Tuesday, 10 Mar 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > आरती/मंत्र > सूर्य मंत्र “आदिदेव नमस्तुभ्यं”: जानें अर्थ, जप विधि और चमत्कारी लाभ
आरती/मंत्र

सूर्य मंत्र “आदिदेव नमस्तुभ्यं”: जानें अर्थ, जप विधि और चमत्कारी लाभ

दिव्यसुधा
Last updated: March 8, 2026 1:10 pm
दिव्यसुधा
Share
सूर्य देव को अर्घ्य देते हुए भक्त और सूर्य मंत्र का जप
सूर्योदय के समय सूर्य मंत्र का जप करने से जीवन में ऊर्जा, आत्मविश्वास और सफलता प्राप्त होने की मान्यता है।
SHARE

सनातन धर्म में सूर्य देव को साक्षात प्रत्यक्ष देवता माना गया है। वे ऐसे देव हैं जिनके दर्शन प्रतिदिन सभी को होते हैं और जिनकी ऊर्जा से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। वैदिक परंपरा में सूर्य देव को शक्ति, प्रकाश, स्वास्थ्य और सफलता का प्रतीक माना गया है। इसलिए प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों ने सूर्य की उपासना को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए कई मंत्रों का उल्लेख मिलता है, जिनमें से एक प्रसिद्ध मंत्र है –

“आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तुते॥”

यह मंत्र सूर्य देव की स्तुति और उनसे कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना का सुंदर माध्यम है। मान्यता है कि इस मंत्र का श्रद्धा और नियमपूर्वक जप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कई प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।

मंत्र का अर्थ
इस मंत्र में भगवान सूर्य को सृष्टि के आदि देवता के रूप में प्रणाम किया गया है और उनसे कृपा की प्रार्थना की गई है।

आदिदेव नमस्तुभ्यं – हे सृष्टि के प्रथम देवता सूर्यदेव! आपको मेरा नमस्कार।
प्रसीद मम भास्कर – हे भास्कर! कृपया मुझ पर प्रसन्न हों और मेरे जीवन को प्रकाशमय बनाएं।
दिवाकर नमस्तुभ्यं – हे दिन का निर्माण करने वाले देवता! आपको बार-बार प्रणाम।
प्रभाकर नमोऽस्तुते – हे जगत को प्रकाश देने वाले प्रभाकर! आपको मेरा नमन है।
इस प्रकार यह मंत्र सूर्य देव से आशीर्वाद, ऊर्जा और जीवन में उजाला प्राप्त करने की प्रार्थना करता है।

मंत्र जपने के लाभ

सकारात्मक ऊर्जा का संचार
सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन शक्ति का स्रोत माना जाता है। इस मंत्र का नियमित जप करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और मन में उत्साह बना रहता है।

आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रह आत्मबल और आत्मविश्वास का कारक होता है। इस मंत्र के जप से व्यक्ति का आत्मविश्वास मजबूत होता है और वह अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित होता है।

स्वास्थ्य में सुधार
धार्मिक मान्यता है कि सूर्य देव की उपासना करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। नियमित रूप से सूर्य मंत्र का जप करने से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ महसूस करता है।

मान-सम्मान और प्रतिष्ठा
सूर्य देव को यश, पद और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस मंत्र का जप करने से समाज में मान-सम्मान बढ़ने और करियर में उन्नति के अवसर प्राप्त होने की मान्यता है।

मानसिक शांति और एकाग्रता
जब व्यक्ति नियमित रूप से सूर्य मंत्र का जप करता है, तो उसका मन शांत और स्थिर रहता है। इससे नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है और जीवन में संतुलन बना रहता है।

मंत्र जपने की सही विधि
इस मंत्र का जप करने के लिए सुबह सूर्योदय का समय सबसे उत्तम माना जाता है। स्नान करने के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद शांत मन से कम से कम 11, 21 या 108 बार इस मंत्र का जप करें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से इस सूर्य मंत्र का जप करता है, तो उसके जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता के नए मार्ग खुलने लगते हैं। सूर्य देव की कृपा से व्यक्ति के जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है।

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article रंग पंचमी पर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी को गुलाल अर्पित करते भक्त रंग पंचमी 2026: जानें तिथि, पूजा विधि और भगवान को चढ़ाए जाने वाले शुभ रंगों का महत्व
Next Article दांए हाथ में लाल धागा बांधे व्यक्ति का चित्र, भारतीय संस्कृति और धार्मिक प्रतीक दिखाते हुए दाएं हाथ पर लाल धागा क्यों बांधा जाता है? जानिए इसके धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

कुंभ संक्रांति और विजया एकादशी पर सूर्य देव को अर्घ्य और भगवान विष्णु की पूजा
आरती/मंत्र

कुंभ संक्रांति और विजया एकादशी का दुर्लभ संयोग: भक्ति, विजय और ऊर्जा का दिन

By Ekta Mishra
आरती/मंत्र

लक्ष्मी बीज मंत्र : जानिए अर्थ, महत्व और लाभ

By दिव्यसुधा
ॐ त्र्यंबकं महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए व्यक्ति और शिवलिंग की पवित्र छवि
आरती/मंत्र

शिव मंत्र : महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यंबकं) अर्थ, लाभ और महत्व

By Ekta Mishra
श्रीराधा का दिव्य स्वरूप और राधा मंत्र जप करते हुए भक्त
आरती/मंत्र

श्रीराधा मंत्र: जप विधि, लाभ और भक्ति मार्ग का महत्व

By Ekta Mishra
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?