Monday, 9 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > सीता अष्टमी व्रत के दिन करें ये उपाय कटगें आपके सारे कष्टः
अन्य

सीता अष्टमी व्रत के दिन करें ये उपाय कटगें आपके सारे कष्टः

Ekta Mishra
Last updated: February 8, 2026 1:27 pm
Ekta Mishra
Share
सीता अष्टमी व्रत के दौरान माता सीता की पूजा करते हुए महिलाएं
सीता अष्टमी व्रत: माता सीता की पूजा से वैवाहिक सुख और समृद्धि
SHARE

सीता अष्टमी, हिन्दू धर्म में विशेष रूप से माता सीता को समर्पित एक प्रमुख व्रत और त्योहार है। यह पर्व कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है और इसे महिलाओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। सीता अष्टमी का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

माता सीता, जिन्हें ‘जानकी’, ‘वैदेही’ और ‘रामायण की आदर्श स्त्री’ के नाम से जाना जाता है, भारतीय संस्कृति में आदर्श नारी और पत्नी का प्रतीक हैं। उनके चरित्र में संयम, भक्ति, साहस और धैर्य की विशेषताएँ झलकती हैं। यही कारण है कि सीता अष्टमी का व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाएँ करती हैं, ताकि उनके वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और स्थिरता बनी रहे। इस दिन महिलाएँ माता सीता की पूजा कर उनके आदर्शों का स्मरण करती हैं।

पूजा विधि और अनुष्ठान
सीता अष्टमी के दिन महिलाएँ सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और सफेद वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद घर के पूजा स्थान को स्वच्छ करके वहां माता सीता की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। पूजा में दूर्वा, फूल, कुमकुम, हल्दी, अक्षत (चावल) और रोली का उपयोग किया जाता है।

इस दिन मुख्य रूप से कथा पाठ और सीता माता के जीवन से जुड़ी कहानियाँ सुनाई जाती हैं। महिलाओं के बीच यह प्रचलित है कि माता सीता की स्तुति करने और उनका ध्यान करने से घर में सुख-शांति और वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है। कई जगहों पर महिलाएँ उपवास भी रखती हैं, जिसमें वे दिनभर केवल एक बार या निर्जला व्रत करती हैं।

सीता अष्टमी का धार्मिक महत्व
सीता अष्टमी का सबसे बड़ा धार्मिक महत्व माता सीता के आदर्शों और गुणों को जीवन में उतारना है। यह पर्व यह संदेश देता है कि जीवन में धैर्य, समर्पण, और सच्चाई बनाए रखना आवश्यक है। माता सीता ने अपने जीवन में कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा, और यही उनके जीवन का सबसे बड़ा आदर्श है।

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, सीता अष्टमी का व्रत करने से महिलाएँ न केवल वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि पाती हैं बल्कि उनके परिवार में सौहार्द और प्रेम भी बना रहता है। इसके अलावा, यह पर्व मातृशक्ति और स्त्री शक्ति के सम्मान का प्रतीक भी है।

सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
सीता अष्टमी केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। इस दिन महिलाएँ एकत्र होकर सीता माता की कथाएँ सुनती हैं और एक दूसरे के साथ व्रत और पूजा की बातें साझा करती हैं। यह समुदाय में एकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। बच्चों को भी माता सीता की कहानी सुनाई जाती है, जिससे उनमें नैतिक मूल्यों और संस्कारों का विकास होता है।

उपाय
सीता अष्टमी न केवल एक धार्मिक उत्सव है बल्कि यह स्त्रीत्व, परिवार और नैतिकता का प्रतीक भी है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में धर्म, संयम और धैर्य बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। माता सीता का जीवन और उनके आदर्श आज भी हमारे जीवन में मार्गदर्शन का कार्य करते हैं। इस अवसर पर की गई पूजा और व्रत महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं, और यह परिवार में सुख, प्रेम और समृद्धि लाने का मार्ग प्रशस्त करता है। इस प्रकार, सीता अष्टमी केवल एक पर्व नहीं बल्कि जीवन के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें सिखाता है कि कठिनाइयों में भी सच्चाई और भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए।

TAGGED:कार्तिक मासधार्मिक उपायमाता सीतावैवाहिक सुखव्रत पूजासीता अष्टमीसीता अष्टमी व्रतसीता माताहिंदू त्योहार
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article 7 फरवरी 2026 पंचांग: हस्त से चित्रा नक्षत्र, जानिए आज का ज्योतिषीय महत्व
Next Article घर में ऊंट की मूर्ति रखने के फायदे और सही दिशा घर में ऊंट की मूर्ति रखने का सही दिशा-स्थान, फायदे और वास्तु नियम
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

गुरुवार के उपाय में 1 रुपये का सिक्का और हल्दी से भगवान विष्णु की पूजा
अन्य

गुरुवार के उपाय: 1 रुपये का सिक्का और हल्दी से बदलें भाग्य

By दिव्यसुधा
गोवर्धन पूजा 2025 पूजा विधि और महत्व
व्रत और त्योहार

गोवर्धन पूजा 2025: क्यों मनाया जाता है यह पर्व, जानिए महत्व, तिथि और पूजा विधि

By दिव्यसुधा
अगहन मास में जीरा क्यों नहीं खाना चाहिए – धार्मिक और आयुर्वेदिक कारण
अन्य

अगहन मास में जीरा क्यों नहीं खाना चाहिए? धार्मिक, आयुर्वेदिक और आध्यात्मिक कारण

By दिव्यसुधा
बुध प्रदोष व्रत 2025 पर भक्त शिवलिंग की पूजा करते हुए
व्रत और त्योहार

बुध प्रदोष व्रत 2025: तिथि, शुभ योग और भगवान शिव पूजा का समय

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?