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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > रक्षाबंधन स्पेशल: क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि राखी में कितनी गांठें लगाई जाती हैं?
व्रत और त्योहार

रक्षाबंधन स्पेशल: क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि राखी में कितनी गांठें लगाई जाती हैं?

राखी की हर गांठ में छिपा होता है एक वचन, एक आशीर्वाद और एक रक्षा-संकल्प!

दिव्यसुधा
Last updated: August 5, 2025 6:52 pm
दिव्यसुधा
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हर गांठ में बंधा है एक आशीर्वाद – लंबी उम्र, सच्चा प्रेम और अटूट रक्षा का वादा!
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Highlights
  • राखी बांधते समय गांठों का भी होता है विशेष महत्व
  • हर गांठ में छिपा होता है प्रेम, आशीर्वाद और जिम्मेदारी
  • कुछ परंपराओं में पांच गांठें भी बांधी जाती हैं – पंचतत्व के प्रतीक

इस साल राखी यानी रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त 2025, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधती हैं और ईश्वर से उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राखी बांधते समय उसमें कितनी गांठ लगाई जा रही है इसका भी विशेष महत्व होता है। चलिए आपको बताते हैं राखी बांधते समय कितने गांठ बांधनी जरूरी होती है।

राखी बांधते समय कितनी गांठ लगानी चाहिए?
सामान्यतः राखी बांधते समय तीन गांठें बांधने की सलाह दी जाती है। जिसमें पहली गांठ इस संकल्प के साथ बांधी जाती है कि भाई को लंबी उम्र, सुरक्षा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो। दूसरी गांठ भाई-बहन के रिश्ते में अटूट प्रेम, विश्वास और सम्मान की भावना को दर्शाती है तो वहीं तीसरी गांठ भाई को उसके कर्तव्यों की याद दिलाती है कि वह अपने जीवन में हमेशा धर्म, सत्य और मर्यादा के मार्ग पर चलें और हर परिस्थिति में अपनी बहन की रक्षा करे।

राखी में गांठें बांधते समय बहन शांत रहकर अपने भाई को रक्षा, प्रेम और सद्बुद्धि का आशीर्वाद देती है। कहते हैं इस तरह से राखी बांधने से भाई से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। वहीं कुछ जगहों पर भाइयों को राखी बांधने समय उसमें पांच गांठें लगाई जाती हैं जो पंचतत्व और पांच देवताओं को समर्पित होती हैं। बहनों को गांठ बांधते समय ‘ॐ रक्षं च रक्षाय’ मंत्र का मन ही मन जाप जरूर करना चाहिए। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि राखी में गांठें धीरे-धीरे और पूरी श्रद्धा के साथ लगाएं जिससे ईश्वर की कृपा आपके भाई पर सदैव बनी रहे।

रक्षाबंधन के कुछ विशेष मंत्र
बहनें भाई को राखी बांधते समय नीचे दिए गए रक्षा मंत्रों में से कोई भी एक मंत्र मन ही मन पढ़ सकती हैं।

“ॐ येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
“रक्षासूत्रं शुभं दत्तं भुक्तिमुक्तिफलप्रदं। चीरयित्वा पवित्रेण बद्धं चास्तु सुते रणे॥”
“चिरंजीवी भव। आयुष्मान् भव। विजयी भव। सर्वसंपदां प्राप्तिर्भवतु।”

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