राजस्थान के सीकर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में वार्षिक फाल्गुनी लक्खी मेला 21 फरवरी से शुरू हो चुका है। यह भव्य मेला 28 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा और आठ दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक उत्सव में लगभग 35 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्याम भक्त इस पावन अवसर पर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक श्रद्धालुओं का सैलाब खाटू नगरी की ओर उमड़ पड़ा है।
मंदिर समिति के अनुसार, विशेष सेवा-पूजा और तिलक के बाद बाबा श्याम के दरबार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। मेले की अवधि में दर्शन की व्यापक और सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई है। VIP दर्शन पूरी तरह बंद रखे गए हैं, ताकि सभी भक्तों को समान अवसर मिल सके। मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण के लिए 14 कतारें बनाई गई हैं, जिनसे होकर श्रद्धालु दर्शन कर पाएंगे। पैदल आने वाले भक्तों के लिए सीकर से अलग कॉरिडोर तैयार किया गया है, जिससे व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चल सकें।
लक्खी मेले की मान्यता और पौराणिक कथा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाबा खाटूश्याम का वास्तविक नाम बर्बरीक था, जो घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र थे। उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि वे महाभारत युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। उनकी प्रतिज्ञा और अपार शक्ति को देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने साधु का वेश धारण कर उनसे गुरुदक्षिणा में उनका शीश मांग लिया। बर्बरीक ने बिना संकोच अपना शीश अर्पित कर दिया। उनकी भक्ति और त्याग से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे “श्याम” नाम से पूजे जाएंगे और हारे हुए का सहारा बनेंगे। इसी कारण उन्हें “हारे का सहारा” कहा जाता है।
फाल्गुन माह में यह मेला इसलिए आयोजित किया जाता है क्योंकि इसी मास में बर्बरीक ने अपना शीश दान किया था। मान्यता है कि इस महीने में बाबा के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विशेष कृपा प्राप्त होती है।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएं
मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए लगभग 5000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। जगह-जगह CCTV कैमरे लगाए गए हैं और चिकित्सा शिविर, पेयजल, विश्राम स्थल तथा सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। प्रशासन ने कुछ आवश्यक दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। मेले में DJ बजाने पर प्रतिबंध है, ताकि मंदिर परिसर की पवित्रता और शांति बनी रहे। साथ ही इत्र और कांटेदार गुलाब के फूल ले जाने पर भी रोक लगाई गई है।
यात्रा की सुविधा
खाटूश्यामजी धाम पहुंचने के लिए सड़क, रेल और हवाई मार्ग उपलब्ध हैं। हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालु पहले जयपुर पहुंच सकते हैं, जहां से टैक्सी या बस द्वारा सीकर और फिर खाटू पहुंचा जा सकता है। रेल से आने वाले भक्त रिंगास जंक्शन स्टेशन पर उतरें, जो मंदिर के सबसे निकट है। वहां से टैक्सी और बस की सुविधा आसानी से मिल जाती है।
लक्खी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, त्याग और समर्पण का जीवंत उत्सव है। 21 फरवरी से आरंभ हो चुका यह महापर्व श्रद्धालुओं के लिए भक्ति में डूबने और बाबा श्याम की कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर लेकर आया है। जय श्री श्याम!