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दिव्य सुधा > अन्य > रवि पुष्य योग 2026: 4 जनवरी को बन रहा वर्ष का पहला अक्षय फल देने वाला शुभ योग
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रवि पुष्य योग 2026: 4 जनवरी को बन रहा वर्ष का पहला अक्षय फल देने वाला शुभ योग

दिव्यसुधा
Last updated: January 4, 2026 1:38 pm
दिव्यसुधा
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रवि पुष्य योग 2026 का शुभ संयोग, सूर्य और पुष्य नक्षत्र का दुर्लभ योग
रवि पुष्य योग 2026: सूर्य और पुष्य नक्षत्र का दुर्लभ संयोग
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हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में रवि पुष्य योग को अत्यंत शुभ और दुर्लभ योग माना गया है। यह योग नए कार्य की शुरुआत, निवेश, खरीदारी और जीवन में स्थायित्व लाने के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। वर्ष 2026 की शुरुआत भी इसी विशेष योग से हो रही है, जो पूरे वर्ष के लिए सकारात्मक संकेत देता है।

4 जनवरी 2026 को बन रहा है वर्ष का पहला रवि पुष्य योग
नववर्ष 2026 का पहला रवि पुष्य योग 4 जनवरी, रविवार को बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार, वर्ष की शुरुआत यदि शुभ योग से हो, तो उसका प्रभाव पूरे वर्ष दिखाई देता है। यही कारण है कि इस योग को अक्षय फल देने वाला योग कहा गया है। इस दिन किया गया कार्य समय के साथ कमजोर नहीं पड़ता, बल्कि स्थिर होकर निरंतर वृद्धि करता है।

रवि पुष्य योग कैसे बनता है?
जब पुष्य नक्षत्र रविवार के दिन पड़ता है, तब रवि पुष्य योग का निर्माण होता है। इस योग में तीन प्रमुख ग्रह शक्तियां एक साथ सक्रिय होती हैं—

  • सूर्य (रवि) – आत्मविश्वास, ऊर्जा, नेतृत्व और प्रतिष्ठा
  • शनि (पुष्य नक्षत्र के स्वामी) – कर्म, अनुशासन, स्थायित्व
  • बृहस्पति (पुष्य के अधिष्ठाता देव) – ज्ञान, विवेक और विस्तार

इन तीनों शक्तियों का संगम ऐसा समय बनाता है, जिसमें लिए गए निर्णय लंबे समय तक फलदायी सिद्ध होते हैं।

पुष्य नक्षत्र का शास्त्रीय महत्व
पुष्य नक्षत्र को शास्त्रों में “नक्षत्राणां श्रेष्ठः” कहा गया है।
इसका उल्लेख तैत्तिरीय ब्राह्मण, बृहत्संहिता, मुहूर्त चिंतामणि और ज्योतिष रत्नाकर जैसे ग्रंथों में मिलता है।

पुष्य शब्द का अर्थ है—

  • पोषण
  • वृद्धि
  • सुरक्षा

इसी कारण प्राचीन काल में व्यापारी, सेठ और राजकोष से जुड़े लोग पुष्य नक्षत्र में ही नए सौदे और योजनाएं शुरू करते थे।रविवार और सूर्य का आध्यात्मिक संबंध रविवार सूर्यदेव को समर्पित है। सूर्य को आत्मा, मान-सम्मान, शासन और अग्नि-तत्व का कारक माना गया है। जब सूर्य पुष्य जैसे स्थिर नक्षत्र में होता है, तब व्यक्ति के निर्णय दूरगामी और विवेकपूर्ण होते हैं।

रवि पुष्य योग के प्रमुख लाभ

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रवि पुष्य योग

  • धन को स्थिर करता है
  • व्यापार में निरंतर वृद्धि देता है
  • रुके हुए कार्यों में गति लाता है
  • निवेश को सुरक्षित बनाता है
  • संकल्प और प्रार्थनाओं को सफल करता है

इसी कारण यह योग सोना-चांदी खरीदने, नया व्यापार शुरू करने, निवेश और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

रवि पुष्य योग और बरगद वृक्ष का महत्व

शास्त्रों में बरगद को जीवित तीर्थ कहा गया है। मान्यता है कि—

  • जड़ में ब्रह्मा
  • तने में विष्णु
  • शाखाओं में महेश का वास होता है

रवि पुष्य योग में बरगद के पत्ते पर मनोकामना लिखकर अग्नि को अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है।

अग्नि-तत्व का आध्यात्मिक महत्व
अग्नि को देवताओं का मुख कहा गया है। जो कुछ अग्नि को अर्पित किया जाता है, वह सूक्ष्म जगत तक पहुंचता है। चूंकि सूर्य स्वयं अग्नि स्वरूप हैं, इसलिए इस योग में अग्नि के माध्यम से की गई प्रार्थना शीघ्र फल देती है।

आवश्यक सामग्री

  • बरगद का ताजा पत्ता
  • शुद्ध देसी घी का दीपक
  • कपूर या हवन सामग्री
  • तांबे की कटोरी
  • लाल या पीली कलम

पूजा विधि

  • शुभ समय में स्नान कर पूर्व दिशा की ओर बैठें
  • घी का दीपक जलाएं
  • बरगद के पत्ते पर अपनी मनोकामना लिखें
  • अपनी राशि अनुसार मंत्र का 11 बार जप करें
  • पत्ते को अग्नि में अर्पित करें
  • अंत में कहें— “इदं न मम”

12 राशियों के लिए विशेष मंत्र

  • मेष: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
  • वृषभ: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
  • मिथुन: ॐ गं गणपतये नमः
  • कर्क: ॐ नमः शिवाय
  • सिंह: आदित्य हृदय स्तोत्र
  • कन्या: ॐ बुं बुधाय नमः
  • तुला: ॐ शुं शुक्राय नमः
  • वृश्चिक: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
  • धनु: ॐ बृं बृहस्पतये नमः
  • मकर: ॐ शं शनैश्चराय नमः
  • कुंभ: ॐ नमो नारायणाय
  • मीन: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

रवि पुष्य योग 2026 का समय

  • आरंभ: 4 जनवरी 2026, रविवार — दोपहर 03:11 बजे
  • समाप्ति: 5 जनवरी 2026, सोमवार — सुबह 07:15 बजे

विशेष ध्यान दें: रवि पुष्य योग का पूर्ण अक्षय फल रविवार को ही प्राप्त होता है।

इस दिन क्या न करें

  • विवाह और बड़े मांगलिक संस्कार
  • झूठे वादे
  • क्रोध, विवाद और अपमान
  • किसी को कर्ज देना
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