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मंदिर

एक ऐसा मंदिर जहां प्रतिमा का वजन घटता-बढ़ता है

दिव्यसुधा
Last updated: February 16, 2026 11:45 am
दिव्यसुधा
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काल गरुड़न मंदिर की गरुड़ प्रतिमा, तमिलनाडु में चमत्कारिक मंदिर
काल गरुड़न मंदिर में स्थित गरुड़ प्रतिमा, जो भक्तों की श्रद्धा और चमत्कार का प्रतीक है।
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भारत रहस्यमयी और आस्था से भरे मंदिरों का देश है। इन्हीं चमत्कारी मंदिरों में से एक है तमिलनाडु में स्थित प्रसिद्ध काल गरुड़न मंदिर। यह मंदिर नाचियार कोविल मंदिर परिसर में स्थित है और यह स्थान दक्षिण भारत की भक्ति परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यह मंदिर तमिलनाडु में स्थित है और यहां हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर भगवान विष्णु के वाहन माने जाने वाले गरुड़ को समर्पित है। हिंदू धर्म में गरुड़ को शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां की काल गरुड़न प्रतिमा है, जिसके बारे में माना जाता है कि उसका वजन अपने आप बढ़ता और घटता रहता है।

गरुड़ देव: भक्तों के दुख और पापों को समेटने वाले

मंदिर की मान्यता के अनुसार जब काल गरुड़न की प्रतिमा को मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकाला जाता है, तब शुरुआत में इसे उठाने के लिए केवल चार लोगों की जरूरत होती है। लेकिन जैसे-जैसे प्रतिमा को बाहर की ओर ले जाया जाता है, उसका वजन बढ़ने लगता है। कुछ दूरी पर पहुंचने के बाद इसे उठाने के लिए 8 लोग लगते हैं, फिर 16, फिर 32 और कई बार 64 लोगों तक की जरूरत पड़ जाती है।

सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि जब पूजा और परिक्रमा के बाद प्रतिमा को वापस मंदिर के अंदर लाया जाता है, तब उसका वजन धीरे-धीरे कम होने लगता है। वापसी में फिर कम लोगों की जरूरत पड़ती है और अंत में केवल चार लोग ही प्रतिमा को गर्भगृह में स्थापित कर देते हैं। यह घटना हर बार उत्सव के दौरान देखी जाती है और इसे मंदिर का दिव्य चमत्कार माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गरुड़ देव अपने भक्तों के दुख और पापों को अपने ऊपर ले लेते हैं। जब प्रतिमा बाहर जाती है, तब वह भक्तों की नकारात्मक ऊर्जा को अपने अंदर समाहित करती है, जिससे वजन बढ़ता है। जब वापस मंदिर आती है, तब वह ऊर्जा समाप्त हो जाती है और वजन कम हो जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कुछ लोग इसे संतुलन, उठाने की तकनीक या सामूहिक शक्ति का प्रभाव मानते हैं। लेकिन आज तक इसका कोई स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है। यही कारण है कि यह मंदिर आज भी रहस्य और आस्था का केंद्र बना हुआ है।

दक्षिण भारतीय शैली का भव्य मंदिर: धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर

मंदिर की वास्तुकला भी बेहद सुंदर है। दक्षिण भारतीय शैली में बने इस मंदिर में बारीक नक्काशी, भव्य गोपुरम और प्राचीन मूर्तिकला देखने को मिलती है। यहां का वातावरण बहुत शांत और आध्यात्मिक माना जाता है। त्योहारों के समय यहां विशेष पूजा और शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें काल गरुड़न की प्रतिमा को विशेष रूप से बाहर लाया जाता है। यह मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। दक्षिण भारत की परंपराओं, रीति-रिवाजों और मंदिर संस्कृति को समझने के लिए यह स्थान बहुत खास माना जाता है।इस मंदिर की कहानी हमें यह भी सिखाती है कि आस्था और विश्वास इंसान के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चाहे विज्ञान इसे पूरी तरह समझ पाए या नहीं, लेकिन भक्तों के लिए यह चमत्कार उनकी श्रद्धा को और मजबूत करता है। आज काल गरुड़न मंदिर भारत के सबसे रहस्यमयी मंदिरों में गिना जाता है और यहां आने वाले श्रद्धालु इसे दिव्य शक्ति का प्रतीक मानते हैं।

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