महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सनातन परंपरा और तीर्थों की आपसी एकता का एक अनुपम दृश्य मथुरा में देखने को मिला, जब श्रीकृष्ण जन्मस्थान से काशी विश्वनाथ धाम के लिए एक भव्य प्रसादी यात्रा रवाना की गई। ढोल-नगाड़ों, मृदंग, मंजीरे और जयघोष के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था और हृदय में उत्साह साफ झलक रहा था।
महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ को अर्पित होगा प्रसाद
इस प्रसादी यात्रा के माध्यम से लड्डू, फल, मेवे, वस्त्र, आभूषण, भगवान शिव और मां गौरी के विशेष वस्त्र, मां का श्रृंगार तथा अन्य पूजन सामग्री काशी विश्वनाथ धाम भेजी गई। यह समस्त प्रसाद महाशिवरात्रि के दिन बाबा विश्वनाथ को अर्पित किया जाएगा। मान्यता है कि ब्रजभूमि से आया यह प्रसाद काशी में विशेष पुण्य फल प्रदान करता है।
शोभायात्रा ने बढ़ाया भक्तिमय वातावरण
रविवार को निकली यह शोभायात्रा अन्नपूर्णेश्वर महादेव से प्रारंभ होकर भगवान श्रीकेशवदेव, मां योगमाया, श्रीगर्भगृह होते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मुख्य द्वार तक पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की और “हर-हर महादेव” व “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से संपूर्ण क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया। इसी भक्तिपूर्ण वातावरण के बीच प्रसादी यात्रा वाराणसी के लिए रवाना हुई।
सनातन एकता का प्रतीक है यह यात्रा
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि महाशिवरात्रि के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए यह यात्रा काशी विश्वनाथ धाम के लिए भेजी गई है। ब्रजभूमि से भेजा गया यह प्रसाद श्रद्धालुओं की भावनाओं और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि काशी के लिए विशेष रूप से शुद्ध और विधिपूर्वक तैयार किया गया प्रसाद भेजा गया है।
संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि ब्रजभूमि वह पवित्र भूमि है, जहां भगवान शिव बाबा भूतेश्वरनाथ के रूप में कोतवाल हैं। ऐसे में श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शिवरात्रि के लिए भेजा गया यह प्रसाद सनातन परंपरा की गहराई और तीर्थों के आध्यात्मिक संबंध को दर्शाता है।
सनातन धर्म की आत्मा हैं शिव, राम और कृष्ण
संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य डॉ. रोशन लाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्रीराम और भगवान शिव—तीनों ही सनातन धर्म की आत्मा हैं। जब तीर्थ और सनातनी एक-दूसरे से जुड़ते हैं, तभी भारत अपने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव को पुनः प्राप्त कर सकता है। इस अवसर पर उप प्रबंधक अनुराग पाठक और प्रभारी जनसंपर्क विजय बहादुर सिंह भी उपस्थित रहे।
आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण
श्रीकृष्ण जन्मस्थान से काशी विश्वनाथ धाम तक भेजी गई यह प्रसादी यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अखंडता, तीर्थों की एकता और भक्तों की अटूट आस्था का जीवंत प्रमाण है। महाशिवरात्रि पर जब यह प्रसाद बाबा विश्वनाथ को अर्पित होगा, तब ब्रज और काशी के आध्यात्मिक मिलन का दिव्य अनुभव सम्पूर्ण भारत महसूस करेगा।