मध्यप्रदेश के विंध्य अंचल की पुण्यभूमि रीवा जिले का गुढ़ विधानसभा क्षेत्र इन दिनों आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री बनने के पश्चात पहली बार इस क्षेत्र का दौरा किया और ग्राम खामडीह में स्थित भैरवनाथ बाबा मंदिर का विधिवत लोकार्पण किया। यह अवसर न केवल क्षेत्रवासियों के लिए, बल्कि समस्त श्रद्धालुओं के लिए ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
विश्व की अनूठी शयन मुद्रा वाली भैरव प्रतिमा
खामडीह में स्थापित भैरवनाथ बाबा की प्रतिमा विश्व की सबसे लंबी शयन मुद्रा वाली भैरव प्रतिमा मानी जाती है। लगभग 9 मीटर लंबी और 4 मीटर चौड़ी यह दिव्य प्रतिमा आस्था, शिल्प और साधना का अद्भुत संगम है। काले बलुआ पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा कल्चुरी कालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका निर्माण 10वीं–11वीं शताब्दी में एक ही विशाल शिला को तराशकर किया गया था।
प्राचीन विरासत से आधुनिक भव्यता तक
सदियों तक खुले आकाश के नीचे स्थित रहने के पश्चात अब इस दिव्य प्रतिमा के चारों ओर भव्य दो मंजिला मंदिर का निर्माण किया गया है। एलएडी योजना के अंतर्गत विकसित इस मंदिर परिसर में सामुदायिक भवन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं हेतु संरचनाएं तथा दुकानें भी शामिल हैं, जिससे यह स्थान आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
भैरवनाथ का दिव्य स्वरूप और आध्यात्मिक संदेश
शयन मुद्रा में विराजमान चतुर्भुज भैरवनाथ बाबा के स्वरूप में रौद्रता और करुणा का अद्भुत संतुलन दृष्टिगोचर होता है। उनके हाथों में त्रिशूल, रुद्राक्ष माला, सर्प और बीज-फल जैसे प्रतीक जीवन, संहार, भक्ति और सृष्टि की निरंतरता का संदेश देते हैं। यह प्रतिमा श्रद्धालुओं को निर्भयता, संरक्षण और आत्मिक जागरण की अनुभूति कराती है।
विकास और आध्यात्म का समन्वय
इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा गुढ़ क्षेत्र में अनेक विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया गया, जिससे क्षेत्र में समग्र विकास की नई ऊर्जा का संचार हुआ। आज भैरवनाथ बाबा की यह दिव्य प्रतिमा विंध्य क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान बनकर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।