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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > ऋषिकेश में स्थित है भगवान शिव का चमत्कारी नीलकंठ महादेव मंदिर, जहां पूरी होती हैं हर मनोकामना
मंदिर

ऋषिकेश में स्थित है भगवान शिव का चमत्कारी नीलकंठ महादेव मंदिर, जहां पूरी होती हैं हर मनोकामना

दिव्यसुधा
Last updated: November 2, 2025 12:18 pm
दिव्यसुधा
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ऋषिकेश में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर का भव्य दृश्य, जहां भगवान शिव ने समुद्र मंथन का विष पान किया था
ऋषिकेश का नीलकंठ महादेव मंदिर – भगवान शिव के विषपान स्थल का दिव्य दर्शन
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उत्तराखंड का ऋषिकेश शहर देवभूमि कहलाता है। इसी पावन भूमि पर हिमालय की गोद में स्थित है नीलकंठ महादेव मंदिर, जो भगवान शिव के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान किया था। विषपान के कारण उनका कंठ नीला हो गया, और तभी से वे नीलकंठ कहलाए। यही पवित्र स्थल आज श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

नीलकंठ महादेव मंदिर का धार्मिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवता और दानवों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया, तब सबसे पहले कालकूट नामक विष निकला। उस विष की ज्वाला से तीनों लोक जलने लगे। सभी देवता भयभीत होकर भगवान शिव की शरण में पहुंचे। तब भगवान शंकर ने संसार की रक्षा के लिए वह विष स्वयं पान कर लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया, और उसी स्थान पर यह मंदिर स्थापित हुआ।

यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, तपस्या और शक्ति का प्रतीक है। यहां दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और शत्रु भय दूर हो जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

मंदिर का स्थान और प्राकृतिक सौंदर्य

नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश से लगभग 32 किलोमीटर की दूरी पर, समुद्र तल से करीब 1330 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह मंदिर चारों ओर से घने जंगलों, पर्वतों और झरनों से घिरा हुआ है। यहां का वातावरण दिव्य शांति का अनुभव कराता है। मंदिर परिसर में वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, विशेष रूप से श्रावण मास, महाशिवरात्रि और कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों भक्त यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।

विशेष पूजन और आस्था

सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन नीलकंठ महादेव मंदिर में विशेष रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया जाता है। भक्त दूध, जल, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाकर भगवान शंकर को प्रसन्न करते हैं। कहा जाता है कि जो व्यक्ति सोमवार के व्रत के साथ इस मंदिर के दर्शन करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। नीलकंठ महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक धाम नहीं, बल्कि शक्ति, श्रद्धा और भक्ति का संगम है। यह स्थल इस बात का प्रतीक है कि जब भी सृष्टि संकट में होती है, भगवान शिव अपने भक्तों की रक्षा के लिए विष भी पीने से पीछे नहीं हटते।

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