Saturday, 11 Apr 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > सिंहाचलम मंदिर: भगवान नरसिंह का अद्भुत और रहस्यमयी धाम
मंदिर

सिंहाचलम मंदिर: भगवान नरसिंह का अद्भुत और रहस्यमयी धाम

Ekta Mishra
Last updated: April 11, 2026 1:32 pm
Ekta Mishra
Share
सिंहाचलम मंदिर में भगवान नरसिंह की चंदन से ढकी मूर्ति और भक्तों की आस्था का दृश्य
सिंहाचलम मंदिर: जहां भगवान नरसिंह का स्वरूप चंदन से ढका रहस्यमयी दिव्य अनुभव देता है।
SHARE

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में स्थित सिंहाचलम मंदिर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और दिव्य स्थल है। यह मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमयी विशेषताओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां भगवान नरसिंह की मूर्ति पूरे वर्ष चंदन की मोटी परत से ढकी रहती है, जो इस मंदिर को अन्य सभी मंदिरों से अलग बनाती है।

कहां स्थित है यह पावन मंदिर
सिंहाचलम मंदिर विशाखापट्टनम शहर से लगभग 16 किलोमीटर दूर सिंहाचल पर्वत की चोटी पर स्थित है। इस कारण इसे सिंहाचलम मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का पूरा नाम “वराह लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर” है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान के परम भक्त प्रह्लाद जी ने करवाया था। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से प्राकृतिक सौंदर्य का भी अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है।

चंदन के लेप का रहस्य
भगवान नरसिंह का अवतार वीरता और उग्रता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने हिरण्यकशिपु का वध किया, तब उनका क्रोध अत्यधिक बढ़ गया था। देवताओं के अनेक प्रयासों के बावजूद उनका उग्र रूप शांत नहीं हो रहा था। तब उनके परम भक्त प्रह्लाद की भक्ति से प्रसन्न होकर वे शांत हुए और सिंहाचलम पर्वत पर प्रकट हुए।

उनके इस उग्र तेज को संतुलित करने के लिए भगवान को चंदन का लेप लगाया जाता है। यही कारण है कि यहां भगवान की मूर्ति सालभर चंदन से ढकी रहती है, जिससे उनका स्वरूप शांत और सौम्य बना रहे।

कब मिलता है ‘निजरूप दर्शन’
सिंहाचलम मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां भगवान के वास्तविक स्वरूप के दर्शन साल में केवल एक बार ही होते हैं। अक्षय तृतीया के दिन चंदन की परत हटाई जाती है, जिसे ‘निजरूप दर्शन’ या ‘चंदनोत्सव’ कहा जाता है। इस दिन भक्तों को भगवान नरसिंह के असली विग्रह के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी, इसलिए इस दिन मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। इसके अलावा नरसिंह जयंती के अवसर पर भी यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है।

मंदिर की अनोखी विशेषताएं
जहां अन्य मंदिरों में भगवान नरसिंह का उग्र रूप देखने को मिलता है, वहीं सिंहाचलम मंदिर में वे मां लक्ष्मी के साथ शांत और सौम्य मुद्रा में विराजमान हैं। यह दृश्य भक्तों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। मंदिर की वास्तुकला भी बेहद आकर्षक है। इसमें चोल, चालुक्य और कलिंग शैली का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाता है।

सिंहाचलम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और रहस्य का अद्भुत संगम है। यहां की परंपराएं और मान्यताएं भक्तों को भगवान के प्रति और भी अधिक श्रद्धा से भर देती हैं। यदि आप कभी विशाखापट्टनम जाएं, तो इस दिव्य धाम के दर्शन अवश्य करें, जहां आस्था और शांति का अद्भुत अनुभव आपका इंतजार कर रहा है।

TAGGED:आध्यात्मिक स्थलआंध्र प्रदेश मंदिरचंदनोत्सवनरसिंह मंदिरनिजरूप दर्शनभगवान विष्णु अवतारभारत के प्रसिद्ध मंदिरवराह लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिरविशाखापट्टनम मंदिरसिंहाचलम मंदिरहिंदू धार्मिक स्थल
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article दक्षिण दिशा का वास्तु महत्व दर्शाता हुआ घर का आंतरिक दृश्य और संतुलित ऊर्जा व्यवस्था दक्षिण दिशा का वास्तु महत्व: घर में संतुलन और समृद्धि के लिए जरूरी नियम
Next Article राज पंचक के दौरान पूजा करते हुए व्यक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का आध्यात्मिक दृश्य राज पंचक 2026: सुख, समृद्धि और सफलता का विशेष योग
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

मैहर धाम
मंदिर

मैहर धाम : माता शारदा देवी मंदिर

By दिव्यसुधा
माता सती यज्ञ अग्नि में प्रवेश करती हुईं, भगवान शिव शोकाकुल रूप में, पृष्ठभूमि में दक्ष यज्ञ का दृश्य
भगवान

माता सती की दिव्य कथा और 51 शक्तिपीठों की स्थापना

By दिव्यसुधा
कैंची धाम नीम करौली बाबा मंदिर नैनीताल उत्तराखंड में स्थित पवित्र हनुमान मंदिर
अन्य

नीम करौली बाबा मंदिर: आस्था, भक्ति और चमत्कारों का पवित्र धाम

By दिव्यसुधा
मंदिर

तमिलनाडु का करुम्बेश्वर शिव मंदिर – डायबिटीज के रोगियों के लिए आस्था का केंद्र

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?