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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > भगवान > युद्ध से पहले किस भगवान की अराधना करता था रावण? जानिए चौंकाने वाले रहस्य!
भगवान

युद्ध से पहले किस भगवान की अराधना करता था रावण? जानिए चौंकाने वाले रहस्य!

दिव्यसुधा
Last updated: February 20, 2026 11:16 am
दिव्यसुधा
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दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्रतिमा, जिनकी पूजा करने की कथा रावण से जुड़ी मानी जाती है
मान्यता है कि युद्ध से पहले रावण दक्षिणमुखी हनुमान जी की आराधना करता था।
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भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक धरोहर में ऐसे अनेक मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी कथाएँ रहस्य, भक्ति और चमत्कार से भरी हुई हैं। इन्हीं में से एक विशेष स्थान है दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, जिसके बारे में यह मान्यता है कि यहाँ स्वयं लंका के राजा रावण भी दर्शन करने आते थे। यह कथा न केवल रोचक है, बल्कि यह भी बताती है कि भक्ति और शक्ति के सामने अहंकार भी झुक जाता है।

 दक्षिणमुखी हनुमान का महत्व

सामान्यतः हनुमान जी की मूर्ति पूर्वमुखी या उत्तरमुखी होती है, लेकिन दक्षिणमुखी हनुमान अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली माने जाते हैं। दक्षिण दिशा को यम (मृत्यु) की दिशा कहा जाता है, और इस दिशा में मुख करके विराजमान हनुमान जी को विशेष रूप से नकारात्मक शक्तियों, तंत्र-मंत्र और बाधाओं से रक्षा करने वाला माना जाता है। दक्षिणमुखी रूप में हनुमान की पूजा करने से भय, शत्रु बाधा और ग्रह दोष दूर होते हैं। यही कारण है कि इस प्रकार के मंदिरों में तांत्रिक और साधक विशेष रूप से साधना करने आते हैं।

 रावण और हनुमान जी की अद्भुत कथा

रामायण काल में रावण केवल एक राक्षस राजा ही नहीं, बल्कि अत्यंत विद्वान, शिवभक्त और महान ज्योतिषी भी था। कहा जाता है कि वह हनुमान जी की शक्ति और उनके अद्भुत पराक्रम से भली-भांति परिचित था। एक प्रचलित कथा के अनुसार, लंका में युद्ध से पहले रावण को यह आभास हो गया था कि उसका अंत निकट है। तब उसने अपनी आध्यात्मिक साधना को और प्रबल करने के लिए दक्षिणमुखी हनुमान की उपासना आरंभ की। माना जाता है कि वह गुप्त रूप से इस मंदिर में आकर हनुमान जी के दर्शन करता था और उनसे शक्ति तथा संरक्षण की प्रार्थना करता था। यह कथा इस बात का प्रतीक है कि चाहे व्यक्ति कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, सच्ची भक्ति और दिव्यता के आगे वह झुक ही जाता है।

 मंदिर का रहस्य और चमत्कार

इस दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर से जुड़े कई चमत्कारिक अनुभव भक्तों द्वारा बताए जाते हैं। कहा जाता है कि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ शीघ्र पूर्ण होती हैं, विशेषकर जब वे सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं। यहाँ शनिवार और मंगलवार को विशेष भीड़ होती है तिल का तेल और सिंदूर चढ़ाने की परंपरा है। तंत्र बाधा और नज़र दोष से मुक्ति के लिए विशेष पूजा की जाती है।कई लोगों का यह भी मानना है कि इस मंदिर के आसपास एक अद्भुत ऊर्जा का अनुभव होता है, जो मन को शांति और आत्मविश्वास से भर देती है।

 तंत्र और साधना से संबंध

दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर का संबंध तंत्र साधना से भी गहरा माना जाता है। यहाँ साधक विशेष मंत्रों का जाप और अनुष्ठान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहाँ की ऊर्जा साधना को शीघ्र फल देती है। हनुमान जी को “अष्ट सिद्धि” और “नव निधि” के दाता कहा जाता है, और दक्षिणमुखी रूप में वे विशेष रूप से तांत्रिक शक्तियों के स्वामी माने जाते हैं। इसलिए कई साधक यहाँ आकर अपनी साधना पूर्ण करते हैं।

 भक्तों के अनुभव

भक्तों का कहना है कि इस मंदिर में आने से उन्हें मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। कई लोगों ने अपने जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन का अनुभव भी साझा किया है—जैसे कि अचानक समस्याओं का समाधान, भय का समाप्त होना और जीवन में स्थिरता आना। इस मंदिर की कथा हमें एक गहरा संदेश देती है कि चाहे कोई कितना भी ज्ञानी या शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः उसे ईश्वर के सामने झुकना ही पड़ता है। रावण जैसे महान विद्वान का हनुमान जी के सामने सिर झुकाना यह दर्शाता है कि सच्ची शक्ति अहंकार में नहीं, बल्कि भक्ति और विनम्रता में होती है।

 निष्कर्ष

दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और रहस्य का संगम है। यहाँ की कथा, जिसमें रावण जैसे शक्तिशाली राजा का भी समर्पण दिखाई देता है, हमें यह सिखाती है कि ईश्वर की महिमा सबसे ऊपर है। यदि आप जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा, भय या नकारात्मक ऊर्जा से जूझ रहे हैं, तो इस प्रकार के मंदिर में जाकर सच्चे मन से प्रार्थना करना आपके लिए एक नया मार्ग खोल सकता है।

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