सबसे बड़ी कांस्य की घंटी है, जिसका वजन लगभग 1.5 टन है।
गर्भगृह में स्थित भगवान वेंकटेश्वर की 12 फुट ऊंची प्रतिमा तेलंगाना की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है। प्रतिमा का सौंदर्य और भव्यता भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। शाम के समय मंदिर में जलाए गए दीपकों की रोशनी में जला नारायण स्वामी सन्निधि अत्यंत दिव्य और अलौकिक प्रतीत होता है। मंदिर का वातावरण शांत, निर्मल और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है।
दर्शन और आरती का समय
स्वर्णगिरि वेंकटेश्वर मंदिर में भक्त सुबह 5:00 बजे से दर्शन कर सकते हैं। भूपाली और अभिषेक का समय सुबह 5:00 बजे से 6:30 बजे तक होता है। दोपहर में 12:30 से 1:30 बजे तक मंदिर ब्रेक रहता है। इसके बाद 1:30 से 2:30 बजे तक महाप्रसाद वितरण और नैवेद्य का समय होता है। रात 9:00 बजे शेज आरती होती है, जिसमें भक्त पूरे दिन की भक्ति और प्रार्थना को पूर्णता के साथ समाप्त करते हैं।
मंदिर जाने का सर्वोत्तम समय
स्वर्णगिरि मंदिर पूरे वर्ष दर्शन के लिए खुला रहता है। हालांकि, मॉनसून और सर्दियों के मौसम में यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और हरियाली विशेष रूप से मनमोहक हो जाती है। बारिश के दौरान हिल्स पर बिछे बादल और मंदिर का शांत वातावरण इसे स्वर्गीय अनुभव प्रदान करते हैं। ऐसे में यदि आप प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक अनुभव दोनों का आनंद लेना चाहते हैं, तो मॉनसून और सर्दियों के मौसम में मंदिर का दौरा करना सर्वोत्तम रहेगा।
मंदिर कैसे पहुंचें
हवाई मार्ग: सबसे निकटतम एयरपोर्ट है हैदराबाद, जो मंदिर से लगभग 76 किलोमीटर दूर है। यहां से आप टैक्सी या कार द्वारा मंदिर आसानी से पहुँच सकते हैं।
रेल मार्ग: मंदिर के सबसे पास का रेलवे स्टेशन भोंगिर जंक्शन है। सिकंदराबाद जंक्शन से भोंगिर जंक्शन की दूरी लगभग 44 किलोमीटर है। यहां से टैक्सी या कैब लेकर आप मंदिर पहुँच सकते हैं।
सड़क मार्ग: हैदराबाद से भुवनगिरी तक सड़क मार्ग भी उपलब्ध है। आप कार, टैक्सी या लोकल बस का उपयोग करके मंदिर तक आसानी से पहुँच सकते हैं।
स्वर्णगिरि वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर केवल एक भव्य स्थापत्य का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह भक्तों को भक्ति, दिव्यता और अध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत अवसर प्रदान करता है। यहाँ की शांति, दिव्यता और सौंदर्य हर आगंतुक के मन और आत्मा को गहराई से स्पर्श करता है।