विश्वमांगल्य सभा के धर्म, संस्कृति एवं शिक्षा विभाग के तत्वावधान में एक विशिष्ट नौ दिवसीय स्तोत्र प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन जानकीपुरम गार्डन स्थित चमत्कारेश्वर शिव मंदिर में किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण वर्ग में प्रतिभागियों को देवी महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का उच्चारण, अर्थ, भावार्थ और महत्त्व समझाया गया। यह स्तोत्र शक्ति की उपासना का अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है, जो श्रद्धालुओं को माँ दुर्गा की शक्ति और सौंदर्य का बोध कराता है।
धर्म संस्कृति शिक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर ऐसे स्तोत्र प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन अवध प्रांत सहित देश के विभिन्न हिस्सों में किया जाता रहा है। इससे पूर्व भवानी अष्टकम, राम रक्षा स्तोत्र, राष्ट्र शिवार्चन, शिवलिंगाष्टकम जैसे अनेक स्तोत्रों का प्रशिक्षण भी सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इन आयोजनों का मूल उद्देश्य लोगों को पुनः अपने धर्मग्रंथों, वेदों, उपनिषदों और पुराणों से जोड़ना तथा उनमें संस्कृत के प्रति रुचि उत्पन्न करना है।
वर्तमान समय में जब पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, तब धर्म संस्कृति शिक्षा विभाग की यह पहल अत्यंत सराहनीय है। यह न केवल हमारी सांस्कृतिक जड़ों को सशक्त करती है, बल्कि आत्मिक चेतना का जागरण भी करती है। संस्कृत भाषा को लेकर लोगों के मन में जो भय और जटिलता की भावना बनी हुई थी, उसे छोटे-छोटे स्तोत्रों के माध्यम से तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यही कारण है कि प्रशिक्षण वर्गों में भाग लेने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का चयन विशेष रूप से नवरात्रि पर्व को ध्यान में रखते हुए किया गया। यह स्तोत्र माँ दुर्गा की विभिन्न लीलाओं और उनकी महिमा का वर्णन करता है, जिसमें माँ द्वारा महिषासुर नामक असुर का वध किए जाने की कथा निहित है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को स्तोत्र के शुद्ध उच्चारण के साथ-साथ उसके भावार्थ को भी समझाया गया, जिससे वे केवल पाठ तक सीमित न रहकर उसके आध्यात्मिक और व्यावहारिक पक्ष को भी आत्मसात कर सकें।
इस आयोजन की एक और विशेष बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। पहले जहाँ महिलाएं अपने पूजन कार्य को केवल चालीसा पाठ या आरती तक सीमित रखती थीं, वहीं अब वे विधिवत स्तोत्र पठन और कर्मकांडों को भी अपने पूजन में शामिल कर रही हैं। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की भावना भी बढ़ी है। संस्कृत भाषा में प्रवीणता प्राप्त करने की दिशा में यह एक प्रेरणादायी कदम साबित हुआ है।
प्रशिक्षण वर्ग के अंत में एक सामूहिक पाठ का आयोजन किया गया जिसमें सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ किया। यह दृश्य अत्यंत भावप्रद और प्रेरणास्पद था। प्रशिक्षण के सफल संचालन में स्थानीय कार्यकर्ताओं, मंदिर समिति और प्रशिक्षकों का सराहनीय योगदान रहा।
धर्म संस्कृति शिक्षा विभाग की यह मुहिम न केवल लोगों को धार्मिक ग्रंथों के प्रति जागरूक बना रही है, बल्कि संस्कृत भाषा को जनमानस में पुनः प्रतिष्ठित करने का कार्य भी कर रही है। भविष्य में भी ऐसे आयोजन लगातार होते रहें, जिससे समाज में सांस्कृतिक चेतना का प्रसार हो और भारत की सनातन परंपरा का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।