Thursday, 12 Mar 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > शीतला अष्टमी: आरोग्य और स्वच्छता की देवी का पावन पर्व
व्रत और त्योहार

शीतला अष्टमी: आरोग्य और स्वच्छता की देवी का पावन पर्व

Ekta Mishra
Last updated: March 11, 2026 12:26 pm
Ekta Mishra
Share
शीतला अष्टमी पर माता शीतला की पूजा और बसोड़ा के ठंडे प्रसाद का भोग
शीतला अष्टमी: बसोड़ा की परंपरा, ठंडे प्रसाद का भोग और माता शीतला की पूजा का विशेष महत्व।
SHARE

हिंदू धर्म में शीतला माता को आरोग्य, स्वच्छता और रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। हर वर्ष शीतला अष्टमी और शीतला सप्तमी का व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है। कई स्थानों पर श्रद्धालु होली के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार या शुक्रवार को भी यह व्रत रखते हैं। इस दिन श्रद्धापूर्वक माता शीतला की पूजा-अर्चना करके भक्त अपने परिवार के स्वास्थ्य, सुख-शांति, संतान के उज्ज्वल भविष्य और रोगों से रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

बसोड़ा की परंपरा और बासी भोजन का महत्व
शीतला अष्टमी को कई स्थानों पर ‘बसोड़ा’ के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व की एक विशेष परंपरा है कि अष्टमी के दिन ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। इसके बजाय सप्तमी तिथि को ही माता के लिए प्रसाद तैयार किया जाता है। इस प्रसाद में गन्ने के रस और चावल से बनी खीर, राबड़ी, पुआ, दही और अन्य ठंडे पकवान बनाए जाते हैं। अष्टमी के दिन इन्हीं ठंडे और एक दिन पहले बने व्यंजनों का माता को भोग लगाया जाता है और बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

मान्यता है कि माता शीतला को बासी भोजन का भोग अर्पित करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है और त्वचा संबंधी रोगों से भी राहत मिलती है। यह परंपरा स्वच्छता और स्वास्थ्य के महत्व को भी दर्शाती है, क्योंकि प्राचीन समय में माता शीतला को विशेष रूप से चेचक और अन्य संक्रामक रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता था।

शीतला अष्टमी का पूजा मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष शीतला अष्टमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 06:36 बजे से सायं 06:27 बजे तक माना गया है। इस समय भक्त स्नान करके माता शीतला की विधिवत पूजा करते हैं, उन्हें ठंडे प्रसाद का भोग अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करते हैं।

शीतला माता की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक गांव में एक वृद्धा अपनी दो बहुओं के साथ रहती थी। एक दिन तीनों ने शीतला माता का व्रत रखने का निश्चय किया। इस व्रत की परंपरा के अनुसार बासी भोजन का भोग लगाया जाता है और वही प्रसाद ग्रहण किया जाता है। लेकिन दोनों बहुओं ने हाल ही में संतान को जन्म दिया था, इसलिए उन्हें डर था कि बासी भोजन उनके लिए हानिकारक हो सकता है। इसी कारण उन्होंने सुबह ताजा भोजन बना लिया।

जब सास को इस बात का पता चला तो वह बहुत नाराज़ हुई। कुछ ही समय बाद दुखद समाचार मिला कि दोनों बहुओं की संतानों की अचानक मृत्यु हो गई। इस घटना से दुखी होकर सास ने दोनों बहुओं को घर से बाहर निकाल दिया। दोनों बहुएं अपने बच्चों के शव लेकर घर से निकल पड़ीं।

रास्ते में उन्हें दो बहनें मिलीं, जिनका नाम ओरी और शीतला था। वे अपने सिर में जुओं के कारण बहुत परेशान थीं। दोनों बहुओं को उन पर दया आई और उन्होंने उनके सिर को साफ करके उन्हें राहत दिलाई। इससे प्रसन्न होकर दोनों बहनों ने उन्हें पुत्रवती होने का आशीर्वाद दिया।

तब बहुओं ने रोते हुए अपने बच्चों के शव दिखाए और अपनी व्यथा सुनाई। यह सुनकर शीतला माता ने कहा कि उन्हें अपने कर्मों का फल मिला है, क्योंकि उन्होंने शीतला अष्टमी के दिन ताजा भोजन बनाकर परंपरा का उल्लंघन किया था। अपनी भूल का एहसास होने पर दोनों बहुओं ने माता से क्षमा मांगी और भविष्य में नियमों का पालन करने का वचन दिया।

माता शीतला उनकी भक्ति और पश्चाताप से प्रसन्न हो गईं और उन्होंने दोनों बच्चों को पुनः जीवित कर दिया। इसके बाद दोनों बहुएं खुशी-खुशी अपने घर लौट आईं और हर वर्ष श्रद्धा और नियमपूर्वक माता शीतला का व्रत करने लगीं। तभी से इस पर्व को पूरे गांव में बड़ी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जाने लगा।

इस प्रकार शीतला अष्टमी केवल एक धार्मिक व्रत ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और परंपरा के महत्व को समझाने वाला एक पावन पर्व भी है। माता शीतला की कृपा से भक्त अपने जीवन में सुख, शांति और आरोग्य की कामना करते हैं।

TAGGED:astrology hindiDharmik Newsधार्मिक कथाबसोड़ा पर्वव्रत और पूजाशीतला अष्टमीशीतला मातासनातन धर्महिंदू त्योहारहिंदू परंपरा
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article पुणे के प्रसिद्ध डगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर में सोने के आभूषणों से सजी भगवान गणेश की भव्य मूर्ति एक ऐसा मंदिर जहाँ सभी भक्तों की मनोकामनाएँ होती हैं पूरी- दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर
Next Article शीतला अष्टमी 2026 पर माता शीतला की पूजा और बसौड़ा के ठंडे प्रसाद का भोग शीतला अष्टमी 2026: बसौड़ा पर्व का महत्व, पूजा विधि और जरूरी नियम
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

गीता जयंती 2025 पर भगवान कृष्ण और अर्जुन का दिव्य उपदेश – कुरुक्षेत्र का गीता ज्ञान
व्रत और त्योहार

गीता जयंती 2025: तिथि, महत्व, पूजा विधि और मोक्षदा एकादशी का दिव्य संयोग

By दिव्यसुधा
जागेश्वर धाम
मंदिर

2500 साल पुराना एक ऐसा मंदिर, जहां होती है शिव जी के बाल स्वरूप की पूजा

By दिव्यसुधा
भगवान शिव सती के वियोग में तांडव करते हुए
भगवान

जब शिव का तांडव हुआ और कांप उठी पूरी सृष्टि

By दिव्यसुधा
पौष मासिक शिवरात्रि 2025 पर भगवान शिव की पूजा और अभिषेक
आरती/मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र: मृत्यु को मात देने वाला महामंत्र, जानिए लाभ और नियम

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?