Thursday, 26 Mar 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > काल भैरव जयंती 2025: भगवान शिव के रौद्र रूप की आराधना का पावन पर्व
व्रत और त्योहार

काल भैरव जयंती 2025: भगवान शिव के रौद्र रूप की आराधना का पावन पर्व

दिव्यसुधा
Last updated: November 9, 2025 4:22 pm
दिव्यसुधा
Share
काल भैरव जयंती पूजा 2025, भगवान काल भैरव की आराधना, कालाष्टमी पर्व
मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाने वाली काल भैरव जयंती भगवान शिव के रौद्र और रक्षक स्वरूप की आराधना का पवित्र पर्व है।
SHARE

हिंदू धर्म में भगवान काल भैरव को समय के अधिपति और न्याय के देवता माना गया है। वे भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप हैं, जिनकी आराधना से व्यक्ति के जीवन से भय, नकारात्मकता और संकट दूर होते हैं। पुराणों में वर्णन मिलता है कि जब ब्रह्मा जी ने अहंकारवश भगवान शिव का अपमान किया, तब उनके क्रोध से काल भैरव का प्राकट्य हुआ। भगवान काल भैरव का स्वरूप यह दर्शाता है कि अधर्म और अन्याय का अंत निश्चित है।

काल भैरव जयंती का महत्व

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव जयंती मनाई जाती है। इस दिन को “भैरव अष्टमी” या “कालाष्टमी” भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव के भैरव स्वरूप का अवतरण हुआ था। यह तिथि अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली होती है, क्योंकि इस दिन की गई भैरव उपासना से जीवन के सभी दोष और पाप नष्ट हो जाते हैं।

भगवान काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति के चारों ओर की नकारात्मक शक्तियाँ समाप्त होती हैं। भय, रोग और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। जीवन में आत्मविश्वास और साहस का संचार होता है। साथ ही, कार्यों में सफलता और आर्थिक स्थिरता भी प्राप्त होती है।

काल भैरव जयंती 2025 की तिथि

पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर 2025 (मंगलवार) को सुबह 11 बजकर 08 मिनट पर होगी और यह तिथि 12 नवंबर 2025 (बुधवार) को सुबह 10 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि धर्मशास्त्रों में उदय तिथि को प्रमुख माना गया है, इसलिए काल भैरव जयंती 12 नवंबर 2025, बुधवार के दिन मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान काल भैरव की विशेष पूजा, व्रत और उपासना करते हैं।

काल भैरव जयंती पर किए जाने वाले शुभ उपाय

1. मीठे भोग का अर्पण करें:
पूजा के बाद भगवान काल भैरव को मीठी रोटी, नारियल या जलेबी का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।

2. सरसों के तेल का दीपक जलाएं:
भगवान काल भैरव के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। यह दीपक घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और वातावरण को सकारात्मक बनाता है।

3. भैरव चालीसा या भैरव अष्टक का पाठ करें:
इस दिन भैरव चालीसा, भैरव अष्टक या “काल भैरव कवच” का पाठ करने से भय, रोग और बाधाएँ दूर होती हैं। व्यक्ति के जीवन में आत्मबल और शांति का संचार होता है।

4. काले धागे का उपाय करें:
भगवान काल भैरव की पूजा के दौरान उनके चरणों में काला धागा अर्पित करें। इसके बाद इस मंत्र का 11 बार जप करें —
“ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ।”
मान्यता है कि यह उपाय व्यक्ति के जीवन से सभी संकटों को समाप्त करता है।

5. कुत्तों को भोजन कराएं:
भगवान काल भैरव का वाहन काला कुत्ता है। इसलिए इस दिन काले कुत्ते को रोटी, दूध या मिठाई खिलाना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान भैरव की कृपा सदैव बनी रहती है और जीवन में दया और संरक्षण का आशीर्वाद मिलता है।

काल भैरव जयंती का व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में समय का सही उपयोग होता है। आलस्य, भय और बाधाएँ दूर होती हैं। भगवान काल भैरव की कृपा से व्यक्ति धर्ममार्ग पर चलता है और उसकी आत्मा में दिव्यता और स्थिरता का संचार होता है।

TAGGED:bhairav ashtami 2025bhairav mantraHindu Festivalskaal bhairav jayantikaal bhairav worshipshiva templesspiritual indiaकाल भैरव जयंती 2025काल भैरव पूजा विधिकाल भैरव मंदिरकालाष्टमीभगवान शिवभैरव अष्टमीभैरव चालीसा
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article छाया सोमेश्वर महादेव मंदिर तेलंगाना, शिवलिंग पर रहस्यमयी छाया, प्राचीन हिंदू मंदिर वास्तुकला छाया सोमेश्वर महादेव: 800 साल की रहस्यमयी छाया
Next Article 19 नवंबर 2025 का राशिफल – सभी 12 राशियों के लिए दैनिक भविष्यफल और आज का भाग्यफल आज का राशिफल 2025 – मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का सटीक भविष्यफल
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा और उनकी अष्टभुजा स्वरूप की दिव्य छवि
अन्य

नवरात्रि का चौथा दिन: मां कुष्मांडा की पूजा का महत्व

By Ekta Mishra
भगवान सत्यनारायण की व्रत कथा, द्वितीय – अध्याय
व्रत और त्योहार

श्री सत्यनारायण व्रत कथा, तृतीय – अध्याय

By दिव्यसुधा
featuredव्रत और त्योहार

पितृ पक्ष 2025: पूर्वजों की कृपा पाने के लिए लगाएं ये 3 पेड़-पौधे, मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

By दिव्यसुधा
maa kaalratri
व्रत और त्योहार

नवरात्रि विशेष… नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की व्रत कथा, मिलेगी हर बाधा और भय से मुक्ति

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?