हिंदू वास्तुशास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में होना शुभ नहीं माना जाता। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा कहा गया है इसलिए यह दिशा मृत्यु, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि यदि घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में खुलता है तो परिवार के लोग अनजाने भय, आर्थिक हानि, तनाव, बीमारी और अचानक होने वाली दुर्घटनाओं से प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि घर की दिशा को बदलना संभव नहीं है लेकिन कुछ शक्तिशाली और प्रभावी उपायों से दक्षिण मुखी गृह के दोष को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
दक्षिणमुखी घर में समस्याओं के संकेत
वास्तुशास्त्र के अनुसार दक्षिणमुखी घर में रहने वाले लोग अक्सर मानसिक बेचैनी, क्रोध, कलह और आर्थिक उतार-चढ़ाव का अनुभव करते हैं। घर में अचानक पैसों की हानि, नौकरी में अस्थिरता और व्यापार में रुकावटें भी इस दिशा के दोष से जुड़ी मानी जाती हैं। दक्षिण दिशा की ऊर्जा अत्यंत तेज और ‘अग्नि’ प्रधान होती है इसलिए इस दिशा को सही उपायों से संतुलित करना आवश्यक है।
मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, ओम और त्रिशूल बनाना अत्यंत शुभ
यदि आपके घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है तो आपको शनिवार या मंगलवार के दिन गेरू, सिंदूर और घी से मिश्रित पवित्र लेप से मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, ओम और त्रिशूल बनाना चाहिए। इसे प्रातःकाल सूर्योदय के बाद पीपल की लकड़ी से बनी कलम से बनाना सर्वोत्तम है। इस उपाय के साथ “ओम नमः शिवाय” या “ओम ह्रीं क्लीं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए। इस विधि से दक्षिण दिशा से आने वाली तीव्र और असंतुलित ऊर्जा नियंत्रित होती है और घर में स्थिरता, धन तथा सुरक्षा का प्रभाव बढ़ता है।
द्वार के दोनों ओर तुलसी या आंवले का पौधा लगाएं
दक्षिणमुखी घर की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करने में तुलसी, आंवला या शमी के पौधे बेहद प्रभावी माने जाते हैं। यदि द्वार के दोनों ओर पौधा लगाया जाए, तो यह दक्षिण दिशा की ‘गर्म’ ऊर्जा को ‘सत्वगुण’ में परिवर्तित कर देता है। तुलसी को प्रतिदिन जल देने और दीपक जलाने से घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। यह उपाय मानसिक तनाव और वास्तुदोष के कारण पैदा होने वाली परेशानियों को भी कम करता है।
मुख्य द्वार पर लोहे या तांबे का वास्तु पिरामिड लगाएं
दक्षिणमुखी घर के प्रवेश द्वार पर तांबे या लोहे का वास्तु पिरामिड लगाना अत्यंत प्रभावी उपाय माना जाता है। इसके साथ ही “ॐ नमः शिवाय” अंकित ताम्र पट्ट भी लगाया जा सकता है। इसे लगाने से पहले पवित्र जल से शुद्ध करना आवश्यक है। यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है परिवार को अकारण विवाद, धन हानि और भय से बचाता है तथा घर में शुभ ऊर्जा का प्रवेश सुनिश्चित करता है।
काली मिर्च और राई का टोटका
शनिवार के दिन 7 साबुत काली मिर्च, कुछ राई और थोड़ा काला नमक लेकर मुख्य द्वार के दोनों ओर छिड़कना चाहिए। अगले दिन इस मिश्रण को झाड़ू से हटाकर घर के बाहर फेंक देना चाहिए। यह पारंपरिक उपाय शनि दोष, नजरबट्टू, तंत्र-मंत्र बाधा और दक्षिण दिशा के नकारात्मक प्रभावों को शांत करता है। इससे अकारण खर्च रुकते हैं और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है।
पंचमुखी हनुमानजी की तस्वीर या यंत्र लगाएं
दक्षिण दिशा पर शनि और राहु जैसे ग्रहों का प्रभाव अधिक रहता है। इसलिए पंचमुखी हनुमानजी को इस दिशा का शक्तिशाली रक्षक माना जाता है। मुख्य द्वार के ऊपर या सामने की दीवार पर पंचमुखी हनुमानजी की तस्वीर या यंत्र लगाने से नकारात्मक शक्तियों, तंत्र बाधाओं और भय का प्रभाव समाप्त होता है। हर मंगलवार और शनिवार सरसों के तेल का दीपक जलाकर “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का जाप करने से घर में साहस, स्वास्थ्य और समृद्धि बढ़ती है।