Saturday, 14 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026: तिथि, मुहूर्त, महत्व और संपूर्ण पूजा विधि
व्रत और त्योहार

शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026: तिथि, मुहूर्त, महत्व और संपूर्ण पूजा विधि

Ekta Mishra
Last updated: February 13, 2026 12:29 pm
Ekta Mishra
Share
शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026 पर भगवान शिव का अभिषेक और पूजा विधि
14 फरवरी 2026 को शनि प्रदोष व्रत: प्रदोष काल में शिव पूजा का विशेष महत्व
SHARE

सनातन परंपरा में प्रदोष व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होकर रखा जाता है। वर्ष 2026 के फरवरी माह में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को लेकर श्रद्धालुओं में कुछ भ्रम की स्थिति है, क्योंकि यह तिथि 14 फरवरी की शाम से आरंभ होकर 15 फरवरी की शाम तक रहेगी। ऐसे में सही व्रत तिथि और पूजा मुहूर्त जानना आवश्यक है।

प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा?
पंचांग के अनुसार, फरवरी 2026 में त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी को शाम 4:01 बजे से प्रारंभ होकर 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे तक रहेगी। चूंकि 14 फरवरी की संध्या बेला यानी प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026, शनिवार को रखा जाएगा। शनिवार के दिन पड़ने के कारण यह शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा, जिसका महत्व सामान्य प्रदोष की तुलना में अधिक माना जाता है।

क्यों विशेष है शनि प्रदोष?
जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन आता है, तो यह भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त करने का अद्भुत संयोग बनाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिदेव महादेव के परम भक्त हैं। अतः इस दिन शिव आराधना करने से शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं।

ज्योतिषीय दृष्टि से शनि प्रदोष व्रत को शनि दोष, कालसर्प दोष और पितृ दोष के शमन में सहायक माना गया है। जिन लोगों के जीवन में कार्यों में बाधाएं, करियर में रुकावट, आर्थिक दबाव या मानसिक तनाव हो, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धा और संयम के साथ किया गया यह व्रत जीवन में स्थिरता, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
14 फरवरी 2026 को प्रदोष काल में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा। इस दिन शाम 6:10 बजे से रात 8:44 बजे तक का समय विशेष रूप से अनुकूल माना गया है। यही वह अवधि है जब भगवान शिव की आराधना का उत्तम फल प्राप्त होता है।

इसके अतिरिक्त गोधूलि मुहूर्त शाम 6:08 बजे से 6:34 बजे तक रहेगा, जो शिव पूजा और अभिषेक के लिए अत्यंत शुभ है। निशिता मुहूर्त भले ही 15 फरवरी की रात्रि में आए, किंतु प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा 14 फरवरी की संध्या में ही की जाएगी।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ और सात्विक वस्त्र धारण करें तथा व्रत का संकल्प लें। दिनभर यथाशक्ति उपवास रखें। कुछ लोग निर्जल व्रत रखते हैं, तो कुछ फलाहार करते हैं यह श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार किया जा सकता है।

संध्या समय पुनः स्नान कर पूजा स्थल को शुद्ध करें। शिवलिंग का जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, अक्षत, धूप, दीप और सफेद पुष्प अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें और प्रदोष व्रत कथा का श्रवण करें। आरती के पश्चात भगवान को नैवेद्य अर्पित करें। अगले दिन 15 फरवरी को विधिपूर्वक व्रत का पारण करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।

आध्यात्मिक संदेश
प्रदोष व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और साधना का प्रतीक है। शनि प्रदोष का यह विशेष संयोग जीवन की बाधाओं को कम करने, कर्मों को शुद्ध करने और आंतरिक शांति प्राप्त करने का उत्तम अवसर है। श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक भाव से किया गया यह व्रत शिव कृपा का मार्ग प्रशस्त करता है।

TAGGED:Lord Shiva PujaPradosh Vrat February 2026Shani Pradosh Vrat 2026त्रयोदशी व्रतप्रदोष व्रत फरवरी 2026प्रदोष व्रत मुहूर्तफाल्गुन मास व्रतशनि दोष उपायशनि प्रदोष तिथिशनि प्रदोष व्रत 2026शनिवार व्रतशिव पूजा विधि
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article आज का पंचांग: मूल नक्षत्र दोपहर 3:30 बजे तक, कृष्ण पक्ष एकादशी 1:30 बजे तक, चंद्रमा धनु राशि में; आत्ममंथन और नई शुरुआत का दिन। आज  के पंचांग के अनुसार आज का मुख्य नक्षत्र मूल नक्षत्र है, जो दोपहर लगभग 3:30 बजे तक रहेगा है।
Next Article शनि प्रदोष व्रत 2026 में भगवान शिव और शनिदेव की पूजा का दृश्य शनि प्रदोष व्रत 2026: शिव–शनि कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

skand mata
व्रत और त्योहार

नवरात्रि विशेष…..नवरात्रि के पांचवे दिन करे स्कंदमाता व्रत कथा

By दिव्यसुधा
ganesh chaturthi
व्रत और त्योहार

गणेश जी को अर्पित करें ये चीजें और पाएं उनकी असीम कृपा

By दिव्यसुधा
shree ram
व्रत और त्योहार

नवरात्रि विशेष… राम नवमी पर बन रहे कई दुर्लभ संयोग, करिये ये 3 उपाय चमक सकती है किस्मत!

By दिव्यसुधा
लोहड़ी पर्व का अलाव और पंजाबी लोक नृत्य करते लोग
व्रत और त्योहार

लोहड़ी पर्व: इतिहास, मान्यताएं, परमपरायें और महत्व

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?