पौष मास में आने वाली सफला एकादशी देशभर में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है और माना जाता है कि जो व्यक्ति इस तिथि पर व्रत और पूजा करता है, उसके जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और सफलता के मार्ग खुलते हैं। शास्त्रों में इस व्रत का फल अत्यंत महान बताया गया है, इसलिए भक्त विशेष तैयारी के साथ इस पर्व को मनाते हैं।
सफला एकादशी 2025 की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार सफला एकादशी का शुभ व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष में आता है। वर्ष 2025 में यह तिथि 14 दिसंबर को प्रारंभ होकर 15 दिसंबर को समाप्त होगी। भक्त 15 दिसंबर को एकादशी का व्रत रखेंगे और 16 दिसंबर 2025 को पारण करके व्रत पूरा करेंगे। पारण का समय शास्त्रों में विशेष बताया गया है, इसलिए व्रतधारकों को इसे सही समय पर ही करना चाहिए।
सफला एकादशी का महत्व
सफला एकादशी का महत्व इतना अधिक है कि इसे हजारों वर्षों के कठोर तप के बराबर बताया गया है। इस व्रत के माध्यम से भक्त भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करते हैं और उनके जीवन में पापों का नाश होता है। ऐसा माना जाता है कि यह व्रत व्यक्ति के भाग्य को चमकाने वाला होता है और उसे आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। इस दिन किया गया व्रत मनुष्य को मोक्ष के मार्ग पर बढ़ाता है और जीवन में शांति व सद्गति का मार्ग खोलता है।
सफला एकादशी की विशेषताएँ
सफला एकादशी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह व्रत जीवन में रुके हुए कार्यों को आगे बढ़ाने की क्षमता रखता है। माना जाता है कि इस तिथि पर व्रत रखने से मनुष्य की किस्मत मजबूत होती है और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों-जैसे नौकरी, व्यापार, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन-में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है और वातावरण में पवित्रता व शांति का संचार होता है।
सफला एकादशी व्रत के नियम
इस व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से ही मानी जाती है। व्रतधारी को दशमी के दिन सात्त्विक भोजन करना चाहिए और प्याज, लहसुन, मांस, शराब जैसी तामसिक चीज़ों का सेवन नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन अनाज का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है, इसलिए भक्त फलाहार या निर्जला व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान मन, वाणी और कर्म में पवित्रता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
सफला एकादशी की पूजा विधि
एकादशी के दिन भक्त सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और पूजा स्थल को पवित्र बनाते हैं। भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा में जल, रोली, चावल, फूल, तिल, तुलसी, धूप-दीप आदि का प्रयोग किया जाता है। भक्त ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हैं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ या व्रत कथा का श्रवण करते हैं। दिनभर भक्ति में लीन रहने से मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
सफला एकादशी व्रत के लाभ
सफला एकादशी का व्रत करने से जीवन में कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा से यह व्रत करता है, उसके रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते हैं और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। नौकरी और व्यापार में तरक्की मिलती है तथा मन में स्थिरता और शांति बनी रहती है। यह व्रत पापों का नाश करता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह व्रत मनुष्य को मोक्ष की ओर ले जाने वाला माना गया है।