अब तक माघ मेले में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा है। 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम की पावन धाराओं में आस्था की डुबकी लगाने, संतों के सान्निध्य में ज्ञान प्राप्त करने और दिव्य वातावरण का अनुभव करने पहुंचे। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि स्नान के साथ इस भव्य आयोजन का समापन भले ही होने जा रहा है, लेकिन इस अलौकिक अनुभव की स्मृतियां श्रद्धालुओं के हृदय में सदा जीवित रहेंगी।
जो घाट कभी श्रद्धालुओं की भीड़ से गूंजते थे, वे अब अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रहे हैं, लेकिन संगम की लहरों में आज भी आरती की मधुर ध्वनि मानो गूंज रही है। भीड़ कम जरूर हुई है, पर उन पावन क्षणों की अनुभूति, संतों के अमृतवचन और आध्यात्मिक ऊर्जा हर आगंतुक के मन में गहराई से अंकित हो चुकी है।
माघ मेले का सफल और सुव्यवस्थित आयोजन प्रशासन, पुलिस बल और विशेष रूप से स्वच्छता कर्मियों की अथक मेहनत का प्रमाण है, जिन्होंने दिन-रात सेवा कर मेले की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखी। मेला प्रशासन ने इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की है। मेले के समापन के बाद भी क्षेत्र की स्वच्छता बनाए रखने के लिए लगातार सफाई अभियान जारी हैं।
जैसे-जैसे माघ मेला अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, तंबू हटाए जा रहे हैं और क्षेत्र में शांति का वातावरण लौट रहा है। इसके बावजूद श्रद्धालु अब भी संगम में पवित्र स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु आशुतोष द्विवेदी कहते हैं, “मेला समाप्त हो रहा है, लेकिन इसका संदेश हमारे साथ बना रहेगा। हमें अपनी नदियों और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना चाहिए।”
इधर, 15 फरवरी को होने वाले अंतिम महाशिवरात्रि स्नान को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन की तैयारी कर रहा है। यह विशाल जनसमूह जहां सनातन धर्म के विस्तार और आस्था की शक्ति को दर्शाता है, वहीं प्रशासन और मेला पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती भी रहा है। उल्लेखनीय है कि मेले से पहले प्रशासन ने 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया था, जो वास्तविक आंकड़ों से कहीं कम साबित हुआ।
भारतीय रेलवे ने इस वर्ष नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए माघ मेले के दौरान 670 से अधिक विशेष ट्रेनें चलाईं, जिससे श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम बनी। वहीं उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने 14 से 23 जनवरी के बीच 7,600 बसों का संचालन किया, जिनसे 20 लाख से अधिक यात्रियों ने सुरक्षित यात्रा की।
सासाराम से आई श्रद्धालु भाव्या ने कहा, “देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं का यह महासागर देखकर हम स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं। मैं अपने पड़ोसियों के साथ गंगा तट पर अनुष्ठान करने आई हूं।” वहीं दिल्ली निवासी इंदु ने बताया, “अचला सप्तमी पर संगम में स्नान का अवसर मिलना हमारे परिवार के लिए सौभाग्य की बात है।”
पिछले एक महीने में प्रतिदिन 10 लाख से अधिक श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान कर चुके हैं। विशेष रूप से पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी के चार प्रमुख स्नानों पर ही लगभग 10 करोड़ स्नान संगम में संपन्न हुए। माघ मेला भले ही अपने समापन की ओर हो, लेकिन इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा, आस्था का संदेश और सनातन संस्कृति की गूंज लंबे समय तक जनमानस में बनी रहेगी।