प्रयागराज का माघ मेला सनातन परंपरा का वह पावन पर्व है, जहां आस्था, साधना और तपस्या का अनंत संगम दिखाई देता है। आने वाले वर्ष 2026 के माघ मेला की तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं और इस बार भी परंपरा के अनुसार भूमि आवंटन का शुभारंभ गंगा पूजन के बाद किया जाएगा। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि तपस्वियों और संत समाज के प्रति सम्मान का वह संकल्प है जो सदियों से निभाया जा रहा है।
गंगा पूजन के पश्चात दंडी स्वामियों को भूमि आवंटन
संगम तट पर दो दिसंबर को गंगा पूजन के बाद सबसे पहले दंडी स्वामी नगर एवं दंडी बाड़ा को भूमि आवंटित की जाएगी। दंडी संन्यासी परंपरा को सनातन धर्म में अत्यंत उच्च स्थान प्राप्त है, क्योंकि ये साधक आत्मसंयम, तप और ज्ञान के मार्ग के प्रतीक माने जाते हैं। गंगा पूजन द्वारा यह व्यवस्था और भी पवित्र हो जाती है, क्योंकि गंगा मैया की साक्षी में संतों के लिए स्थान निर्धारित करना एक आध्यात्मिक दायित्व है। इसके बाद क्रमशः आचार्य स्वामी नगर, आचार्य बाड़ा और खाक चौक के साधु-संतों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया दर्शाती है कि माघ मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संत परंपरा को केंद्र में रखकर चलने वाला आध्यात्मिक महाकुंभ है।
आध्यात्मिक साधकों के लिए पवित्र भूमि का विशेष महत्व
हर वर्ष लाखों साधु, महात्मा, अखाड़े और तपस्वी माघ मेला में पहुंचकर संगम तट पर अपने शिविर स्थापित करते हैं। यहां की पवित्र भूमि साधना का केंद्र बन जाती है, क्योंकि संगम – गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती—इन तीनों पवित्र नदियों का मिलन स्थल है जिसे हिंदू धर्म में मोक्षदायी माना गया है। साधु-संतों के शिविरों में सत्संग, ध्यान, योग, गीता-वेदांत चर्चा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का वातावरण बनता है। यही कारण है कि भूमि आवंटन को माघ मेला का सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण माना जाता है।
श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार
माघ मेला केवल साधकों का ही उत्सव नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं का आध्यात्मिक पर्व भी है। 2026 के मेला में अनुमान है कि लगभग 12 करोड़ से अधिक भक्त गंगा-स्नान के लिए संगम तट पर पहुंचेंगे। उनकी सुविधा और सुगम यात्रा के लिए इस बार विशेष परिवहन साधन, शटल बसें और अस्थायी बस स्टैंड बनाए जा रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को कम दूरी चलकर भी संगम स्नान का अवसर मिल सके। सरकार और मेला प्रशासन का यह प्रयास बताता है कि आस्था के इस महान संगम में कोई भी भक्त कठिनाई के कारण पीछे न रह जाए।
संगम क्षेत्र में होगा आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन
माघ मेला केवल स्नान और शिविरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अनेक आध्यात्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। ध्यान-सत्र, गंगा आरती, संत प्रवचन, वैदिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक यात्राओं के माध्यम से लाखों लोग आत्मिक शांति प्राप्त करते हैं। साथ ही, काशी-तमिल संगमम जैसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम भी भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। विभिन्न तीर्थों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्वागत, सत्कार और आध्यात्मिक गाइडेंस की विशेष व्यवस्था की जा रही है।
माघ मेला: सनातन संस्कृति का जीवंत रूप
माघ मेला 2026 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और भारतीय अध्यात्म का जीवंत उत्सव है। यहां गंगा स्नान, साधु-संतों की उपस्थिति, मंत्रोच्चार, आरती और श्रद्धा का वातावरण प्रत्येक आगंतुक के भीतर दिव्य ऊर्जा का संचार करता है। माघ मेला हमें याद दिलाता है कि सनातन परंपरा केवल ग्रंथों में नहीं, बल्कि ऐसे जीवंत उत्सवों में दिखाई देती है जहाँ साधना, भक्ति और सेवा एक साथ प्रवाहित होती हैं।