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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > Kamda Saptami 2025 : कामदा सप्तमी व्रत, पूजा विधि और महत्व
व्रत और त्योहार

Kamda Saptami 2025 : कामदा सप्तमी व्रत, पूजा विधि और महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: March 5, 2025 11:24 am
दिव्यसुधा
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suryadev
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कामदा सप्तमी का दिन विशेष रूप से सूर्य देव को समर्पित है. ज्योतिष शास्त्र में कामदा सप्तमी व्रत का विशेष महत्व होता है। कामदा सप्तमी व्रत पूर्ण रूप से भगवान सूर्य को समर्पित होता है। प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी यह व्रत किया जाता है और हर चौमासे यानी कि चार माह में व्रत का पारण करना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से स्वास्थ्य, धन, संतान और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। कामदा सप्तमी 6 मार्च को है इस व्रत की महिमा स्वयं ब्रह्मा जी ने अपने श्रीमुख से भगवान विष्णु को बतायी थी. इस व्रत को उन लोगों को करने से विशेष लाभ मिलता है जिन्हें संतान नहीं होती है और जिन्हें धन संबंधी समस्याएं लगातार बनी रहती है. ग्रहों के राजा भगवान सूर्यदेव का आर्शीवाद जीवन में आ रही सभी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है.

व्रत का महत्व :
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति का जीवन उसके जन्म कुण्डली पर निर्भर करता है। जिन व्यक्ति की कुण्डली में सूर्य नीच स्थान पर होता है उनके जीवन में काफी परेशनियों का सामना करना पड़ता है। इस व्रत को करने से ऐसे व्यक्ति को सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है. कामदा सप्तमी व्रत करने से व्यक्ति की कुण्डली में सूर्य बलवान होता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है.

कामदा सप्तमी व्रत विधि :
षष्ठी को एक समय भोजन करके सप्तमी को निराहार रहकर, “खखोल्काय नमः” मन्त्र से सूर्य भगवान की पूजा की जाती है और अष्टमी को तुलसी दल के समान अर्क के पत्तो का सेवन किया जाता है। प्रातः स्नानादि के बाद सूर्य भगवान की पूजा की जाती है सारा दिन “सूर्याय नमः” मन्त्र से भगवान का स्मरण किया जाता है।
कामदा सप्तमी को निराहार व्रत करना होता है.
प्रातः स्नानादि के बाद सूर्य देव की पूजा की जाती है.
सूर्य भगवान का पूजन करके आज घी , गुड़ इत्यादि का दान किया जाता है
“सूर्याय नमः” मंत्र से भगवान का स्मरण किया जाता है.
अष्टमी को स्नान करके सूर्य देव का हवन पूजन किया जाता है.
दूसरे दिन ब्राह्मणों का पूजन करके खीर खिलाने का विधान है.

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