हमारे भारतीय समाज में उपहार देने की परंपरा बहुत पुरानी और भावनाओं से जुड़ी हुई है। चाहे तीज-त्योहार हों, जन्मदिन या किसी की उपलब्धि – अपने प्रियजनों को कुछ भेंट करना शुभ और मंगलकारी माना जाता है। लेकिन धर्म और वास्तु शास्त्र में कुछ वस्तुएं ऐसी बताई गई हैं जिन्हें कभी उपहार में नहीं देना चाहिए, क्योंकि इनसे नकारात्मक ऊर्जा, अशुभता या रिश्तों में दरार आ सकती है।
धार्मिक दृष्टि से उपहार का महत्व
हिंदू धर्म में उपहार देना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि शुभकामना का प्रतीक है। माना जाता है कि जब हम किसी को उपहार देते हैं, तो उसके साथ अपनी सकारात्मक ऊर्जा और मंगलभाव भी बांटते हैं। यही कारण है कि शुभ अवसरों पर लोग अपने निकटजनों को गिफ्ट देते हैं। लेकिन हर वस्तु उपहार में देना शुभ नहीं होता।
चमड़े और हड्डियों से बनी वस्तुएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी को भी चमड़े या किसी जानवर की हड्डी से बनी वस्तु उपहार में नहीं देनी चाहिए। ऐसी वस्तुएं पवित्रता का प्रतीक नहीं मानी जातीं और घर में नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं।
ईश्वर की मूर्तियां या शिवलिंग उपहार में देने से बचें
वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी को भगवान की मूर्ति, शिवलिंग या धार्मिक चित्र उपहार में देना अशुभ माना जाता है। अगर वह व्यक्ति उन मूर्तियों की विधिवत पूजा नहीं करता या उनकी उचित देखभाल नहीं कर पाता, तो उसका दोष देने वाले पर भी आ सकता है। इसलिए ऐसे उपहार देने से परहेज करें।
कांटेदार पौधे और मनी प्लांट से दूरी रखें
वास्तु शास्त्र में कांटेदार पौधों को नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना गया है। इन्हें उपहार में देना संबंधों में तनाव और कलह का कारण बन सकता है। वहीं, मनी प्लांट उपहार में देना भी अशुभ माना गया है क्योंकि यह प्रतीकात्मक रूप से आपके सौभाग्य और धन को दूसरे को सौंपने जैसा होता है।
धारदार वस्तुएं जैसे चाकू, कैंची या सुई न दें
चाकू, कैंची या सुई जैसी धारदार वस्तुएं कभी उपहार में नहीं देनी चाहिएं। मान्यता है कि ये वस्तुएं रिश्तों को काटने का संकेत देती हैं और भविष्य में मतभेद या दूरी बढ़ा सकती हैं।
काले रंग की वस्तुओं से परहेज करें
काला रंग वास्तु के अनुसार नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। इसलिए काले कपड़े, जूते या छाते जैसे उपहार नहीं देने चाहिएं। ये वस्तुएं जीवन में बाधाएं और मानसिक तनाव बढ़ा सकती हैं।
गणेश-लक्ष्मी अंकित सिक्के या वस्तुएं न दें
हिंदू मान्यता के अनुसार, जिस वस्तु पर भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की आकृति बनी हो, उसे उपहार में नहीं देना चाहिए। ऐसा करना अपने घर की श्री और शुभ-लाभ ऊर्जा को दूसरों को सौंपने जैसा माना जाता है।
परफ्यूम और घड़ी से बचें
परफ्यूम को उपहार में देना रिश्तों में दूरी लाने वाला माना गया है। वहीं, घड़ी देने से व्यक्ति का ‘अच्छा समय’ दूसरे को देने का संकेत मिलता है। इसलिए इन वस्तुओं को उपहार के रूप में देने से परहेज करना चाहिए।
महाभारत या भयभीत करने वाले चित्र न दें
कभी किसी को महाभारत या युद्ध से जुड़े चित्र, या डर पैदा करने वाली कलाकृतियां उपहार में नहीं देनी चाहिएं। ऐसी चीजें घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती हैं और मानसिक अशांति का कारण बन सकती हैं।
जल तत्व से जुड़ी वस्तुएं देने से बचें
वास्तु के अनुसार, पानी से जुड़े उपहार जैसे एक्वेरियम, झरना, या पानी के पात्र देने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। यह व्यक्ति के धन प्रवाह में रुकावट का कारण बनते हैं।
उपहार देना एक पवित्र भावना है, लेकिन इसके पीछे की ऊर्जा को समझना भी जरूरी है। सही वस्तु का चयन न केवल आपके रिश्तों को मजबूत बनाता है, बल्कि सकारात्मकता और समृद्धि भी लाता है। वहीं, गलत वस्तु अनजाने में नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकती है। इसलिए अगली बार जब भी किसी को उपहार दें, इन धार्मिक और वास्तु सिद्धांतों का ध्यान जरूर रखें — तभी आपका उपहार सच में शुभफलदायी सिद्ध होगा।