वर्ष 2026 में केदारनाथ धाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक बड़ी और भावनात्मक खुशखबरी है। वर्ष 2013 की भीषण प्राकृतिक आपदा में ध्वस्त हुआ बाबा केदारनाथ तक पहुंचने वाला पारंपरिक पैदल मार्ग अब एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। यह वही ऐतिहासिक रास्ता है, जिससे होकर वर्षों तक भक्त कठिन तपस्या और अटूट श्रद्धा के साथ बाबा के धाम तक पंहुचा करते थे। इस मार्ग के पुनः शुरू होने से श्रद्धालुओं को न केवल सुविधा मिलेगी, बल्कि वे उस परंपरागत यात्रा का अनुभव भी कर सकेंगे, जो केदारनाथ यात्रा की आत्मा मानी जाती है।
लोनिवि और डीडीएमए के प्रयासों से पुनर्जीवित हुआ मार्ग
लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के संयुक्त प्रयासों से केदारनाथ धाम तक के पुराने पैदल मार्ग को पूरी तरह दुरुस्त कर दिया गया है। लंबे समय से बंद पड़े इस मार्ग को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य किया गया। वर्ष 2026 की यात्रा में श्रद्धालुओं के पास अब बाबा के धाम तक पहुंचने के लिए दो पैदल मार्ग उपलब्ध होंगे, जिससे यात्रा व्यवस्था अधिक सुचारु होने की उम्मीद है।
रामबाड़ा से केदारनाथ तक दो मार्गों का विकल्प
इस बार केदारनाथ यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों के पास रामबाड़ा से केदारनाथ तक पहुंचने के लिए दो विकल्प होंगे। लोनिवि-डीडीएमए ने वर्ष 2024 में गरुड़चट्टी से केदारनाथ तक 3.30 किलोमीटर लंबा पैदल मार्ग तैयार किया है। इसके साथ ही वर्ष 2023 और 2024 में दो चरणों में रामबाड़ा से गरुड़चट्टी के बीच 5.35 किलोमीटर का पैदल मार्ग भी विकसित किया गया। वर्तमान में इस मार्ग पर रेलिंग की पेंटिंग और अन्य अंतिम कार्य किए जा रहे हैं। हालांकि, श्रद्धालुओं की आवाजाही किस मार्ग से कराई जाएगी, इसका निर्णय प्रशासन यात्रा शुरू होने के समय लेगा।
पुराने मार्ग से यात्रा: सीमित लेकिन विशेष अवसर
रामबाड़ा से गरुड़चट्टी होते हुए केदारनाथ जाने वाला पुराना पैदल मार्ग घोड़े-खच्चरों की आवाजाही के लिए कठिन बताया जा रहा है। ऐसे में संभावना है कि इस मार्ग का उपयोग मुख्य रूप से पैदल यात्रियों के लिए ही किया जाए। माना जा रहा है कि केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के अवसर पर ही श्रद्धालुओं को इस पारंपरिक मार्ग से गुजरने का अवसर मिल सकेगा, जिससे वे वर्षों पुरानी आस्था की राह पर चल सकेंगे।
15 दिन में तैयार होगा रामबाड़ा पुल
लोनिवि-डीडीएमए के अधिशासी अभियंता राजविन्द सिंह के अनुसार, केदारनाथ यात्रा के लिए रामबाड़ा-गरुड़चट्टी पैदल मार्ग पूरी तरह तैयार है। बर्फबारी का मौसम समाप्त होते ही 15 दिनों के भीतर रामबाड़ा में पुल का निर्माण भी पूरा कर लिया जाएगा। पुल निर्माण के लिए आवश्यक सभी सामग्री पहले ही मौके पर पंहुचा दी गई है, जिससे कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए।
देवदर्शनी: जहां जागती है आस्था
केदारनाथ के पुराने पैदल मार्ग की सबसे बड़ी और पावन विशेषता है देवदर्शनी स्थल। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जैसे ही श्रद्धालु इस स्थान पर पहुँचते हैं, उन्हें बाबा केदारनाथ धाम के साक्षात दर्शन होते हैं। यह दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला होता है। माना जाता है कि देवदर्शनी पहुंचते ही यात्रियों की सारी थकान दूर हो जाती है और मन में एक अलौकिक शांति का अनुभव होता है। यह स्थल केवल एक दृश्य बिंदु नहीं, बल्कि आस्था और आत्मिक अनुभूति का केंद्र है।
दूरी में भी लाभकारी है पुराना मार्ग
आपदा से पहले रामबाड़ा से केदारनाथ धाम की दूरी लगभग सात किलोमीटर थी। आपदा के बाद मार्ग के पुनर्निर्माण में कुछ बैंड डालने पड़े, जिससे यह दूरी बढ़कर 8.65 किलोमीटर हो गई। इसमें रामबाड़ा से गरुड़चट्टी की दूरी 5.35 किलोमीटर और गरुड़चट्टी से केदारनाथ की दूरी 3.30 किलोमीटर शामिल है। इसके बावजूद यह मार्ग नए लिंचौली मार्ग की तुलना में लगभग 1.5 किलोमीटर कम है। वर्तमान में गौरीकुंड से रामबाड़ा-गरुड़चट्टी होते हुए केदारनाथ की कुल दूरी 15.30 किलोमीटर है, जबकि लिंचौली मार्ग से यह दूरी 16.30 किलोमीटर पड़ती है।
आस्था, परंपरा और अनुभूति की यात्रा
वर्ष 2026 की केदारनाथ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और आत्मिक अनुभूति का पुनर्जागरण है। बाबा केदार की यह पुरानी राह एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजने को तैयार है।