आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में स्थित सिंहाचलम मंदिर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और दिव्य स्थल है। यह मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमयी विशेषताओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां भगवान नरसिंह की मूर्ति पूरे वर्ष चंदन की मोटी परत से ढकी रहती है, जो इस मंदिर को अन्य सभी मंदिरों से अलग बनाती है।
कहां स्थित है यह पावन मंदिर
सिंहाचलम मंदिर विशाखापट्टनम शहर से लगभग 16 किलोमीटर दूर सिंहाचल पर्वत की चोटी पर स्थित है। इस कारण इसे सिंहाचलम मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का पूरा नाम “वराह लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर” है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान के परम भक्त प्रह्लाद जी ने करवाया था। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से प्राकृतिक सौंदर्य का भी अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है।
चंदन के लेप का रहस्य
भगवान नरसिंह का अवतार वीरता और उग्रता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने हिरण्यकशिपु का वध किया, तब उनका क्रोध अत्यधिक बढ़ गया था। देवताओं के अनेक प्रयासों के बावजूद उनका उग्र रूप शांत नहीं हो रहा था। तब उनके परम भक्त प्रह्लाद की भक्ति से प्रसन्न होकर वे शांत हुए और सिंहाचलम पर्वत पर प्रकट हुए।
उनके इस उग्र तेज को संतुलित करने के लिए भगवान को चंदन का लेप लगाया जाता है। यही कारण है कि यहां भगवान की मूर्ति सालभर चंदन से ढकी रहती है, जिससे उनका स्वरूप शांत और सौम्य बना रहे।
कब मिलता है ‘निजरूप दर्शन’
सिंहाचलम मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां भगवान के वास्तविक स्वरूप के दर्शन साल में केवल एक बार ही होते हैं। अक्षय तृतीया के दिन चंदन की परत हटाई जाती है, जिसे ‘निजरूप दर्शन’ या ‘चंदनोत्सव’ कहा जाता है। इस दिन भक्तों को भगवान नरसिंह के असली विग्रह के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी, इसलिए इस दिन मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। इसके अलावा नरसिंह जयंती के अवसर पर भी यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है।
मंदिर की अनोखी विशेषताएं
जहां अन्य मंदिरों में भगवान नरसिंह का उग्र रूप देखने को मिलता है, वहीं सिंहाचलम मंदिर में वे मां लक्ष्मी के साथ शांत और सौम्य मुद्रा में विराजमान हैं। यह दृश्य भक्तों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। मंदिर की वास्तुकला भी बेहद आकर्षक है। इसमें चोल, चालुक्य और कलिंग शैली का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाता है।
सिंहाचलम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और रहस्य का अद्भुत संगम है। यहां की परंपराएं और मान्यताएं भक्तों को भगवान के प्रति और भी अधिक श्रद्धा से भर देती हैं। यदि आप कभी विशाखापट्टनम जाएं, तो इस दिव्य धाम के दर्शन अवश्य करें, जहां आस्था और शांति का अद्भुत अनुभव आपका इंतजार कर रहा है।