ज्योतिष शास्त्र में केतु का नक्षत्र परिवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। केतु को छाया ग्रह और कर्मफल दाता के रूप में जाना जाता है, जिसका गहरा संबंध अध्यात्म, वैराग्य और मोक्ष से होता है। जब भी केतु राशि या नक्षत्र परिवर्तन करते हैं, तो उसका प्रभाव व्यक्तिगत जीवन से लेकर व्यापक स्तर तक देखा जाता है। पंचांग के अनुसार 23 अप्रैल, सोमवार को शाम 4 बजकर 49 मिनट पर केतु मघा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। विशेष बात यह है कि मघा नक्षत्र के स्वामी स्वयं केतु माने जाते हैं, जिससे यह गोचर अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली बन जाता है।
मघा नक्षत्र पितरों, परंपराओं और सम्मान का प्रतीक है। इस नक्षत्र में केतु का प्रवेश पूर्व जन्म के कर्मों को सक्रिय कर सकता है और जीवन में अचानक बदलाव ला सकता है। यह समय आत्ममंथन, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की दिशा को समझने के लिए विशेष माना जा रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार इस परिवर्तन का सकारात्मक प्रभाव कुछ राशियों पर विशेष रूप से देखने को मिलेगा।
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय प्रगति और स्थिरता लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके हुए कार्य पूरे होने लगेंगे। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या बेहतर पद मिल सकता है। व्यापारियों को नए क्लाइंट्स और लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। मानसिक शांति बढ़ेगी और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
कर्क राशि
कर्क राशि के लिए यह गोचर भाग्य को मजबूत करने वाला सिद्ध हो सकता है। अचानक मिले अवसर जीवन में नई दिशा दे सकते हैं। नौकरी में परिवर्तन या पदोन्नति के योग बन रहे हैं। व्यापार में बड़ा लाभ संभव है। आर्थिक स्थिति सुधरेगी और पुराने कर्ज से राहत मिल सकती है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और रिश्तों में मधुरता आएगी। मानसिक रूप से सकारात्मकता और संतुलन महसूस होगा।
सिंह राशि
सिंह राशि वालों के लिए यह समय सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी पहचान मजबूत होगी और वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। पुराने निवेश से लाभ मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। यात्रा के योग बन सकते हैं, जो लाभकारी सिद्ध होंगे। नई जिम्मेदारियां मिलेंगी और भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार होगा। आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी।
कुल मिलाकर, केतु का मघा नक्षत्र में प्रवेश आध्यात्मिक जागरण और कर्मों के फल का समय है। सकारात्मक सोच और सत्कर्म इस अवधि को और भी शुभ बना सकते हैं।