मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली अत्यंत पावन तिथि है। इस दिन व्रत, पूजा और भगवान विष्णु की उपासना से न केवल जीवन में संचित पाप नष्ट होते हैं, बल्कि मन और आत्मा भी शुद्ध होती है। माना जाता है कि पीला रंग इस तिथि पर सबसे शुभ माना गया है क्योंकि यही रंग भगवान विष्णु का प्रिय है। पीला रंग ज्ञान, पवित्रता और सौभाग्य का प्रतीक है तथा इसे अर्पित करने से भगवान विष्णु विशेष कृपा प्रदान करते हैं। भक्त इस दिन पीली वस्तुओं को पूजा में शामिल करके अपने जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।
विष्णु आराधना में पीले रंग का पौराणिक महत्व
एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। भक्ति भाव से व्रत करने पर मन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में शांति का संचार होता है। मोक्षदा एकादशी के अवसर पर पीली वस्तुओं का उपयोग इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि यह रंग भगवान विष्णु की ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त पीले पुष्प, पीला चंदन, पीला वस्त्र, हल्दी, पीले प्रसाद और पीले फलों का अर्पण करते हैं जिससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।
पीले फूल सौभाग्य और शुद्धता का प्रतीक
भगवान विष्णु की पूजा में पीले फूलों का उपयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। गेंदा, कनेर या अमलतास जैसे फूल वातावरण को पवित्र बनाते हैं और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। यह फूल समृद्धि, सौभाग्य और ऊर्जामय जीवन का प्रतीक माने जाते हैं। भक्त जब पीले फूल अर्पित करते हैं तो माना जाता है कि विष्णु जी का आशीर्वाद जीवन में स्थिरता और सफलता प्रदान करता है।
पीला चंदन शांति और आध्यात्मिक निर्मलता का स्पर्श
पीले चंदन को भगवान विष्णु अत्यंत प्रिय मानते हैं। इसे पूजा में अर्पित करने से मन शांत, संयमित और निर्मल होता है। इसकी शीतलता मानसिक तनाव और बेचैनी को दूर करती है। परंपरा है कि पीला चंदन अर्पित करने पर भगवान घर-परिवार में सुख और शांति का आशीर्वाद देते हैं। पीले चंदन का तिलक भक्त की चेतना को दिव्य ऊर्जा से भर देता है।
पीला वस्त्र विष्णु प्रिय पीतांबर का प्रतीक
भगवान विष्णु को पीतांबरधारी कहा गया है इसलिए उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा में पीला कपड़ा चढ़ाने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता और उन्नति आती है। भक्त यदि भगवान को पीला अंगवस्त्र पहनाते हैं तो यह और भी अधिक शुभ माना जाता है। पीला वस्त्र आध्यात्मिक प्रकाश, सौभाग्य और सकारात्मकता का प्रतीक है।
हल्दी पवित्रता, शुभ ऊर्जा और रोग नाशिनी शक्ति
हल्दी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। हल्दी और हल्दी की गांठ अर्पित करने से रोग-शोक दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली का संचार होता है। हल्दी की गांठ सौभाग्य और वैभव का प्रतीक है तथा इसे अर्पित करने पर आर्थिक स्थिरता बढ़ती है। ऐसा भी माना जाता है कि हल्दी की गांठ ग्रहदोषों का शमन करती है और जीवन की बाधाओं को दूर करती है।
पीला प्रसाद मिठास, सौभाग्य और मनोकामना पूर्ति का प्रतीक
पीली बूंदी, पंजीरी और केसर वाली खीर भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। इस प्रकार का पीला प्रसाद चढ़ाने से भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में मिठास बढ़ती है। पीला प्रसाद समृद्धि, सकारात्मकता और शुभ फल की ऊर्जा को बढ़ाता है। यह प्रसाद भक्त के जीवन में नए अवसरों और सौभाग्य के द्वार खोलता है।
पीले फल समृद्धि, संतोष और शुभता का आह्वान
मोक्षदा एकादशी के दिन पीले फलों का अर्पण अत्यंत शुभ माना जाता है। केले को विष्णु प्रिय फल माना गया है और इसे अर्पित करने से घर में सुख, संतोष और समृद्धि आती है। पीले फल जीवन में सौभाग्य, स्वास्थ्य और खुशी का संचार करते हैं। यह अर्पण परिवार में स्थिरता और संतोष को बढ़ाता है।