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दिव्य सुधा > अन्य > मौनी अमावस्या 2026: हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
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मौनी अमावस्या 2026: हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

दिव्यसुधा
Last updated: January 18, 2026 1:25 pm
दिव्यसुधा
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मौनी अमावस्या पर हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज में गंगा स्नान करते श्रद्धालुओं की भीड़
मौनी अमावस्या पर हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत दृश्य
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मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर देश की प्रमुख धार्मिक नगरी हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज में आस्था का भव्य संगम देखने को मिला। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद सुबह तड़के से ही लाखों श्रद्धालु गंगा और संगम के पवित्र घाटों पर पहुंचे और विधि-विधान से स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

हरिद्वार: हर की पौड़ी पर श्रद्धा और परंपरा का संगम

हरिद्वार में गंगा की पवित्र धारा में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान, पूजा-पाठ, तर्पण और दान कर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रशासन द्वारा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और निगरानी के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे स्नान प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई। एक श्रद्धालु ने बताया कि वह हर वर्ष मौनी अमावस्या पर हरिद्वार आते हैं। यह दिन उनके परिवार और पूर्वजों के लिए विशेष महत्व रखता है और परंपरागत रूप से मनाया जाता है।

वाराणसी: गंगा घाटों पर भक्ति और मौन व्रत

काशी नगरी में भी मौनी अमावस्या पर श्रद्धा का महासागर उमड़ पड़ा। दशाश्वमेध घाट सहित विभिन्न गंगा घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने मौन व्रत रखते हुए गंगा स्नान, व्रत, दान, पूजा और प्रार्थना की। महिलाएं, पुरुषों के साथ बच्चे भी पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए। तीर्थ पुरोहित विवेकानंद ने बताया कि माघ मास के कृष्ण पक्ष की मौनी अमावस्या पर भक्त गंगा स्नान कर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण करते हैं और उनकी शांति एवं कल्याण की कामना करते हैं। इस दिन मौन व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है।

प्रयागराज: माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान

प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान संपन्न हुआ। संगम घाट पर तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। घने कोहरे और ठंड के बीच श्रद्धालु पवित्र संगम में डुबकी लगाकर धर्म, आस्था और अध्यात्म से जुड़ते नजर आए। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार, मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर 33 करोड़ देवी-देवता संगम में स्नान करते हैं। इस दिन स्नान के साथ मौन व्रत रखने से विशेष आध्यात्मिक फल की प्राप्ति होती है।

सुरक्षा और व्यवस्थाएं रहीं चाक-चौबंद

प्रयागराज में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमें, सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी रखी गई। डिविजनल कमिश्नर सौम्या अग्रवाल के अनुसार, शनिवार शाम से अब तक लगभग 50 लाख श्रद्धालुओं ने विभिन्न घाटों पर पवित्र स्नान किया। डीएम मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि मौनी अमावस्या का मुख्य स्नान आधी रात से ही प्रारंभ हो गया था और छह घंटे से अधिक समय तक बिना किसी बाधा के चलता रहा। श्रद्धालुओं ने माघ मेले की व्यवस्थाओं की सराहना की और प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

आस्था, परंपरा और अध्यात्म का अनुपम दृश्य

मौनी अमावस्या पर हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि सनातन परंपराएं आज भी जनमानस की आस्था का केंद्र हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान का अवसर है, बल्कि आत्मशुद्धि, मौन, साधना और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी पावन समय है।

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