वास्तुशास्त्र में घर का प्रत्येक भाग ऊर्जा के प्रवाह से जुड़ा होता है और सीढ़ियां उस ऊर्जा के उतार-चढ़ाव का प्रतीक मानी जाती हैं। यदि सीढ़ियां सही दिशा में बनी हों तो घर में उन्नति, स्थिरता और समृद्धि आती है, लेकिन यदि दिशा अनुकूल न हो तो वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। विशेष रूप से सीढ़ियों के नीचे बाथरूम, टॉयलेट, नल या पूजा घर बनवाना अशुभ माना गया है। इससे मानसिक तनाव, आर्थिक हानि और पारिवारिक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि यदि सीढ़ियां पहले से बनी हों या उनके नीचे की जगह का उपयोग करना आवश्यक हो, तो वास्तु के कुछ सरल उपाय अपनाकर नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है। आइए दिशा अनुसार समझते हैं कि सीढ़ियों के नीचे क्या रखना शुभ माना जाता है।
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा)
- उत्तर-पूर्व दिशा जल तत्व से संबंधित है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिशा में सीढ़ियों का होना शुभ नहीं माना जाता। यदि यहां सीढ़ियां हों तो स्थान को हल्का, स्वच्छ और व्यवस्थित रखें।
- छोटे चीनी मिट्टी के गमलों में पौधे रखें।
- कांच की बोतल में पानी भरकर मनी प्लांट या अन्य जल-आधारित पौधे लगा सकते हैं।
- छोटा वॉटर फाउंटेन भी रखा जा सकता है। ध्यान रहे कि मिट्टी के भारी गमले न रखें, क्योंकि यह दिशा हल्की रहनी चाहिए।
आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा)
- यह दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी है और यहां सीढ़ियां होना सामान्यतः ठीक माना जाता है।
- सीढ़ियों के नीचे इनवर्टर, गैस सिलेंडर या प्रेस करने का स्थान बनाया जा सकता है।
- बड़े गमलों में मजबूत पौधे भी रखे जा सकते हैं। यह ऊर्जा को संतुलित रखने में सहायक होता है।
दक्षिण दिशा
- वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा में भारी वस्तुएं रखना शुभ होता है।
- बड़े गमले, मीटर रूम या स्टोरेज का उपयोग किया जा सकता है।
- यह स्थान स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
उत्तर दिशा
- उत्तर दिशा भी जल तत्व से संबंधित है और यहां सीढ़ियां होना शुभ नहीं माना जाता।
- इस स्थान को यथासंभव खाली रखें।
- यदि उपयोग करना हो तो छोटा फिश एक्वेरियम या छोटे चीनी मिट्टी के गमलों में पौधे रखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
पूर्व दिशा
- पूर्व दिशा वायु तत्व से जुड़ी है। यहां हल्कापन आवश्यक है।
- सीढ़ियों के नीचे भारी सामान न रखें।
- छोटे इंडोर प्लांट्स रख सकते हैं। खाली और स्वच्छ स्थान सर्वोत्तम माना जाता है।
नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम दिशा)
- यह दिशा सबसे स्थिर और शक्तिशाली मानी जाती है। यहां सीढ़ियां होना शुभ होता है।
- बड़े इंडोर प्लांट्स या भारी सामान रखें।
- यह घर में स्थिरता और समृद्धि लाता है।
पश्चिम दिशा
- पश्चिम दिशा के स्वामी वरुण देव माने जाते हैं।
- यहां बैंबू प्लांट या बड़ा फिश एक्वेरियम रखा जा सकता है।
- इससे आर्थिक उन्नति और शांति बनी रहती है।
वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा)
- छोटे या मध्यम आकार के गमले रख सकते हैं।
- गैस सिलेंडर या प्रेस स्थान के लिए भी यह दिशा उपयोगी है।
महत्वपूर्ण सावधानियां
- सीढ़ियों के नीचे अंधेरा और गंदगी न रहने दें।
- टूटी-फूटी वस्तुएं या कबाड़ न रखें।
- नियमित सफाई और प्रकाश की व्यवस्था रखें।
अंततः वास्तुशास्त्र का उद्देश्य घर में ऊर्जा का संतुलन बनाए रखना है। यदि सही दिशा में सही वस्तुओं का चयन किया जाए तो वास्तु दोष कम हो सकता है और घर में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का वास बना रहता है।